Iran Rare Earths: महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर चीन और अमेरिका के बीच चल रही वैश्विक प्रतिस्पर्धा अब एक नए मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। रेयर अर्थ एलिमेंट्स की माइनिंग, प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन में चीन का लंबे समय से दबदबा रहा है। अब बीजिंग इस रणनीतिक क्षेत्र में ईरान के साथ वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत चीन अपने वैज्ञानिकों को ईरान भेजकर रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज और एक्सप्लोरेशन में सहयोग करेगा।
यह कदम सिर्फ वैज्ञानिक सहयोग तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसके व्यापक असर वैश्विक सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और अमेरिका-चीन के बीच बढ़ती जियोपॉलिटिकल प्रतिस्पर्धा पर भी पड़ सकते हैं।
चीन और ईरान की क्या है योजना?
सहयोगी वेबसाइट ‘फर्स्टपोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल नेचुरल साइंस फाउंडेशन ऑफ चाइना (NSFC) ने ईरान नेशनल साइंस फाउंडेशन (INSF) के साथ अपने ज्वाइंट वर्कशॉप प्रोग्राम में रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज और एक्सप्लोरेशन को शामिल किया है।
इस कार्यक्रम के तहत चीन हर वर्कशॉप के लिए 30,000 युआन यानी करीब 4,200 डॉलर की फंडिंग करेगा। यह राशि बैठकों, आवास और घरेलू यात्रा जैसे खर्चों को कवर करने के लिए होगी। वहीं, ईरान में आने वाले चीनी शोधकर्ताओं के ठहरने और ईरानी प्रतिभागियों की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का खर्च ईरान उठाएगा।
इससे साफ है कि दोनों देश रेयर अर्थ सहित रणनीतिक तकनीकी क्षेत्रों में अपने वैज्ञानिक सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
सिर्फ रेयर अर्थ नहीं, इन क्षेत्रों में भी होगा सहयोग
चीन-ईरान के संयुक्त वर्कशॉप कार्यक्रम में कुल पांच प्रमुख क्षेत्र शामिल किए गए हैं। इनमें रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज और एक्सप्लोरेशन के अलावा बीमारी की पहचान के लिए नैनोमैटेरियल्स, प्रदूषण की निगरानी, भूकंपरोधी निर्माण और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
इसके अलावा 4 जुलाई को दोनों देशों ने एक विस्तृत रिसर्च सेल की शुरुआत भी की थी। इसके तहत 15 संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को सहायता देने की योजना है। इन परियोजनाओं के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 23 अगस्त है। अंतिम चयन दिसंबर के उत्तरार्ध में किया जाना है और स्वीकृत परियोजनाओं पर जनवरी 2027 से काम शुरू होने की उम्मीद है।
इन परियोजनाओं में जल और ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा, हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी, सूखा एवं जलवायु परिवर्तन के बीच जल प्रबंधन, कृषि और मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी जैसे विषय शामिल हैं।
करीब एक दशक पुराना है चीन-ईरान वैज्ञानिक सहयोग
चीन और ईरान के बीच वैज्ञानिक सहयोग कोई नया घटनाक्रम नहीं है। दोनों देशों की विज्ञान एजेंसियों ने 2017 में बीजिंग में एक समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर किए थे।
इसके बाद दोनों देशों ने मेडिकल साइंस, रिन्यूएबल एनर्जी, मटेरियल साइंस, क्लाइमेट चेंज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम किया है।
2024 में दोनों देशों ने संयुक्त वर्कशॉप कार्यक्रम भी शुरू किया था। शुरुआत में इसमें क्लाइमेट चेंज, AI, एडवांस्ड मटेरियल और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्र शामिल थे। अब रेयर अर्थ को इसमें जोड़ना इस साझेदारी को रणनीतिक महत्व वाले क्षेत्र तक ले जाता है।
रेयर अर्थ चीन और अमेरिका के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों?
रेयर अर्थ एलिमेंट्स 17 धातु तत्वों का एक समूह है, जिनका इस्तेमाल आधुनिक टेक्नोलॉजी और औद्योगिक उत्पादन में किया जाता है। इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटर, विंड टर्बाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैग्नेट, डिफेंस सिस्टम और कई हाई-टेक उपकरणों में इनका इस्तेमाल होता है।
इन खनिजों का महत्व सिर्फ इनके भंडार में नहीं बल्कि इन्हें अलग करने, शुद्ध करने और प्रोसेस करने की क्षमता में भी है। चीन लंबे समय से रेयर अर्थ की वैश्विक सप्लाई चेन के महत्वपूर्ण हिस्से पर मजबूत पकड़ रखता है।
यही वजह है कि रेयर अर्थ अब अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापार एवं तकनीकी संघर्ष में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक मुद्दा बन चुका है।
अमेरिका की रणनीति को कैसे चुनौती मिल सकती है?
अमेरिका अपनी घरेलू क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन को मजबूत करने और चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए अमेरिका ने घरेलू माइनिंग, प्रोसेसिंग और बैटरी से जुड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया है।
दूसरी तरफ चीन भी अपनी सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में ईरान के साथ रेयर अर्थ एक्सप्लोरेशन में सहयोग को इसी व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है।
ईरान के पास प्राकृतिक संसाधनों की बड़ी संभावनाएं हैं, लेकिन किसी देश के पास संभावित भंडार होना और उसे व्यावसायिक स्तर पर रेयर अर्थ उत्पादक बना पाना दो अलग बातें हैं।
ईरान को क्या फायदा होगा?
चीन के वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञता से ईरान को अपने संभावित रेयर अर्थ संसाधनों का बेहतर आकलन करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा उसे खनिजों की पहचान, एक्सप्लोरेशन और भविष्य में प्रोसेसिंग क्षमता विकसित करने से जुड़ी तकनीकी जानकारी भी मिल सकती है।
हालांकि, ईरान को बड़ा रेयर अर्थ उत्पादक बनने में अभी लंबा समय लग सकता है। इसके लिए व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य भंडार की पहचान, खनन परियोजनाओं का विकास, प्रोसेसिंग प्लांट और पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी।
इसलिए फिलहाल इसे ईरान के तत्काल रेयर अर्थ उत्पादन में बड़े उछाल के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी।
दुनिया के लिए क्या हैं इसके मायने?
इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा महत्व चीन की उस रणनीति में दिखाई देता है, जिसमें वह महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक सप्लाई चेन में अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है।
अगर भविष्य में ईरान में बड़े और आर्थिक रूप से व्यवहार्य रेयर अर्थ भंडार की पुष्टि होती है और वहां खनन एवं प्रोसेसिंग क्षमता विकसित होती है, तो वैश्विक सप्लाई चेन में एक नया स्रोत जुड़ सकता है।
इसके अलावा चीन और ईरान के बीच इस तरह का तकनीकी सहयोग अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता को केवल व्यापार और टैरिफ तक सीमित नहीं रहने देता। यह दिखाता है कि दोनों पक्ष महत्वपूर्ण खनिजों, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन के स्तर पर भी अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
आगे क्या देखना होगा?
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि ईरान में एक्सप्लोरेशन के दौरान वास्तव में कितने रेयर अर्थ संसाधनों की पहचान होती है और उनमें से कितने आर्थिक रूप से निकालने योग्य साबित होते हैं।
यदि बड़े भंडार मिलते हैं और चीन की तकनीकी मदद से ईरान में प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होता है, तो आने वाले वर्षों में यह वैश्विक रेयर अर्थ बाजार के लिए महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है।
फिलहाल चीन का यह कदम एक शुरुआती वैज्ञानिक और रणनीतिक पहल है, लेकिन अमेरिका-चीन तनाव और क्रिटिकल मिनरल्स की बढ़ती अहमियत को देखते हुए इसका जियोपॉलिटिकल महत्व काफी बड़ा है।


