Rocky Flintoff Century: इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और दिग्गज ऑलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉफ के बेटे रॉकी फ्लिंटॉफ ने घरेलू क्रिकेट में अपनी शानदार बल्लेबाजी से एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। महज 18 साल की उम्र में रॉकी ने वन-डे कप 2026 में समरसेट के खिलाफ तूफानी शतक जड़कर अपनी प्रतिभा का शानदार परिचय दिया। उन्होंने सिर्फ 65 गेंदों में अपना शतक पूरा किया और इसके बाद भी आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखते हुए 123 रन की बेहतरीन पारी खेली।
यह मुकाबला टॉन्टन के द कूपर एसोसिएट्स काउंटी ग्राउंड में खेला गया, जहां लंकाशायर ने पहले बल्लेबाजी करते हुए विशाल स्कोर खड़ा किया। रॉकी फ्लिंटॉफ ने कीटन जेनिंग्स के साथ मिलकर लंकाशायर की पारी को मजबूती दी। दोनों बल्लेबाजों के बीच चौथे विकेट के लिए हुई बड़ी साझेदारी ने टीम को 50 ओवर में 443/6 के विशाल स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
65 गेंदों में पूरा किया शतक
"Look at that celebration, it means a lot to him!" 🥳
An unforgettable moment for Flintoff! 🤩
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— Lancashire Cricket (@lancscricket) August 11, 2026 रॉकी फ्लिंटॉफ ने लंकाशायर की ओर से नंबर-5 पर बल्लेबाजी करने के लिए मैदान में कदम रखा। शुरुआत में उन्होंने पारी को संभालने की कोशिश की, लेकिन इसके बाद उनके बल्ले ने ऐसा रुख अपनाया कि समरसेट के गेंदबाजों पर दबाव बढ़ता चला गया।
रॉकी ने बेहद आक्रामक अंदाज में रन बनाए और महज 65 गेंदों में अपना शतक पूरा कर लिया। उन्होंने 45वें ओवर की पहली गेंद पर एक रन लेकर तीन अंकों का आंकड़ा छुआ। शतक पूरा करने के बाद भी उन्होंने अपने आक्रामक तेवर कम नहीं किए और तेजी से रन बनाते रहे।
आखिरकार रॉकी फ्लिंटॉफ 76 गेंदों में 123 रन बनाकर आउट हुए। उनकी इस पारी में 10 चौके और 7 छक्के शामिल रहे। यानी उन्होंने अपनी पारी के दौरान बाउंड्री के जरिए ही बड़ी संख्या में रन जुटाए। उनकी बल्लेबाजी में पावर हिटिंग के साथ-साथ स्ट्राइक रोटेट करने की क्षमता भी देखने को मिली।
कीटन जेनिंग्स के साथ 214 रन की साझेदारी
लंकाशायर के लिए इस मुकाबले में रॉकी फ्लिंटॉफ और कीटन जेनिंग्स की साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण रही। दोनों ने चौथे विकेट के लिए सिर्फ 127 गेंदों में 214 रन जोड़ दिए।
कीटन जेनिंग्स ने भी शानदार बल्लेबाजी करते हुए 156 रन की बड़ी पारी खेली। जेनिंग्स की संयमित बल्लेबाजी और रॉकी की विस्फोटक पारी का बेहतरीन तालमेल देखने को मिला। एक छोर पर जेनिंग्स लगातार रन बनाते रहे, जबकि दूसरे छोर से रॉकी ने तेजी से गेंद को बाउंड्री के बाहर भेजकर रन रेट को बढ़ाए रखा।
इस साझेदारी ने लंकाशायर को बड़े स्कोर की ओर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। दोनों बल्लेबाजों के बीच हुई 214 रन की साझेदारी ने टीम के स्कोर को तेजी से आगे बढ़ाया और लंकाशायर ने निर्धारित 50 ओवर में 443/6 का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया।
लिस्ट ए क्रिकेट में रॉकी का पहला शतक
समरसेट के खिलाफ खेली गई यह पारी रॉकी फ्लिंटॉफ के करियर के लिहाज से भी खास है। यह लिस्ट ए क्रिकेट में उनका पहला शतक है। इससे पहले उन्होंने 14 लिस्ट ए मुकाबलों में लंकाशायर का प्रतिनिधित्व किया था।
इन 14 मैचों में रॉकी के नाम दो अर्धशतक के साथ कुल 350 रन दर्ज थे। अब उन्होंने अपने खाते में शानदार शतक भी जोड़ लिया है। जिस अंदाज में उन्होंने यह सेंचुरी लगाई है, उससे उनके भविष्य को लेकर उम्मीदें और बढ़ गई हैं।
रॉकी अभी केवल 18 साल के हैं और घरेलू क्रिकेट में लगातार अपने प्रदर्शन से खुद को साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। इतनी कम उम्र में लिस्ट ए क्रिकेट में शतक लगाना उनके लिए निश्चित तौर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी कर चुके हैं डेब्यू
रॉकी फ्लिंटॉफ सिर्फ लिस्ट ए क्रिकेट तक सीमित नहीं हैं। वह फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी अपनी शुरुआत कर चुके हैं। अब तक वह पांच फर्स्ट क्लास मैचों में नौ पारियां खेल चुके हैं, जिसमें उनके नाम कुल 137 रन हैं।
हालांकि फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका आंकड़ा अभी बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन उनकी उम्र को देखते हुए उनके पास खुद को विकसित करने के लिए काफी समय है। वन-डे क्रिकेट में लगातार मिल रहे अवसर उनके लिए अपनी बल्लेबाजी को मजबूत करने और बड़े स्तर पर पहचान बनाने का अच्छा मंच साबित हो सकते हैं।
पिछले मैच में भी खेली थी नाबाद 61 रन की पारी
समरसेट के खिलाफ शतक लगाने से पहले भी रॉकी फ्लिंटॉफ ने वन-डे कप में अपनी बल्लेबाजी का दम दिखाया था। वारविकशायर के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने लंकाशायर के लिए नंबर-5 पर बल्लेबाजी करते हुए 51 गेंदों में नाबाद 61 रन बनाए थे।
इस पारी के बाद अगले मुकाबले में उनके बल्ले से शतक निकलना बताता है कि रॉकी इस समय अच्छी लय में हैं। लगातार दो मैचों में प्रभावशाली पारियां खेलने के बाद उन्होंने लंकाशायर की टीम में अपनी उपयोगिता भी साबित की है।
उनकी बल्लेबाजी में सबसे खास बात उनका आक्रामक रवैया है। 18 साल की उम्र में जिस आत्मविश्वास के साथ वह गेंदबाजों पर हमला कर रहे हैं, वह उन्हें भविष्य का एक संभावित बड़ा खिलाड़ी बनाता है।
पिता एंड्रयू फ्लिंटॉफ की तरह क्रिकेट में बना रहे पहचान
रॉकी फ्लिंटॉफ के नाम के साथ सबसे बड़ी चर्चा उनके पिता एंड्रयू फ्लिंटॉफ की वजह से भी होती है। एंड्रयू फ्लिंटॉफ इंग्लैंड के सबसे चर्चित क्रिकेटरों में शामिल रहे हैं। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों से टीम को महत्वपूर्ण योगदान दिया।
एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने 1998 से 2009 के बीच इंग्लैंड के लिए 79 टेस्ट, 141 वनडे और 7 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले। वह इंग्लैंड की टीम के कप्तान भी रहे और 2005 की प्रतिष्ठित एशेज सीरीज में उनके प्रदर्शन को आज भी याद किया जाता है।
अब उनके बेटे रॉकी भी क्रिकेट के मैदान पर अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि किसी महान खिलाड़ी का बेटा होने के कारण उन पर अतिरिक्त उम्मीदों का दबाव होना स्वाभाविक है, लेकिन रॉकी अपने प्रदर्शन के दम पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने छोड़ा इंग्लैंड लायंस के कोच का पद
रॉकी की शानदार पारी के बीच उनके पिता एंड्रयू फ्लिंटॉफ भी क्रिकेट से जुड़े एक नए अध्याय की ओर बढ़ रहे हैं। फ्लिंटॉफ ने हाल ही में इंग्लैंड लायंस के मुख्य कोच का पद छोड़ दिया है।
अब वह बिग बैश लीग यानी BBL में अपनी नई जिम्मेदारी संभालने की तैयारी में हैं। उन्हें साल की शुरुआत में सिडनी थंडर का मुख्य कोच नियुक्त किया गया था। यह उनके कोचिंग करियर का एक अहम अगला कदम माना जा रहा है।
इस तरह पिता और बेटे दोनों ही इस समय क्रिकेट के अलग-अलग स्तरों पर अपनी भूमिका निभा रहे हैं। एक तरफ एंड्रयू फ्लिंटॉफ कोच के रूप में अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके बेटे रॉकी मैदान पर बल्ले से लगातार प्रभावित कर रहे हैं।
रॉकी फ्लिंटॉफ के लिए बड़ा मौका
समरसेट के खिलाफ 123 रन की पारी रॉकी फ्लिंटॉफ के युवा करियर की सबसे खास पारियों में से एक बन गई है। 65 गेंदों में शतक और कुल 76 गेंदों में 123 रन की पारी ने उनकी आक्रामक बल्लेबाजी क्षमता को सामने रखा है।
लिस्ट ए क्रिकेट में पहला शतक लगाने के बाद अब उनके सामने चुनौती इस प्रदर्शन को लगातार दोहराने की होगी। घरेलू क्रिकेट में निरंतर प्रदर्शन ही उन्हें आगे बढ़ने का मौका देगा। अगर रॉकी इसी तरह रन बनाते रहे और अपनी तकनीक पर काम करते रहे, तो आने वाले वर्षों में वह इंग्लैंड के क्रिकेट सिस्टम में एक महत्वपूर्ण नाम बन सकते हैं।
फिलहाल, 18 साल के रॉकी फ्लिंटॉफ ने अपनी इस तूफानी पारी से इतना जरूर बता दिया है कि वह केवल एंड्रयू फ्लिंटॉफ के बेटे के तौर पर नहीं, बल्कि अपने खेल के दम पर भी पहचान बनाने की राह पर हैं।


