Awarapan 2 Review: इमरान हाशमी की फिल्म ‘आवारापन 2’ ने रिलीज से पहले ही दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह पैदा कर दिया था। सालों बाद शिवम पंडित का किरदार बड़े पर्दे पर लौट आया है। फिल्म में प्यार, दर्द, त्याग और इंसानियत की कहानी को एक बार फिर भावनात्मक अंदाज में पेश किया गया है। अगर आपके लिए पहली ‘आवारापन’ सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक एहसास थी, तो इसका सीक्वल आपको जरूर पसंद आ सकता है।
फिल्म- आवारापन 2
कलाकार- इमरान हाशमी, दिशा पाटनी, शबाना आजमी, पूरन गब्बी, सुविंदर विक्की और विजयंत कोहली
निर्देशक- नितिन कक्कड़
रेटिंग- 4 स्टार्स
कहानी में क्या है नया?
‘आवारापन 2’ की कहानी वहीं से आगे बढ़ती है जहां पहली फिल्म खत्म हुई थी। इसलिए फिल्म देखने से पहले पहली ‘आवारापन’ देख लेना बेहतर होगा। मेकर्स ने पुराने घटनाक्रम की झलकियों के जरिए शिवम पंडित की पिछली जिंदगी को दोबारा याद दिलाया है।
19 साल बाद शिवम की जिंदगी में एक नया मोड़ आता है। आलिया के जाने के बाद भी उसके दिल में उसका प्यार जिंदा है। एक दिन आलिया की कब्र के पास उसे एक नवजात बच्ची के रोने की आवाज सुनाई देती है। शिवम उस बच्ची को अनाथालय पहुंचाता है और उसका नाम आलिया रख देता है।
इसके बाद वह बच्ची और अनाथालय की लगातार मदद करता रहता है। लेकिन उसकी जिंदगी तब बदल जाती है जब उसे पता चलता है कि आलिया ह्यूमन ट्रैफिकिंग का शिकार हो चुकी है। इसके बाद शिवम एक बार फिर अपने दर्द और गुस्से के साथ एक मिशन पर निकल पड़ता है।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है इमोशन
‘आवारापन 2’ की सबसे बड़ी खूबी इसका इमोशनल कनेक्शन है। फिल्म सिर्फ शिवम के एक्शन और संघर्ष को नहीं दिखाती, बल्कि उसके पीछे छिपे दर्द और वजह को भी समझाती है।
प्यार, खोने का दर्द, रिश्तों की अहमियत और इंसानियत जैसे पहलुओं को कहानी में खूबसूरती से जोड़ा गया है। स्क्रीनप्ले कई जगह प्रभाव छोड़ता है और डायलॉग्स में भी पहले पार्ट जैसी गहराई नजर आती है।
नितिन कक्कड़ का निर्देशन कैसा है?
निर्देशक नितिन कक्कड़ ने फिल्म को भावनाओं के साथ आगे बढ़ाया है। फिल्म में जरूरत से ज्यादा VFX का इस्तेमाल नहीं किया गया है और कहानी को प्राथमिकता दी गई है।
हालांकि एडिटिंग थोड़ी और बेहतर हो सकती थी। खासकर पहला हाफ कुछ जगहों पर धीमा महसूस होता है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है फिल्म पकड़ बना लेती है।
म्यूजिक ने बढ़ाया असर
‘आवारापन’ अपने शानदार संगीत के लिए भी याद की जाती है और सीक्वल इस विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश करता है। फिल्म के गाने कहानी के मूड के साथ चलते हैं और इमोशनल सीन्स को और मजबूत बनाते हैं।
सबसे अच्छी बात यह है कि म्यूजिक सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं रखा गया है, बल्कि कहानी का हिस्सा महसूस होता है।
इमरान हाशमी ने जीता दिल
शिवम पंडित के किरदार में इमरान हाशमी की वापसी फिल्म की सबसे बड़ी खासियत है। उनका लुक, इंटेंस आंखें और शांत लेकिन दर्द से भरा अंदाज पुराने फैंस को जरूर पसंद आएगा।
इमरान ने साबित किया है कि वह सिर्फ रोमांटिक किरदारों के लिए नहीं बल्कि गंभीर और इमोशनल भूमिकाओं में भी शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं। गुस्से वाले सीन हों या दर्द भरे पल, वह पूरी तरह शिवम के किरदार में नजर आते हैं।
बाकी कलाकारों का प्रदर्शन
शबाना आजमी का रोल भले ही सीमित है, लेकिन वह अपनी मौजूदगी दर्ज कराती हैं। पूरन गब्बी का किरदार प्रभावशाली है और उनकी बॉडी लैंग्वेज ध्यान खींचती है।
दिशा पाटनी इस बार सिर्फ ग्लैमर तक सीमित नहीं हैं और अपने किरदार को अच्छे से निभाती हैं। सुविंदर विक्की और विजयंत कोहली समेत बाकी कलाकार भी कहानी को मजबूती देते हैं।
कमियां क्या हैं?
फिल्म में कुछ कमियां भी हैं। एडिटिंग थोड़ी और चुस्त होती तो कहानी का असर और बढ़ सकता था। कुछ हिस्से लंबे लग सकते हैं, लेकिन फिल्म की भावनात्मक ताकत इन कमियों को काफी हद तक संभाल लेती है।
देखें या नहीं?
अगर आपने पहली ‘आवारापन’ को पसंद किया था, तो ‘आवारापन 2’ आपके लिए एक नॉस्टेल्जिक सफर साबित हो सकती है। इमरान हाशमी का शानदार अभिनय, भावनात्मक कहानी और शिवम पंडित का किरदार फिल्म को खास बनाते हैं।
प्यार, दर्द और इंसानियत की कहानी देखने के लिए इस वीकेंड ‘आवारापन 2’ को मौका दिया जा सकता है। यह फिल्म आपको पुराने जख्मों और यादों से फिर जोड़ने की कोशिश करती है।


