टाटा समूह ने टाटा संस के नए चेयरमैन की तलाश की प्रक्रिया शुरू कर दी है। Sir Dorabji Tata Trust के ट्रस्टीज ने 13 अगस्त को एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें नए चेयरमैन के चयन के लिए जल्द से जल्द सेलेक्शन कमेटी बनाने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है। यह कमेटी उस उम्मीदवार के नाम की सिफारिश करेगी, जिसे टाटा संस के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का नया चेयरमैन नियुक्त किया जाएगा।
यह घटनाक्रम एन चंद्रशेखरन के टाटा संस के चेयरमैन पद से हटने के फैसले के एक दिन बाद सामने आया है। चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को अपने पद से इस्तीफे का ऐलान किया था। हालांकि, वह 20 फरवरी 2027 तक टाटा संस के चेयरमैन बने रहेंगे। ऐसे में समूह के पास नए नेतृत्व का चयन करने के लिए कुछ समय है, लेकिन चेयरमैन पद के लिए सही उम्मीदवार चुनना टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के लिए बेहद अहम फैसला होगा।
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने पारित किया प्रस्ताव
Sir Dorabji Tata Trust के ट्रस्टीज ने 13 अगस्त को नए चेयरमैन के चयन की दिशा में अहम कदम उठाया। ट्रस्ट की ओर से पारित प्रस्ताव में जल्द से जल्द एक सेलेक्शन कमेटी गठित करने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है।
यही कमेटी उस व्यक्ति के नाम की सिफारिश करेगी, जिसे आगे चलकर टाटा संस के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का चेयरमैन नियुक्त किया जा सके। ट्रस्ट ने यह भी कहा है कि नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए टाटा संस को पूरा सहयोग दिया जाएगा।
टाटा संस टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है। इसलिए इसके चेयरमैन का फैसला केवल एक कंपनी के नेतृत्व से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि पूरे टाटा समूह की भविष्य की रणनीति और दिशा पर इसका असर पड़ सकता है।
चंद्रशेखरन ने करीब 9 साल तक संभाली कमान
एन चंद्रशेखरन फरवरी 2017 में टाटा संस के चेयरमैन बने थे। करीब नौ साल के कार्यकाल में उन्होंने टाटा समूह के कारोबार को कई नए क्षेत्रों में विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में एयर इंडिया का अधिग्रहण शामिल रहा। टाटा समूह ने सरकार से एयर इंडिया का अधिग्रहण कर इसे दोबारा अपने एविएशन कारोबार का हिस्सा बनाया। इसके अलावा समूह ने सेमीकंडक्टर, बैटरी और डिजिटल बिजनेस जैसे नए क्षेत्रों में भी बड़े निवेश और विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाए।
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने कई रणनीतिक फैसले लिए, जिनका असर आने वाले वर्षों में समूह के कारोबार पर दिखाई दे सकता है। अब नए चेयरमैन की जिम्मेदारी इन योजनाओं को आगे बढ़ाने और मौजूदा कारोबार को मजबूत करने की होगी।
टाटा समूह के लिए बीता एक साल रहा चुनौतीपूर्ण
पिछला एक साल टाटा समूह के लिए कई मोर्चों पर चुनौतीपूर्ण रहा है। अहमदाबाद में एयर इंडिया के एक बड़े विमान हादसे के बाद एयर इंडिया को व्यापक रेगुलेटरी जांच और सुरक्षा से जुड़े सवालों का सामना करना पड़ा।
दूसरी ओर, समूह की प्रमुख आईटी कंपनी TCS को प्राइसिंग प्रेशर और आईटी सेक्टर में बदलते कारोबारी माहौल जैसी चुनौतियों से जूझना पड़ा। इसके अलावा Jaguar Land Rover यानी JLR के उत्पादन पर साइबर हमले का भी असर पड़ा।
इन घटनाक्रमों के बीच नए चेयरमैन के सामने केवल विस्तार की रणनीति बनाने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि समूह की अलग-अलग कंपनियों में ऑपरेशनल मजबूती, जोखिम प्रबंधन और बेहतर एग्जिक्यूशन सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा।
फरवरी में तीसरी बार चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर नहीं बन पाई सहमति
एन चंद्रशेखरन को टाटा संस के चेयरमैन पद पर तीसरी बार नियुक्त किए जाने को लेकर इस साल फरवरी में चर्चा होनी थी। हालांकि, इस प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो सका।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के विरोध के कारण इस प्रस्ताव पर आगे विचार नहीं हो पाया। नोएल टाटा, रतन टाटा के सौतेले भाई हैं और टाटा ट्रस्ट्स में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
इसके बाद चेयरमैन पद को लेकर अनिश्चितता बनी रही। आखिरकार 12 अगस्त को चंद्रशेखरन ने खुद अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया और टाटा संस के बोर्ड से अपने उत्तराधिकारी की तलाश शुरू करने को कहा।
12 अगस्त को चंद्रशेखरन ने इस्तीफे का ऐलान किया
तीसरी बार चेयरमैन बनाए जाने को लेकर फैसला लंबित रहने के बीच एन चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त की सुबह अपने इस्तीफे की घोषणा की। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वह तीसरे कार्यकाल के लिए टाटा संस के चेयरमैन पद पर नियुक्त नहीं होना चाहते।
हालांकि, उनके इस्तीफे का मतलब तत्काल पद छोड़ना नहीं है। वह 20 फरवरी 2027 तक चेयरमैन के पद पर बने रहेंगे। इससे टाटा समूह को उत्तराधिकारी चुनने और नेतृत्व परिवर्तन को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने का समय मिलेगा।
अब सेलेक्शन कमेटी के गठन के बाद नए चेयरमैन के लिए संभावित नामों पर विचार किया जाएगा। टाटा समूह जैसे बड़े और विविध कारोबारी समूह के लिए यह चयन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नए चेयरमैन के सामने होंगी ये बड़ी चुनौतियां
नए चेयरमैन के सामने सबसे बड़ी चुनौती टाटा समूह की मौजूदा विस्तार योजनाओं को सफलतापूर्वक जमीन पर उतारना होगी। पिछले कुछ वर्षों में समूह ने कई नए क्षेत्रों में प्रवेश किया है। अब इन निवेशों से टिकाऊ ग्रोथ और बेहतर रिटर्न हासिल करना प्राथमिकता होगी।
Air India को मुनाफे में लाना
एयर इंडिया नए चेयरमैन के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में शामिल होगी। टाटा समूह ने एयर इंडिया और विस्तारा के विलय के बाद एविएशन बिजनेस को एक बड़े प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया है।
अब चुनौती इस कारोबार को मजबूत करने, परिचालन क्षमता बढ़ाने और लंबे समय में इसे मुनाफे में लाने की होगी। विमान हादसे के बाद सुरक्षा और रेगुलेटरी अनुपालन भी इस कारोबार के लिए बेहद अहम रहेगा।
सेमीकंडक्टर और नए कारोबार पर फोकस
टाटा समूह ने सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग जैसे रणनीतिक क्षेत्र में भी कदम रखा है। इस क्षेत्र में बड़े निवेश और लंबे समय के एग्जिक्यूशन की जरूरत है।
नए चेयरमैन को यह सुनिश्चित करना होगा कि इन परियोजनाओं में निवेश सही दिशा में हो और समय के साथ इनसे समूह के लिए मजबूत कारोबारी अवसर पैदा हों। बैटरी और डिजिटल बिजनेस भी भविष्य की ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
TCS और दूसरी बड़ी कंपनियों की ग्रोथ
TCS, Tata Motors, Titan, Tata Power और Tata Consumer जैसी कंपनियां टाटा समूह के कारोबार की रीढ़ हैं। इन कंपनियों का प्रदर्शन पूरे समूह की ग्रोथ और निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डालता है।
इसलिए नए चेयरमैन के सामने एक बड़ी जिम्मेदारी इन कंपनियों की अलग-अलग कारोबारी चुनौतियों के बीच ग्रोथ की गति बनाए रखने की होगी।
लाखों रिटेल निवेशकों की भी नजर
टाटा समूह की कई लिस्टेड कंपनियों में बड़ी संख्या में रिटेल निवेशकों का पैसा लगा है। TCS, Tata Steel, Titan, Tata Motors, Tata Consumer और Tata Power जैसी कंपनियां भारतीय शेयर बाजार में प्रमुख नाम हैं।
ऐसे में टाटा संस के चेयरमैन में बदलाव का असर केवल समूह के अंदर तक सीमित नहीं रहेगा। निवेशक नए चेयरमैन की रणनीति, समूह के कैपिटल एलोकेशन, नए निवेश और मौजूदा कंपनियों की ग्रोथ पर भी नजर रखेंगे।
12 अगस्त को चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद टाटा समूह की कई कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला था। खासकर TCS के शेयर में तेज गिरावट दर्ज की गई थी। इससे पता चलता है कि बाजार में टाटा समूह के नेतृत्व से जुड़ी खबरों को कितनी गंभीरता से लिया जाता है।
13 अगस्त को कई शेयरों में दिखी रिकवरी
चंद्रशेखरन के इस्तीफे के बाद 13 अगस्त को टाटा समूह की कई कंपनियों के शेयरों में शुरुआती दबाव के बाद रिकवरी देखने को मिली। दोपहर करीब 1 बजे TCS का शेयर 0.52 फीसदी की तेजी के साथ 2,362 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था।
वहीं Titan के शेयर में करीब 1.45 फीसदी की गिरावट थी और यह लगभग 5,024 रुपये पर कारोबार कर रहा था। Tata Steel करीब 1.30 फीसदी गिरकर 183 रुपये के आसपास था।
Tata Motors PV के शेयर में करीब 1.69 फीसदी की तेजी रही और यह 348.80 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था। Tata Motors CV में लगभग 3.3 फीसदी की तेजी देखी गई और शेयर 472 रुपये के करीब था। Tata Consumer का शेयर भी करीब 1.86 फीसदी चढ़कर 1,081 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था।
हालांकि, शेयर बाजार में किसी एक दिन की चाल को कंपनी के लंबे समय के प्रदर्शन का संकेत नहीं माना जा सकता। आने वाले महीनों में निवेशकों की नजर नए चेयरमैन के चयन और टाटा समूह की रणनीति पर रहेगी।
अब सबसे बड़ा सवाल—कौन होगा टाटा संस का अगला चेयरमैन?
टाटा संस के अगले चेयरमैन का चयन समूह के लिए एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन होगा। चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा समूह ने एयर इंडिया, सेमीकंडक्टर, बैटरी और डिजिटल कारोबार जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया। अब नए चेयरमैन के सामने इन पहलों को सफल बनाने के साथ-साथ TCS, Tata Motors, Titan, Tata Power और Tata Consumer जैसे स्थापित कारोबारों की ग्रोथ बनाए रखने की चुनौती होगी।
सेलेक्शन कमेटी के गठन के बाद संभावित उम्मीदवारों को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो सकती है। नया चेयरमैन कितना प्रभावी ढंग से समूह की मौजूदा योजनाओं को आगे बढ़ाता है और नए अवसरों को पहचानता है, यह आने वाले वर्षों में टाटा समूह की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।


