Ram Mandir Trust CEO: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। CEO पद के लिए देशभर से मिले 5200 आवेदनों में से 16 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया था। इन सभी उम्मीदवारों के इंटरव्यू अब पूरे हो चुके हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही ट्रस्ट अपने पहले फुल-टाइम CEO के नाम का ऐलान कर सकता है।
इस हाई-प्रोफाइल पद के लिए प्रशासनिक सेवा, पुलिस सेवा, सेना और मंदिर प्रबंधन से जुड़े अनुभवी अधिकारियों ने दावेदारी पेश की है। उम्मीदवारों में पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडे और पूर्व IAS अधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है।
राम मंदिर ट्रस्ट CEO पद के लिए 5200 लोगों ने किया था आवेदन
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के बढ़ते प्रबंधन, सुरक्षा, वित्तीय व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज को देखते हुए पूर्णकालिक CEO नियुक्त करने का फैसला लिया है।
जानकारी के मुताबिक, CEO पद के लिए कुल 5200 आवेदन प्राप्त हुए थे। शुरुआती स्क्रीनिंग के बाद 16 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए चुना गया। इनमें पूर्व IAS-IPS अधिकारी, सेना के रिटायर अधिकारी, सिक्योरिटी एक्सपर्ट और बड़े धार्मिक संस्थानों के प्रशासनिक अनुभव वाले लोग शामिल हैं।
एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजेश पांडे भी CEO पद की दौड़ में
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के प्रमुख दावेदारों में पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडे का नाम भी शामिल है। राजेश पांडे ने खुद पुष्टि की है कि उन्होंने चयन समिति के सामने इंटरव्यू दिया है।
राजेश पांडे 2003 बैच के IPS अधिकारी रहे हैं। वह उत्तर प्रदेश पुलिस की महत्वपूर्ण यूनिट्स जैसे स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
उन्होंने लखनऊ, अलीगढ़, मेरठ और सहारनपुर जैसे जिलों में SSP के पद पर काम किया। राजेश पांडे को उत्तर प्रदेश के चर्चित एनकाउंटर्स और आतंकवाद विरोधी अभियानों में भूमिका के लिए जाना जाता है।
वह अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि परिसर पर 2005 में हुए आतंकी हमले और 2006 में वाराणसी में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों की जांच से भी जुड़े रहे हैं।
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का अनुभव योगेश्वर राम मिश्रा की ताकत
पूर्व IAS अधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा भी राम मंदिर ट्रस्ट CEO पद के मजबूत दावेदारों में शामिल हैं।
योगेश्वर राम मिश्रा के पास मंदिर प्रशासन और बड़े धार्मिक प्रोजेक्ट्स को संभालने का अनुभव है। वह काशी विश्वनाथ धाम (काशी कॉरिडोर) के विकास कार्यों के दौरान अहम भूमिका निभा चुके हैं।
उनके प्रशासनिक अनुभव और धार्मिक परियोजनाओं के प्रबंधन की क्षमता को उनकी दावेदारी की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है।
CEO चयन के इंटरव्यू में किन बातों पर हुई चर्चा?
रिपोर्ट्स के अनुसार, चयन समिति ने उम्मीदवारों से प्रशासनिक अनुभव, मंदिर प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े कई सवाल पूछे।
उम्मीदवारों से यह भी जाना गया कि वे:
- राम मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को कैसे मजबूत करेंगे।
- श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के प्रबंधन को कैसे संभालेंगे।
- मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता कैसे बनाए रखेंगे।
- धार्मिक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के साथ तालमेल कैसे करेंगे।
राम मंदिर ट्रस्ट को क्यों जरूरत पड़ी पूर्णकालिक CEO की?
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद ट्रस्ट की जिम्मेदारियां काफी बढ़ गई हैं। मंदिर संचालन, श्रद्धालुओं की सुविधाएं, दान व्यवस्था, सुरक्षा और भविष्य की योजनाओं के लिए एक अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी की जरूरत महसूस की जा रही थी।
इसके अलावा, राम मंदिर के नाम पर मिलने वाले चंदे और वित्तीय प्रबंधन को लेकर समय-समय पर उठे सवालों के बाद ट्रस्ट अपनी व्यवस्था को और मजबूत करना चाहता है।
पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति का उद्देश्य ट्रस्ट के कामकाज में बेहतर प्रबंधन, जवाबदेही और पारदर्शिता लाना है।
कब होगा राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO का ऐलान?
चयन समिति द्वारा सभी 16 उम्मीदवारों के इंटरव्यू पूरे किए जा चुके हैं। अब अंतिम निर्णय ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों द्वारा लिया जाएगा।
हालांकि अभी आधिकारिक रूप से किसी नाम की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजेश पांडे और योगेश्वर राम मिश्रा जैसे अनुभवी अधिकारियों को इस पद के लिए प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।


