Sheikh Rasheed Hafiz Saeed Statement: पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री शेख रशीद अहमद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह खुद को हाफिज सईद का ‘गुलाम’ बताते नजर आ रहे हैं। वीडियो में भारत के खिलाफ भी बेहद भड़काऊ बयान दिए गए हैं।
Sheikh Rasheed on Hafiz Saeed: पाकिस्तान की राजनीति में अपने तीखे और विवादित बयानों के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व गृह मंत्री शेख रशीद अहमद एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के प्रमुख हाफिज सईद की तारीफ करते और खुद को उसका ‘गुलाम’ बताते नजर आ रहे हैं।
वायरल वीडियो में शेख रशीद को ऐसे मंच पर देखा जा सकता है, जहां लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े लोगों की मौजूदगी बताई जा रही है। कार्यक्रम में दिए गए उनके भाषण के अंशों में भारत के खिलाफ भी धमकी भरे और बेहद आपत्तिजनक बयान सुनाई दे रहे हैं। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पूरी पृष्ठभूमि और रिकॉर्डिंग की तारीख की पुष्टि अलग से जरूरी है।
शेख रशीद का यह बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह कोई आम राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं हैं। वह पाकिस्तान के पूर्व संघीय गृह मंत्री रह चुके हैं और इमरान खान की सरकार में दिसंबर 2020 से अप्रैल 2022 तक देश के गृह मंत्री का पद संभाल चुके हैं।
आतंकियों के साथ मंच साझा कर बोले- ‘मैं हाफिज सईद का गुलाम हूं’
🚨 EXPOSED: “I AM A FOLLOWER OF HAFIZ SAEED SAAB”: PTI LEADER SHEIKH RASHEED’S SHOCKING ADMISSION
Former Pakistani minister and Imran Khan ally Sheikh Rasheed openly declared himself a “follower and servant” of Hafiz Saeed.
He claimed he was kicked out of the US because Hafiz… pic.twitter.com/OJEilhAPoR
— OsintTV 📺 (@OsintTV) August 12, 2026 सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में शेख रशीद कथित तौर पर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कमांडरों के साथ मंच साझा करते दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान वह हाफिज सईद के प्रति अपने समर्थन का खुलकर इजहार करते हैं।
वीडियो में शेख रशीद का कथित बयान है कि वह ‘हाफिज साहब का गुलाम’ हैं और हाफिज सईद के साथ खड़े हैं। उनके भाषण में हाफिज सईद से जुड़ा एक पुराना किस्सा भी सुनाया जाता है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में रहने के दौरान उनके फोन पर हाफिज सईद का नंबर आया था और इसके बाद उन्हें अमेरिका से निर्वासित कर दिया गया।
ऐसे बयान को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि पाकिस्तान की राजनीति में लंबे समय तक महत्वपूर्ण पद संभाल चुके नेता सार्वजनिक मंच से एक ऐसे व्यक्ति के प्रति इस तरह का समर्थन क्यों जाहिर कर रहे हैं, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद से जोड़ा गया है।
कौन है शेख रशीद अहमद?
शेख रशीद अहमद पाकिस्तान के वरिष्ठ राजनेता हैं और Awami Muslim League (AML) के प्रमुख हैं। उनका राजनीतिक करियर कई दशकों में फैला हुआ है। उन्होंने पाकिस्तान की अलग-अलग सरकारों में कई संघीय मंत्रालय संभाले हैं।
इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें पहले रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली थी। दिसंबर 2020 में कैबिनेट में फेरबदल के बाद उन्हें गृह मंत्री बनाया गया। पाकिस्तान के गृह मंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल अप्रैल 2022 में इमरान खान सरकार के सत्ता से बाहर होने तक रहा।
गृह मंत्री का पद पाकिस्तान में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि आंतरिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और आतंकवाद से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दे इसी मंत्रालय के दायरे में आते हैं। ऐसे में किसी पूर्व गृह मंत्री का किसी प्रतिबंधित आतंकी संगठन से जुड़े व्यक्ति के समर्थन में सार्वजनिक बयान देना स्वाभाविक रूप से गंभीर सवाल खड़े करता है।
हाफिज सईद कौन है?
हाफिज मुहम्मद सईद पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक नेताओं में शामिल रहा है। भारत में 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के मामले में उसका नाम लंबे समय से सामने आता रहा है। संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद संबंधी सूची में भी हाफिज सईद का नाम दर्ज है।
26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमलों में 166 लोगों की मौत हुई थी। लश्कर-ए-तैयबा को इन हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। हाफिज सईद को इस हमले की साजिश से जोड़कर भारत और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने लंबे समय से कार्रवाई की मांग की है।
पाकिस्तान में हाफिज सईद को आतंकवाद से जुड़े मामलों में सजा भी सुनाई जा चुकी है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच उसे आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया था।
भारत के खिलाफ फिर उगला जहर
वायरल वीडियो में शेख रशीद केवल हाफिज सईद की तारीफ तक सीमित नहीं रहते। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने भारत को लेकर भी बेहद भड़काऊ बयान दिया।
उन्होंने धमकी भरे अंदाज में कहा कि अगर भारत ने पाकिस्तान की तरफ आंख उठाकर भी देखा तो भारत तबाह हो जाएगा। इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि भारत में न मंदिरों में घंटियां बजेंगी और न ही कोई परिंदा चहकेगा।
इस तरह की बयानबाजी भारत-पाकिस्तान के बीच पहले से तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए और गंभीर हो जाती है। खासकर तब, जब दोनों देशों के बीच आतंकवाद और सीमा पार हिंसा लंबे समय से सबसे बड़े विवादों में शामिल रहे हैं।
हालिया रिपोर्टों में शेख रशीद के बयान को भारत विरोधी राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ पाकिस्तान में आतंकी नेटवर्क और राजनीति के बीच संबंधों को लेकर भी चर्चा का विषय बनाया गया है।
क्या शेख रशीद का आतंकियों से यह पहला विवादित जुड़ाव है?
शेख रशीद पाकिस्तान की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं और अपने बेबाक तथा आक्रामक बयानों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कई बार भारत, कश्मीर और पाकिस्तान की सुरक्षा नीति से जुड़े मुद्दों पर तीखे बयान दिए हैं।
हालांकि, वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले किसी कार्यक्रम या मंच की मौजूदगी को लेकर दावे करते समय सावधानी जरूरी है। सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो को नए संदर्भ के साथ भी साझा किया जा सकता है। इसलिए वीडियो की तारीख, मूल स्रोत और पूरा संदर्भ देखना जरूरी है।
फिर भी, अगर वीडियो में दिए गए बयान उसी संदर्भ में हैं जैसा कि वायरल क्लिप में दावा किया जा रहा है, तो एक पूर्व गृह मंत्री द्वारा हाफिज सईद के प्रति इस तरह का सार्वजनिक समर्थन गंभीर राजनीतिक और सुरक्षा सवाल खड़े करता है।
भारत-पाकिस्तान संबंधों में क्यों बढ़ा तनाव?
शेख रशीद का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब भारत और पाकिस्तान के संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं। इसकी बड़ी वजह अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला था।
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकियों ने पर्यटकों को निशाना बनाया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकी ढांचे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का फैसला लिया।
भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी ढांचे से जुड़े नौ ठिकानों को निशाना बनाया। भारत सरकार ने इसे लक्षित और सीमित सैन्य कार्रवाई बताया था।
इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ा और कई दिनों तक संघर्ष की स्थिति बनी रही। बाद में सैन्य स्तर पर तनाव कम करने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन आतंकवाद का मुद्दा भारत-पाकिस्तान संबंधों के केंद्र में बना हुआ है।
हाफिज सईद का नाम फिर चर्चा में क्यों?
हाफिज सईद का नाम केवल 26/11 मुंबई हमलों तक सीमित नहीं है। लश्कर-ए-तैयबा भारत के खिलाफ कई आतंकी गतिविधियों से जुड़ा रहा है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन माना जाता है।
जुलाई 2026 में भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पहलगाम आतंकी हमले से जुड़े मामले में हाफिज सईद को भी आरोपी के तौर पर नामित किया था। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर उसके नाम और लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क को चर्चा में ला दिया।
ऐसे में शेख रशीद का कथित तौर पर हाफिज सईद के प्रति सार्वजनिक समर्थन जताना इस पूरे मामले को और संवेदनशील बना देता है।
पाकिस्तान की राजनीति और आतंकवाद पर फिर उठे सवाल
पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच यह दावा करता रहा है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। लेकिन जब वहां के राजनीतिक नेता प्रतिबंधित आतंकी संगठनों या उनके नेताओं के प्रति सहानुभूति या समर्थन जताते दिखाई देते हैं, तो पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी नीति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यहां यह फर्क समझना भी जरूरी है कि किसी एक राजनेता के बयान को पूरे पाकिस्तान की जनता या पूरे राजनीतिक तंत्र की राय नहीं माना जा सकता। लेकिन किसी पूर्व गृह मंत्री के स्तर के नेता की सार्वजनिक बयानबाजी निश्चित रूप से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होती है।
भारत के लिए भी ऐसे बयानों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि सीमा पार आतंकवाद और आतंकी ढांचे के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच पहले से गहरा अविश्वास मौजूद है।
निष्कर्ष
शेख रशीद अहमद का वायरल वीडियो एक बार फिर पाकिस्तान की राजनीति में भारत विरोधी बयानबाजी और आतंकवाद से जुड़े संगठनों के प्रति कथित समर्थन को लेकर बहस तेज कर रहा है। एक तरफ वह हाफिज सईद को अपना ‘आका’ मानने जैसा बयान देते नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत के खिलाफ बेहद भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल किए जाने का दावा है।
शेख रशीद खुद पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री हैं और इमरान खान सरकार में देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
ऐसे में उनके बयान को महज सोशल मीडिया की एक क्लिप मानकर नजरअंदाज करना आसान नहीं है। हालांकि, वायरल वीडियो की तारीख और पूरा संदर्भ स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाना जरूरी है। इतना जरूर है कि भारत-पाकिस्तान संबंधों में आतंकवाद का मुद्दा अभी भी सबसे संवेदनशील विषयों में से एक बना हुआ है और इस तरह की बयानबाजी तनाव को कम करने के बजाय और बढ़ाने का काम करती है।


