Bengaluru Property Price: 34 साल की उम्र में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की नेट वर्थ हासिल करना निश्चित तौर पर बड़ी वित्तीय उपलब्धि है। लेकिन बेंगलुरु जैसे महंगे शहर में करोड़पति होना भी घर खरीदने की गारंटी नहीं देता। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक कहानी ने इसी सवाल को फिर चर्चा में ला दिया है कि आखिर अच्छी-खासी संपत्ति होने के बावजूद लोग अपना घर खरीदने से क्यों हिचकते हैं?
बेंगलुरु में रहने वाले 34 वर्षीय एक प्रोफेशनल की वित्तीय कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। करीब 12 साल की नौकरी के दौरान उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं, अलग-अलग तरह के लोन लिए और साथ ही नियमित रूप से निवेश भी जारी रखा। इस रणनीति की बदौलत उनकी कुल नेट वर्थ करीब 1.2 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
हालांकि, उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने के बावजूद बेंगलुरु में अपना घर खरीदना उनके लिए अभी भी आसान फैसला नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह शहर में लगातार बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतें और होम लोन की संभावित EMI है।
12 साल की नौकरी में ऐसे बनाई 1.2 करोड़ की संपत्ति
वायरल पोस्ट के मुताबिक, इस प्रोफेशनल ने अपनी कमाई को केवल बैंक खाते में रखने के बजाय अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश किया। उनकी संपत्ति कई जगहों पर फैली हुई है।
बताया गया है कि उनके पोर्टफोलियो में करीब 45 लाख रुपये म्यूचुअल फंड, लगभग 14 लाख रुपये अमेरिकी शेयर, करीब 35 लाख रुपये EPF, लगभग 8 लाख रुपये सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और करीब 15 लाख रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट में हैं।
इसके अलावा उनके पास मैसूर में एक प्रॉपर्टी भी है, जिसकी मौजूदा कीमत करीब 90 लाख रुपये बताई गई है। इस प्रॉपर्टी को खरीदने के लिए उन्होंने करीब 45 लाख रुपये का लोन लिया था, जिसे अब वह पूरी तरह चुका चुके हैं।
यानी वर्तमान में वह किसी बड़े कर्ज के बोझ में नहीं हैं और खुद को कर्ज-मुक्त स्थिति में रख पाए हैं।
नेट वर्थ 1 करोड़ से ज्यादा, फिर भी किराए के घर में रहना
सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इतनी संपत्ति होने के बावजूद यह प्रोफेशनल बेंगलुरु में अभी किराए के मकान में रहते हैं। इसके लिए वह हर महीने करीब 40 हजार रुपये किराया चुका रहे हैं।
यहीं से उनकी असली वित्तीय दुविधा शुरू होती है।
एक तरफ उनके पास अच्छी-खासी निवेश योग्य संपत्ति है और वह अपने निवेश को आगे बढ़ाकर अगले वित्तीय लक्ष्य तक पहुंचना चाहते हैं। दूसरी तरफ बेंगलुरु में खुद का घर खरीदने के लिए उन्हें बड़ी रकम खर्च करनी पड़ सकती है।
अगर वह महंगी प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो डाउन पेमेंट के बाद भी उन्हें बड़ा होम लोन लेना पड़ सकता है। इसके साथ लंबे समय तक EMI चुकाने की जिम्मेदारी आएगी।
घर खरीदने पर निवेश की रफ्तार हो सकती है धीमी
व्यक्तिगत वित्त के नजरिए से देखें तो घर खरीदना सिर्फ डाउन पेमेंट तक सीमित फैसला नहीं है। इसके साथ होम लोन की EMI, ब्याज, रजिस्ट्रेशन और स्टांप ड्यूटी, मेंटेनेंस, इंटीरियर और अन्य खर्च भी जुड़े होते हैं।
ऐसे में अगर कोई व्यक्ति अपने मौजूदा निवेश को बेचकर घर की डाउन पेमेंट करता है, तो उसके निवेश पोर्टफोलियो का आकार कम हो सकता है। दूसरी ओर, अगर वह डाउन पेमेंट के लिए पर्याप्त पैसा अलग रखता है और बाकी रकम होम लोन से जुटाता है, तो हर महीने की EMI उसकी कैश फ्लो क्षमता पर असर डाल सकती है।
यही वजह है कि 1.2 करोड़ रुपये की नेट वर्थ होने के बावजूद इस प्रोफेशनल के लिए बेंगलुरु में घर खरीदना सीधा फैसला नहीं है।
मैसूर की प्रॉपर्टी होने के बावजूद बेंगलुरु में घर क्यों?
इस कहानी का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि व्यक्ति के पास मैसूर में पहले से करीब 90 लाख रुपये की प्रॉपर्टी है। लेकिन उसका रहना और काम बेंगलुरु में है।
यानी संपत्ति का होना और उस संपत्ति का उस शहर में होना जहां व्यक्ति रहना और काम करना चाहता है—दो अलग बातें हैं।
किसी व्यक्ति की नेट वर्थ में प्रॉपर्टी की वैल्यू शामिल होने से यह जरूरी नहीं हो जाता कि वह उसी रकम को तुरंत इस्तेमाल कर सकता है। प्रॉपर्टी अपेक्षाकृत कम लिक्विड एसेट होती है। उसे बेचने में समय लग सकता है और बिक्री के साथ टैक्स, ट्रांजैक्शन कॉस्ट तथा अन्य वित्तीय पहलू भी जुड़े हो सकते हैं।
34 साल की उम्र में अगला लक्ष्य क्या?
वायरल पोस्ट में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कोई व्यक्ति 34 साल की उम्र में करीब 1.2 करोड़ रुपये की नेट वर्थ बना चुका है, तो अब उसके सामने अगला लक्ष्य क्या होना चाहिए?
एक विकल्प यह है कि वह किराए के घर में रहकर अपने निवेश को जारी रखे और आने वाले वर्षों में अपनी नेट वर्थ को और बढ़ाए।
दूसरा विकल्प बेंगलुरु में घर खरीदना है। इससे उसे रहने की स्थिरता मिल सकती है और किराए से छुटकारा भी मिल सकता है, लेकिन इसके बदले बड़ी रकम प्रॉपर्टी में लॉक हो सकती है।
यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि घर खरीद सकते हैं या नहीं, बल्कि यह भी है कि घर खरीदने के बाद उनकी वित्तीय स्वतंत्रता कितनी प्रभावित होगी।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इस कहानी ने सोशल मीडिया पर भी लोगों को अपनी राय रखने का मौका दिया। कई लोगों ने कहा कि 34 साल की उम्र में 1.2 करोड़ रुपये की नेट वर्थ हासिल करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है, लेकिन महंगे शहरों में घर खरीदना अलग चुनौती है।
एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 1.2 करोड़ रुपये की नेट वर्थ होने के बाद भी सबसे मुश्किल फैसला यह हो सकता है कि निवेश जारी रखा जाए या घर खरीदा जाए, क्योंकि आर्थिक जिम्मेदारियां नेट वर्थ बढ़ने के साथ खत्म नहीं होतीं।
एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि अगर बेंगलुरु में घर खरीदने के लिए बड़ा लोन लेना पड़े और उसकी EMI निवेश की क्षमता को कम कर दे, तो क्या सिर्फ अपना घर होने के लिए इतना बड़ा वित्तीय बोझ लेना सही फैसला होगा?
करोड़पति होना और घर का मालिक होना एक जैसा नहीं
इस पूरी कहानी से व्यक्तिगत वित्त का एक अहम पहलू सामने आता है। नेट वर्थ और कैश फ्लो एक ही चीज नहीं हैं।
किसी व्यक्ति की नेट वर्थ में शेयर, म्यूचुअल फंड, EPF, गोल्ड, FD और प्रॉपर्टी जैसी संपत्तियां शामिल हो सकती हैं। लेकिन इन सभी को तुरंत नकदी में बदलना संभव या उचित नहीं होता।
इसीलिए 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक की नेट वर्थ होने के बावजूद किसी व्यक्ति को महंगे शहर में घर खरीदने के लिए पर्याप्त रूप से वित्तीय रूप से तैयार महसूस न हो, यह संभव है।
बेंगलुरु जैसे शहरों में जहां अच्छी लोकेशन पर प्रॉपर्टी की कीमत काफी ज्यादा हो सकती है, वहां घर खरीदने का फैसला व्यक्ति की आय, मौजूदा निवेश, डाउन पेमेंट, ब्याज दर, EMI और भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखकर करना पड़ता है।
निष्कर्ष
34 साल की उम्र में करीब 1.2 करोड़ रुपये की नेट वर्थ और कर्ज-मुक्त स्थिति हासिल करना निश्चित रूप से मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाता है। लेकिन बेंगलुरु में घर खरीदना उनके लिए इसलिए मुश्किल है क्योंकि घर खरीदने के बाद बड़ी रकम एक ही एसेट में लग सकती है और होम लोन लेने पर लंबे समय तक EMI का बोझ भी आ सकता है।
इस कहानी की सबसे बड़ी सीख यही है कि करोड़पति होना और महंगे शहर में घर खरीदने में सक्षम होना हमेशा एक ही बात नहीं होती। सही फैसला व्यक्ति के लक्ष्य, आय, निवेश और भविष्य की जरूरतों पर निर्भर करता है।


