Stock Market Fall: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 14 अगस्त को शुरुआती कारोबार में गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में खुले। अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार की धारणा को कमजोर किया।
शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 395.66 अंक गिरकर 77,684.37 के निचले स्तर तक पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी भी करीब 99 अंक टूटकर 24,296.80 के लो लेवल पर आ गया।
इससे पहले गुरुवार को सेंसेक्स 113.61 अंक यानी 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,079.96 पर बंद हुआ था। दूसरी ओर, निफ्टी 40.10 अंक यानी 0.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,395.85 पर बंद हुआ था। निफ्टी में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कमजोरी देखने को मिली।
शेयर बाजार में गिरावट के 3 बड़े कारण
1. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
शेयर बाजार पर सबसे बड़ा दबाव ग्लोबल ऑयल मार्केट से आया है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 87 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड कर रही है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी से देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है।
महंगे कच्चे तेल का असर कई मोर्चों पर देखने को मिल सकता है:
- देश का व्यापार घाटा बढ़ सकता है।
- महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
- कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
- रुपये पर भी दबाव आ सकता है।
इसी वजह से निवेशकों ने शुक्रवार को सतर्क रुख अपनाया।
2. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
भारतीय बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली भी गिरावट की बड़ी वजह बनी हुई है।
FIIs ने गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में भारतीय शेयरों की बिक्री की। उन्होंने करीब 510 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार में लिक्विडिटी पर असर पड़ता है और सेंसेक्स-निफ्टी जैसे प्रमुख इंडेक्स पर दबाव बढ़ता है।
3. अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता
भूराजनीतिक तनाव ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए नौसैनिक नाकेबंदी को अनिश्चित समय तक जारी रख सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर वार्ता में अभी तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया है। इस स्थिति ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ाई है।
निवेशक आमतौर पर ऐसे समय में जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाते हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ते हैं।
आगे बाजार की दिशा पर नजर
शेयर बाजार की नजर अब ग्लोबल संकेतों, कच्चे तेल की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और अमेरिका-ईरान तनाव पर रहेगी। अगर कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आती है या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो बाजार पर दबाव जारी रह सकता है।
वहीं, घरेलू आर्थिक आंकड़ों और कंपनियों के तिमाही नतीजों से बाजार को आगे की दिशा मिल सकती है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। NewsJagran किसी भी निवेश की सलाह नहीं देता है।


