Income Tax Notice: हरियाणा के एक प्रॉपर्टी डीलर ने बैंक खाते में 54 लाख रुपये कैश जमा किए थे। इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं करने पर विभाग ने इसे अघोषित आय मान लिया था, लेकिन ITAT दिल्ली ने सबूतों के आधार पर बड़ी राहत देते हुए टैक्स देनदारी को खत्म कर दिया।
अगर आपके बैंक खाते में बड़ी मात्रा में नकदी जमा होती है तो इनकम टैक्स विभाग इसकी जांच कर सकता है। कई बार ऐसा भी होता है कि बैंक खाते में जमा रकम आपकी कमाई नहीं होती, लेकिन पर्याप्त दस्तावेज नहीं होने पर उसे आपकी आय मान लिया जाता है। ऐसा ही एक मामला हरियाणा में सामने आया, जहां एक प्रॉपर्टी डीलर को 54 लाख रुपये की नकद जमा राशि को लेकर इनकम टैक्स नोटिस मिला था।
हालांकि, बाद में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) दिल्ली ने सबूतों के आधार पर प्रॉपर्टी डीलर को बड़ी राहत दी और 54 लाख रुपये की टैक्स देनदारी को रद्द कर दिया।
बैंक खाते में जमा किए थे 54 लाख रुपये कैश
मामला हरियाणा के रोहतक के रहने वाले एक प्रॉपर्टी डीलर मिस्टर राठी से जुड़ा है। वित्त वर्ष 2011-12 में उन्होंने अपने व्यक्तिगत बैंक खाते में 54 लाख रुपये नकद जमा किए थे।
इस दौरान उन्होंने संबंधित वर्ष का इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल नहीं किया था। कई साल बाद साल 2019 में इनकम टैक्स विभाग को इस नकद जमा राशि की जानकारी मिली।
इसके बाद विभाग ने राठी को आयकर अधिनियम की धारा 148 और धारा 142(1) के तहत नोटिस जारी किए। विभाग ने उनसे बैंक खाते में जमा रकम के स्रोत की जानकारी मांगी, लेकिन शुरुआती स्तर पर राठी की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।
इनकम टैक्स विभाग ने माना अघोषित आय
नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर असेसिंग ऑफिसर (AO) ने 16 दिसंबर 2019 को 54 लाख रुपये की नकद जमा राशि को राठी की अघोषित आय मान लिया।
इसके बाद इस रकम को उनकी कर योग्य आय में जोड़ दिया गया और उन्हें टैक्स भुगतान का आदेश दिया गया।
राठी ने इस फैसले के खिलाफ कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स (अपील) यानी CIT-A के सामने अपील की, लेकिन मार्च 2026 में उनकी याचिका खारिज कर दी गई।
इसके बाद उन्होंने ITAT दिल्ली का दरवाजा खटखटाया।
प्रॉपर्टी डीलिंग में सिर्फ मध्यस्थ थे राठी
ITAT में सुनवाई के दौरान राठी ने बताया कि 54 लाख रुपये उनकी व्यक्तिगत आय नहीं थी। वह सिर्फ एक प्रॉपर्टी डीलर के रूप में खरीदारों और विक्रेताओं के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे।
उन्होंने बताया कि संपत्ति खरीदने वाले ग्राहकों से उन्हें नकद राशि मिली थी। इसके बाद उन्होंने वही पैसा अपने बैंक खाते में जमा किया और संपत्ति की रजिस्ट्री पूरी कराने के लिए यह रकम सीधे विक्रेताओं के खाते में ट्रांसफर कर दी थी।
यानी उनका बैंक खाता केवल पैसों के ट्रांसफर का माध्यम था।
पेश किए गए ये मजबूत सबूत
राठी ने ITAT के सामने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश किए, जिनमें शामिल थे:
- सिंह परिवार द्वारा की गई 8 सेल डीड।
- संपत्ति विक्रेताओं के 3 शपथ पत्र।
- खरीदारों के 7 शपथ पत्र।
- बैंक पासबुक और पूरे लेन-देन का रिकॉर्ड।
इन दस्तावेजों में खरीदारों ने पुष्टि की थी कि उन्होंने संपत्ति खरीदने के लिए राठी को नकद भुगतान किया था।
वहीं विक्रेताओं ने भी बताया कि उन्हें संपत्ति बिक्री की रकम प्राप्त हुई थी।
ITAT दिल्ली ने क्यों दी राहत?
ITAT दिल्ली ने सभी दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की जांच के बाद पाया कि 54 लाख रुपये राठी की खुद की कमाई नहीं थी।
ट्रिब्यूनल ने माना कि राठी इस पूरे लेन-देन में केवल एक माध्यम की भूमिका निभा रहे थे। बैंक खाते में रकम जमा होने के बाद उसका उपयोग संपत्ति सौदे को पूरा करने के लिए किया गया था।
ITAT ने कहा कि जब किसी रकम के स्रोत और उसके इस्तेमाल का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध हो, तो उसे सिर्फ बैंक खाते में जमा होने के आधार पर अघोषित आय नहीं माना जा सकता।
रद्द हुई 54 लाख रुपये की टैक्स देनदारी
ITAT दिल्ली ने असेसिंग ऑफिसर और CIT-A के आदेश को अनुचित मानते हुए रद्द कर दिया।
इस फैसले के बाद राठी पर लगाई गई 54 लाख रुपये की अतिरिक्त आय और उससे जुड़ी टैक्स देनदारी खत्म हो गई।
बैंक में कैश जमा करने वालों के लिए जरूरी सीख
यह मामला उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण है जो बड़ी नकद राशि का लेन-देन करते हैं।
अगर बैंक खाते में बड़ी रकम जमा होती है तो उसके स्रोत का रिकॉर्ड रखना बेहद जरूरी है। संपत्ति सौदे, उधार, व्यापारिक लेन-देन या किसी अन्य माध्यम से प्राप्त रकम के लिए दस्तावेज, एग्रीमेंट, रसीद और बैंक रिकॉर्ड सुरक्षित रखना चाहिए।
क्योंकि इनकम टैक्स विभाग जांच के दौरान केवल बैंक खाते में जमा राशि को देखकर सवाल उठा सकता है। ऐसे मामलों में सही दस्तावेज ही करदाता को राहत दिला सकते हैं।


