Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं और सुखी वैवाहिक जीवन, पति की लंबी आयु तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। हरियाली तीज पर हरे रंग के कपड़े, हरी चूड़ियां और मेहंदी लगाने की परंपरा भी प्रचलित है। हालांकि, व्रत रखने वाली महिलाओं को पूजा-पाठ के साथ कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरियाली तीज के दिन श्रद्धा और संयम के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद मिलता है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इस पर्व की पूजा-विधि और मान्यताओं में कुछ अंतर भी हो सकता है। इसलिए यहां बताई गई बातों को धार्मिक परंपरा और मान्यता के तौर पर समझना चाहिए।
हरियाली तीज पर क्या करना चाहिए?
भगवान शिव और माता पार्वती की करें पूजा
हरियाली तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। व्रती महिलाएं सुबह स्नान आदि करके स्वच्छ कपड़े पहनती हैं और पूजा की तैयारी करती हैं। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करके विधि-विधान से पूजा की जाती है।
भगवान शिव को जल, फूल, बेलपत्र और अन्य पूजा सामग्री अर्पित की जाती है। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री जैसे सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी आदि अर्पित करने की परंपरा है। पूजा के दौरान भगवान शिव-पार्वती से परिवार की सुख-शांति और वैवाहिक जीवन में प्रेम बनाए रखने की प्रार्थना की जाती है।
हरे रंग के कपड़े और चूड़ियां पहनें
हरियाली तीज पर हरे रंग को विशेष शुभ माना जाता है। यही वजह है कि इस दिन महिलाएं हरे रंग की साड़ी, लहंगा, सूट या अन्य पारंपरिक परिधान पहनती हैं। हरी चूड़ियां पहनने और मेहंदी लगाने की परंपरा भी कई जगहों पर देखने को मिलती है।
धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं में हरा रंग हरियाली, प्रकृति, समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, व्रत या पूजा की सफलता केवल किसी खास रंग के कपड़े पहनने पर निर्भर नहीं होती। सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, पूजा और अपनी परंपरा का पालन करना है।
सुहाग का सामान दान करें
हरियाली तीज पर सुहागिन महिलाओं को सुहाग सामग्री दान करने की परंपरा भी है। व्रती महिलाएं अपनी सामर्थ्य के अनुसार चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, कंघी, कपड़े या अन्य सुहाग सामग्री किसी जरूरतमंद महिला को दे सकती हैं।
मान्यता है कि ऐसा करने से माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। दान करते समय दिखावे के बजाय श्रद्धा और जरूरतमंद की मदद की भावना को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है।
तीज की कथा जरूर पढ़ें या सुनें
हरियाली तीज की पूजा में व्रत कथा सुनने या पढ़ने की परंपरा है। पूजा के बाद महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी तीज कथा का पाठ करती हैं या परिवार के सदस्यों के साथ कथा सुनती हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, कथा सुनना व्रत की पूजा-पद्धति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इससे पर्व के धार्मिक महत्व और शिव-पार्वती के दांपत्य जीवन से जुड़ी मान्यताओं को समझने का अवसर भी मिलता है।
पूजा के दौरान मन को शांत रखें
व्रत और पूजा के दौरान मन को शांत रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा को केवल एक औपचारिकता की तरह पूरा करने के बजाय श्रद्धा और एकाग्रता के साथ पूजा करने की कोशिश करें।
अगर संभव हो तो पूजा के समय मोबाइल फोन या दूसरी गतिविधियों से दूरी बनाकर कुछ समय भगवान शिव और माता पार्वती के ध्यान में बिताया जा सकता है। इससे पूजा के दौरान मन को एकाग्र रखने में मदद मिल सकती है।
हरियाली तीज पर क्या नहीं करना चाहिए?
बेवजह गुस्सा और विवाद से बचें
हरियाली तीज को परिवार और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना से जुड़ा पर्व माना जाता है। ऐसे में इस दिन घर में अनावश्यक विवाद, गुस्सा या कटु व्यवहार करने से बचने की सलाह दी जाती है।
परिवार के सदस्यों के साथ प्रेम और सम्मान से व्यवहार करें। किसी से मतभेद होने पर भी बात को बढ़ाने के बजाय शांत रहने की कोशिश करना बेहतर है। धार्मिक दृष्टि से भी संयम और सकारात्मक व्यवहार को महत्व दिया जाता है।
किसी का अपमान न करें
हरियाली तीज के दिन किसी महिला, बुजुर्ग या परिवार के किसी सदस्य का अपमान करने से बचना चाहिए। माता पार्वती को शक्ति और नारी सम्मान से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए इस दिन महिलाओं और बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना रखने की परंपरा है।
किसी को अपशब्द कहना, जानबूझकर किसी का मन दुखाना या जरूरतमंद व्यक्ति की मदद से मुंह मोड़ना इस पर्व की भावना के अनुरूप नहीं माना जाता।
पूजा में जल्दबाजी न करें
कई बार लोग व्रत रखने के कारण कमजोरी महसूस कर सकते हैं और पूजा जल्दी खत्म करने की कोशिश करते हैं। ऐसा करने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार आराम से पूजा करें। पूजा की सामग्री पहले से तैयार रखने से भी जल्दबाजी से बचा जा सकता है।
अगर किसी को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो रही है, तो केवल धार्मिक मान्यता के कारण अपनी सेहत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
काले या सफेद कपड़ों को लेकर अपनी परंपरा का ध्यान रखें
कई पारंपरिक मान्यताओं में हरियाली तीज के दिन हरे और सुहाग से जुड़े रंगों को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि कुछ परिवारों में काले या सफेद कपड़ों को पहनने से बचने की परंपरा होती है।
हालांकि, इसे सार्वभौमिक धार्मिक नियम नहीं माना जाना चाहिए। अलग-अलग समुदायों और परिवारों की परंपराएं अलग हो सकती हैं। इसलिए अपने परिवार की मान्यता के अनुसार कपड़ों का चयन करना बेहतर है।
व्रत में शरीर की क्षमता का ध्यान रखें
हरियाली तीज के दौरान कई महिलाएं निर्जला व्रत भी रखती हैं। लेकिन हर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों या किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए लंबे समय तक बिना भोजन या पानी के रहना उचित नहीं हो सकता।
अगर किसी को पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्या है या डॉक्टर ने उपवास से बचने की सलाह दी है, तो व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।
दिनभर नकारात्मक गतिविधियों से बचें
हरियाली तीज को पूजा, भक्ति और उत्साह का पर्व माना जाता है। इसलिए इस दिन नकारात्मक बातचीत, अनावश्यक तनाव और विवाद से दूरी बनाकर परिवार के साथ सकारात्मक समय बिताने की कोशिश करें।
महिलाएं भजन-कीर्तन कर सकती हैं, तीज के पारंपरिक गीत गा सकती हैं और परिवार के साथ पर्व मना सकती हैं। कई जगहों पर तीज के अवसर पर झूले लगाने और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित करने की भी परंपरा है।
व्रत खोलते समय भी रखें ध्यान
हरियाली तीज का व्रत समाप्त करने के बाद अचानक बहुत ज्यादा या भारी भोजन करने से बचना चाहिए। लंबे समय तक व्रत रखने के बाद हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लेना बेहतर रहता है। पानी भी धीरे-धीरे पर्याप्त मात्रा में पीना चाहिए।
यह बात खास तौर पर उन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है जो पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। अगर व्रत के दौरान चक्कर, अत्यधिक कमजोरी, बेहोशी या दूसरी परेशानी महसूस हो तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए जरूरी कदम उठाना चाहिए।
हरियाली तीज का असली संदेश क्या है?
हरियाली तीज केवल व्रत और श्रृंगार का पर्व नहीं है, बल्कि यह भगवान शिव और माता पार्वती के दांपत्य जीवन से जुड़ी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा है। इस दिन महिलाएं अपने परिवार और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना करती हैं।
इस पर्व में मेहंदी, चूड़ी, हरे कपड़े, झूले और तीज के गीतों के माध्यम से भारतीय लोक संस्कृति की खूबसूरती भी देखने को मिलती है। इसलिए हरियाली तीज मनाते समय धार्मिक आस्था के साथ अपनी सेहत, परिवार की खुशी और दूसरों के प्रति सम्मान का भी ध्यान रखना चाहिए।
ध्यान दें: हरियाली तीज से जुड़ी पूजा-विधि, व्रत के नियम और शुभ-अशुभ मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती हैं। यहां दी गई बातें प्रचलित धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित हैं। व्रत रखने वाले लोगों को अपनी स्वास्थ्य स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।


