Reliance Power AGM: अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर की 32वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों ने पूंजी जुटाने से जुड़े अहम प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। कंपनी QIP और NCD के जरिए फंड जुटाने की दिशा में आगे बढ़ेगी। AGM में नए स्वतंत्र निदेशक की नियुक्ति को भी हरी झंडी मिली।
नई दिल्ली। अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर (Reliance Power) ने शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 को अपनी 32वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) आयोजित की। बैठक में कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति और भविष्य की योजनाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हुई। शेयरधारकों ने फंड जुटाने और निदेशकों की नियुक्ति समेत कई प्रस्तावों को मंजूरी दे दी।
कंपनी के मुताबिक, AGM का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यमों के जरिए किया गया। बैठक की अध्यक्षता कंपनी के कार्यकारी निदेशक, CEO और CFO नीरज पारख ने की। कोरम पूरा होने के बाद बैठक की कार्यवाही शुरू हुई, जिसमें कंपनी के निदेशक, वैधानिक ऑडिटर्स और प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों ने हिस्सा लिया।
QIP और NCD के जरिए जुटाया जाएगा फंड
रिलायंस पावर की AGM में सबसे अहम फैसला कंपनी के लिए पूंजी जुटाने से जुड़े प्रस्तावों पर रहा। शेयरधारकों ने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए प्रतिभूतियां जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
इसके अलावा कंपनी को नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी करके फंड जुटाने की भी अनुमति मिल गई है। इन दोनों माध्यमों के जरिए कंपनी भविष्य में अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए पूंजी जुटा सकती है।
QIP के जरिए आमतौर पर संस्थागत निवेशकों से पूंजी जुटाई जाती है, जबकि NCD के माध्यम से कंपनी कर्ज के रूप में फंड जुटाती है। ऐसे में AGM में इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलना रिलायंस पावर की आगामी वित्तीय रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ई-वोटिंग प्रक्रिया की भी दी गई जानकारी
कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि AGM से पहले रिमोट ई-वोटिंग की प्रक्रिया के लिए KFin Technologies Limited (KFintech) की सेवाएं ली गई थीं।
वहीं, ई-वोटिंग प्रक्रिया के लिए स्क्रूटिनाइजर के तौर पर दयाल एंड लोहिया, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के पार्टनर अनिल लोहिया को नियुक्त किया गया था। उनकी अनुपस्थिति में खुशित जैन को यह जिम्मेदारी दी गई थी।
नए स्वतंत्र निदेशक की नियुक्ति को मंजूरी
AGM में कंपनी के बोर्ड से जुड़े प्रस्तावों पर भी शेयरधारकों ने अपनी मंजूरी दी। बैठक में 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्तीय वर्ष के ऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड वित्तीय विवरणों को अपनाया गया।
इसके साथ ही सचिन महापात्रा को रोटेशन के आधार पर निदेशक के रूप में दोबारा नियुक्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई।
वहीं, डॉ. अविनाश गुप्ता की स्वतंत्र निदेशक के तौर पर नियुक्ति के प्रस्ताव को भी शेयरधारकों की मंजूरी मिली है। बोर्ड में इस तरह के बदलाव कंपनी के कॉरपोरेट गवर्नेंस और रणनीतिक फैसलों के लिहाज से महत्वपूर्ण होते हैं।
वित्तीय मजबूती पर कंपनी का फोकस
AGM में फंड जुटाने से जुड़े प्रस्तावों की मंजूरी से साफ है कि रिलायंस पावर अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने और भविष्य की योजनाओं के लिए पूंजी की उपलब्धता मजबूत करने पर ध्यान दे रही है।
हालांकि, QIP और NCD के जरिए जुटाई जाने वाली रकम का अंतिम इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा, यह कंपनी की आगे की घोषणाओं और संबंधित शर्तों पर निर्भर करेगा। निवेशकों के लिए अब कंपनी की आगामी फाइलिंग और फंड जुटाने की प्रक्रिया से जुड़े अपडेट महत्वपूर्ण रहेंगे।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
रिलायंस पावर के लिए AGM में फंड जुटाने के प्रस्तावों को मंजूरी मिलना एक महत्वपूर्ण कॉरपोरेट डेवलपमेंट है। इससे कंपनी को भविष्य में पूंजी जुटाने के अतिरिक्त विकल्प मिल सकते हैं। हालांकि, केवल फंड जुटाने की मंजूरी को शेयर में तेजी या गिरावट का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, कर्ज, आगामी परिणाम और फंड के इस्तेमाल जैसी बातों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह खबर केवल सूचनात्मक उद्देश्य से है। इसमें दिए गए शेयर बाजार से जुड़े तथ्य निवेश की सलाह नहीं हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपने सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से सलाह जरूर लें।


