NALSAR Students Protest: सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के रुख पर सवाल उठाते हुए NALSAR छात्रों और फैकल्टी को राहत दी है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी असहमति जताने का अधिकार है और ऐसे मामलों में बड़ा दिल दिखाने की जरूरत है।
हैदराबाद स्थित नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ (NALSAR) में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मामले की सुनवाई के दौरान खुद CJI सूर्यकांत ने छात्रों के समर्थन में रुख अपनाते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के हस्तक्षेप पर सवाल उठाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने BCI के उस निर्देश पर जवाब मांगा है, जिसमें NALSAR के छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई थी। अदालत ने छात्रों और फैकल्टी सदस्यों को सुरक्षा देते हुए आदेश दिया है कि उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
BCI के हस्तक्षेप पर CJI सूर्यकांत ने उठाए सवाल
#CourtCorner | #BarCouncil Order Barring NALSAR 2026 Graduates From Advocate Enrolment Issue Reaches SC
👉CJI says the issue is between students and me, they have written to me, who is Bar Council to intervene
👉CJI says Bar Council action is absolutely uncalled for, students… pic.twitter.com/WC1flxBwOK
— CNBC-TV18 (@CNBCTV18Live) August 14, 2026 सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने BCI की कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह मामला छात्रों और उनके बीच का है, इसमें BCI को हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं थी।
CJI ने कहा, “छात्रों ने मुझे पत्र लिखा है। BCI बीच में दखल देने वाला कौन होता है?”
सुप्रीम कोर्ट ने BCI से पूछा कि उसने NALSAR छात्रों के खिलाफ निर्देश जारी करने से पहले क्या कोई बैठक की थी या नहीं। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि क्या बार काउंसिल के सभी सदस्यों को इस फैसले की जानकारी थी।
छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार: CJI
CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को अपनी असहमति व्यक्त करने का अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक विरोध शांतिपूर्ण है, तब तक छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भले ही किसी की राय गलत मानी जाए, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार हर व्यक्ति को है।
अपनी छात्र जीवन की याद करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि वह भी अपने कॉलेज के दिनों में ऐसी गतिविधियों में हिस्सा लेते रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज और संस्थानों को छात्रों के प्रति उदार दृष्टिकोण रखना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों और फैकल्टी को दिया संरक्षण
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि NALSAR के छात्रों और फैकल्टी सदस्यों के खिलाफ CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में आमंत्रित किए जाने के विरोध से जुड़े मामले में कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाए।
अदालत के इस आदेश से उन छात्रों को राहत मिली है, जिन पर BCI की कार्रवाई का असर पड़ने की आशंका थी।
क्या था पूरा NALSAR विवाद?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब NALSAR के कुछ छात्रों ने 2026 के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई। छात्रों ने अपनी चिंताओं से CJI को अवगत कराया था।
इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 13 अगस्त को एक निर्देश जारी करते हुए राज्य बार काउंसिलों से कहा था कि NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के नामांकन पर रोक लगाई जाए।
BCI ने यूनिवर्सिटी से उन छात्रों की जानकारी भी मांगी थी, जिन्होंने विरोध अभियान शुरू किया था या उसमें हिस्सा लिया था।
BCI ने बाद में वापस लिया अपना आदेश
BCI के इस कदम की छात्रों, वरिष्ठ वकीलों और नागरिक समाज के कई लोगों ने आलोचना की। विवाद बढ़ने के बाद BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने घोषणा की कि परिषद ने अपना आदेश वापस ले लिया है।
BCI ने कहा कि जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि 2026 बैच के सभी छात्रों की किसी भी कथित गतिविधि में भूमिका नहीं थी और आगे कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है।
लोकतांत्रिक मूल्यों पर फिर बहस
NALSAR मामला अब छात्रों के अभिव्यक्ति के अधिकार, शैक्षणिक संस्थानों की स्वतंत्रता और पेशेवर निकायों की भूमिका को लेकर बड़ी बहस का विषय बन गया है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने यह संदेश दिया है कि संस्थानों में असहमति की आवाज को दबाने के बजाय संवाद और संवैधानिक मूल्यों के आधार पर समाधान तलाशना चाहिए।


