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Reading: पान मसाला शौकीनों के लिए बड़ी खबर! प्लास्टिक पैकिंग पर सख्ती, अब बदल जाएगी पैकेजिंग; क्या बढ़ेंगे दाम?
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पान मसाला शौकीनों के लिए बड़ी खबर! प्लास्टिक पैकिंग पर सख्ती, अब बदल जाएगी पैकेजिंग; क्या बढ़ेंगे दाम?

Namam Sharma
Last updated: 2026/08/11 at 10:47 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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13 Min Read
pan-masala-plastic-packing-ban-fssai-new-packaging-rule-2026
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Pan Masala Packaging Rule 2026: पान मसाला खरीदने वाले लोगों के लिए पैकेजिंग से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर नियमों में बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाया है। नए नियमों के तहत पान मसाला की पैकेजिंग में प्लास्टिक, प्लास्टिक-आधारित लेयर और मेटलाइज्ड लेयर के इस्तेमाल पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया है।

Contents
Highlightsपान मसाला की पैकिंग को लेकर क्यों बदले जा रहे नियम?क्या अब पान मसाला डिब्बे में मिलेगा?किन चीजों की पैकेजिंग में नहीं हो सकेगा इस्तेमाल?नई पैकेजिंग में क्या इस्तेमाल किया जा सकता है?कंपनियों के लिए बढ़ सकती है पैकेजिंग लागतक्या पान मसाला के दाम बढ़ेंगे?सेल्फ लाइफ और प्रोडक्ट क्वालिटी भी बड़ी चुनौतीट्रांसपोर्टेशन पर भी पड़ेगा असरयह नियम पर्यावरण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?क्या गुटखा भी इस बदलाव के दायरे में है?ग्राहकों को अब क्या देखने को मिल सकता है?कंपनियों के लिए चुनौती, ग्राहकों के लिए बदलावनिष्कर्ष

इस बदलाव के बाद पान मसाला कंपनियों को अपनी पैकेजिंग व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन करना पड़ सकता है। इसके लिए पेपर, पेपर बोर्ड, सेलूलोज या अन्य प्राकृतिक रूप से प्राप्त सामग्री के साथ-साथ टिन और कांच के कंटेनर जैसे विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे कंपनियों की पैकेजिंग लागत बढ़ने की संभावना है और इसका असर आने वाले समय में उत्पाद की कीमत पर भी पड़ सकता है।

Highlights

  • FSSAI ने पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर सख्त नियम प्रस्तावित किए हैं।
  • प्लास्टिक और प्लास्टिक-लैमिनेटेड पैकेजिंग पर रोक का प्रावधान है।
  • एल्युमिनियम फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर भी अनुमत पैकेजिंग सामग्री की सूची से बाहर हैं।
  • पेपर, पेपर बोर्ड, सेलूलोज, टिन और कांच जैसे विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • नई पैकेजिंग व्यवस्था से कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
  • लागत बढ़ने पर पान मसाला की कीमतों पर भी असर पड़ने की संभावना है।

पान मसाला की पैकिंग को लेकर क्यों बदले जा रहे नियम?

भारत में पान मसाला लंबे समय से छोटे प्लास्टिक पाउच और विभिन्न प्रकार की लैमिनेटेड पैकेजिंग में बेचा जाता रहा है। ऐसी पैकेजिंग में कई बार प्लास्टिक की अलग-अलग परतों के साथ एल्युमिनियम या मेटलाइज्ड लेयर का इस्तेमाल होता है।

FSSAI की ओर से जारी किए गए ड्राफ्ट नियमों में पान मसाला के लिए ऐसी पैकेजिंग सामग्री को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं, जिसमें प्लास्टिक या सिंथेटिक पॉलिमर का इस्तेमाल न हो। सरकारी दस्तावेज में पॉलीएथिलीन, पॉलीप्रोपिलीन, पॉलीएस्टर और PVC जैसे प्लास्टिक पदार्थों के साथ सिंथेटिक पॉलिमर, कॉपॉलिमर और लैमिनेट का भी उल्लेख किया गया है।

इसका सीधा मतलब यह है कि कंपनियों को मौजूदा प्लास्टिक आधारित पाउच मॉडल के विकल्प तलाशने होंगे।

क्या अब पान मसाला डिब्बे में मिलेगा?

यह सवाल इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में है। FSSAI के प्रस्तावित पैकेजिंग मानकों में टिन या ग्लास कंटेनर को विकल्प के रूप में शामिल किया गया है। इसके अलावा पेपर, पेपर बोर्ड और सेलूलोज जैसी प्राकृतिक रूप से प्राप्त सामग्री का भी उल्लेख है।

इसलिए आने वाले समय में बाजार में पान मसाला के कुछ उत्पाद टिन या कांच के कंटेनर में नजर आ सकते हैं। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि हर ब्रांड अनिवार्य रूप से केवल डिब्बे में ही पान मसाला बेचेगा। कंपनियां नियमों के अनुरूप अलग-अलग पैकेजिंग विकल्प अपना सकती हैं।

यानी “अब हर पान मसाला डिब्बे में ही मिलेगा” कहना अभी सही नहीं होगा। असल बदलाव प्लास्टिक और प्लास्टिक-आधारित पैकेजिंग को हटाने पर केंद्रित है।

किन चीजों की पैकेजिंग में नहीं हो सकेगा इस्तेमाल?

प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार पान मसाला की पैकेजिंग में प्लास्टिक से जुड़ी कई सामग्रियों पर रोक लगाई गई है। इनमें पॉलीएथिलीन, पॉलीप्रोपिलीन, पॉलीएस्टर और PVC जैसी सामग्री शामिल हैं।

इसके अलावा केवल प्लास्टिक ही नहीं, बल्कि प्लास्टिक लैमिनेट, सिंथेटिक पॉलिमर और कॉपॉलिमर जैसी सामग्री को भी बाहर रखा गया है। पैकेजिंग में एल्युमिनियम फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर के इस्तेमाल पर भी रोक का प्रावधान है।

यह बदलाव पान मसाला निर्माताओं के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि छोटे पाउच की मौजूदा पैकेजिंग व्यवस्था में ऐसी सामग्रियों का इस्तेमाल काफी आम है।

नई पैकेजिंग में क्या इस्तेमाल किया जा सकता है?

FSSAI के दस्तावेज में पान मसाला के लिए कुछ वैकल्पिक पैकेजिंग सामग्री का उल्लेख किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से:

  • पेपर
  • पेपर बोर्ड
  • सेलूलोज
  • अन्य प्राकृतिक रूप से प्राप्त सामग्री
  • टिन कंटेनर
  • ग्लास कंटेनर

शामिल हैं। हालांकि पेपर या सेलूलोज आधारित सामग्री में भी प्लास्टिक या प्रतिबंधित सिंथेटिक सामग्री का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

इसका अर्थ है कि कंपनियों को केवल बाहरी पैकेट का डिजाइन बदलना ही नहीं होगा, बल्कि ऐसी पैकेजिंग विकसित करनी होगी जो उत्पाद की गुणवत्ता और सुरक्षा को भी बनाए रख सके।

कंपनियों के लिए बढ़ सकती है पैकेजिंग लागत

नए नियमों का सबसे बड़ा व्यावसायिक असर पान मसाला कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। वर्तमान में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक आधारित पैकेजिंग की जगह वैकल्पिक सामग्री अपनाने के लिए कंपनियों को नई पैकेजिंग तकनीक, मशीनरी और सप्लाई चेन की जरूरत पड़ सकती है।

अगर टिन या कांच जैसी पैकेजिंग का इस्तेमाल बढ़ता है तो पैकेजिंग सामग्री के साथ-साथ उसके परिवहन और भंडारण की लागत भी प्रभावित हो सकती है। वहीं पेपर और पेपर बोर्ड आधारित पैकेजिंग में भी उत्पाद को नमी और बाहरी वातावरण से सुरक्षित रखने के लिए बेहतर डिजाइन की जरूरत होगी।

इन सभी बदलावों का सीधा असर कंपनियों के उत्पादन खर्च पर पड़ सकता है।

क्या पान मसाला के दाम बढ़ेंगे?

यही सवाल अब सबसे महत्वपूर्ण है। कीमत बढ़ना अभी तय नहीं है, लेकिन नई पैकेजिंग व्यवस्था से लागत बढ़ने की स्थिति में कंपनियों के पास कीमतों में बदलाव करने का विकल्प हो सकता है।

किसी उत्पाद की अंतिम कीमत केवल पैकेजिंग लागत से तय नहीं होती। इसमें कच्चा माल, उत्पादन, परिवहन, टैक्स, वितरण, मार्केटिंग और रिटेल मार्जिन जैसे कई खर्च शामिल होते हैं। इसलिए पैकेजिंग में बदलाव का पूरा खर्च कंपनियां खुद वहन करती हैं या उसका कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालती हैं, यह प्रत्येक कंपनी की रणनीति पर निर्भर करेगा।

इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि नए नियम लागू होते ही पान मसाला महंगा हो जाएगा। लेकिन कीमत बढ़ने का दबाव जरूर बन सकता है, खासकर उन उत्पादों में जिनकी पैकेजिंग लागत मौजूदा व्यवस्था की तुलना में काफी बढ़ जाती है।

सेल्फ लाइफ और प्रोडक्ट क्वालिटी भी बड़ी चुनौती

प्लास्टिक आधारित मल्टी-लेयर पैकेजिंग का एक बड़ा फायदा यह रहा है कि वह उत्पाद को नमी, हवा और बाहरी वातावरण से बचाने में मदद करती है। नई पैकेजिंग व्यवस्था में कंपनियों के सामने यही सुरक्षा स्तर बनाए रखने की चुनौती होगी।

अगर पेपर या अन्य प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है तो कंपनियों को ऐसी पैकेजिंग विकसित करनी होगी जो उत्पाद को लंबे समय तक सुरक्षित रख सके। इसके लिए पैकेजिंग डिजाइन और तकनीक में निवेश बढ़ सकता है।

टिन और ग्लास कंटेनर इस समस्या का एक विकल्प हो सकते हैं, लेकिन इनकी अपनी लागत और लॉजिस्टिक्स संबंधी चुनौतियां हैं। ग्लास अपेक्षाकृत भारी और टूटने वाला होता है, जबकि टिन कंटेनर की लागत छोटे पाउच की तुलना में अधिक हो सकती है।

ट्रांसपोर्टेशन पर भी पड़ेगा असर

पैकेजिंग का बदलाव केवल फैक्ट्री तक सीमित नहीं रहेगा। अगर कंपनियां भारी या ज्यादा मजबूत कंटेनर अपनाती हैं तो उत्पादों की ढुलाई की लागत भी बढ़ सकती है।

उदाहरण के लिए, बड़ी संख्या में छोटे पाउच को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना अपेक्षाकृत आसान होता है। इसके मुकाबले टिन या कांच के कंटेनर अधिक जगह और सावधानी मांग सकते हैं।

इससे लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और रिटेल स्तर पर भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

यह नियम पर्यावरण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

प्लास्टिक पैकेजिंग का इस्तेमाल कम करने के पीछे पर्यावरणीय चिंता भी एक महत्वपूर्ण कारण है। छोटे प्लास्टिक पाउच बड़ी संख्या में इस्तेमाल होने के कारण कचरे की समस्या को बढ़ा सकते हैं।

FSSAI ने पान मसाला की पैकेजिंग के लिए प्लास्टिक-मुक्त विकल्पों पर जोर देकर ऐसी पैकेजिंग को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाया है जो पर्यावरण पर कम दबाव डाले। FSSAI की ओर से पान मसाला और गुटखा सैशे के लिए बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग समाधान तलाशने को लेकर Biopackathon 2026 पहल भी दिखाई देती है।

क्या गुटखा भी इस बदलाव के दायरे में है?

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। FSSAI के पैकेजिंग दस्तावेज में पान मसाला के लिए नए पैकेजिंग मानकों का उल्लेख है, जबकि उसी दस्तावेज में Plastic Waste Management Rules के कुछ प्रावधानों का हवाला देते हुए गुटखा, तंबाकू और पान मसाला की प्लास्टिक पैकेजिंग पर रोक का संदर्भ भी दिया गया है।

इसलिए इसे सीधे “गुटखा अब डिब्बे में ही मिलेगा” के रूप में समझना सही नहीं होगा। बाजार में वास्तविक पैकेजिंग किस रूप में दिखाई देगी, यह कंपनियों द्वारा अपनाए गए अनुमत विकल्पों और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।

ग्राहकों को अब क्या देखने को मिल सकता है?

अगर नए पैकेजिंग मानकों को व्यापक रूप से लागू किया जाता है तो आने वाले समय में बाजार में पान मसाला के पैकेट पहले की तुलना में अलग नजर आ सकते हैं।

छोटे प्लास्टिक पाउच की जगह पेपर-आधारित पैकेजिंग, टिन कंटेनर या ग्लास कंटेनर जैसे विकल्प देखने को मिल सकते हैं। कंपनियां अपने उत्पाद को सुरक्षित रखने के लिए पैकेजिंग के आकार और डिजाइन में भी बदलाव कर सकती हैं।

ग्राहकों के लिए सबसे बड़ा बदलाव पैकेट की शक्ल और कीमत में दिखाई दे सकता है। हालांकि कीमत में कितना बदलाव होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

कंपनियों के लिए चुनौती, ग्राहकों के लिए बदलाव

FSSAI का यह कदम पान मसाला उद्योग के लिए केवल पैकेट बदलने का मामला नहीं है। कंपनियों को नई पैकेजिंग सामग्री, उत्पादन प्रक्रिया, मशीनरी, सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स में बदलाव करना पड़ सकता है।

दूसरी तरफ ग्राहकों को आने वाले समय में अलग तरह के पैकेट या कंटेनर देखने को मिल सकते हैं। यदि नई पैकेजिंग महंगी साबित होती है तो उसका कुछ असर खुदरा कीमतों पर भी पड़ सकता है।

हालांकि अभी किसी निश्चित ब्रांड के पान मसाला की कीमत कितनी बढ़ेगी, यह कहना संभव नहीं है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर FSSAI के नए पैकेजिंग मानकों से पान मसाला उद्योग में बड़ा बदलाव आने की संभावना है। प्लास्टिक, प्लास्टिक-लैमिनेटेड सामग्री और मेटलाइज्ड लेयर से दूर जाकर पेपर, पेपर बोर्ड, सेलूलोज, टिन और ग्लास जैसे विकल्पों पर जोर दिया जा रहा है।

इस बदलाव का उद्देश्य पैकेजिंग को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाना है, लेकिन कंपनियों के लिए लागत और तकनीकी चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में बाजार में पान मसाला की पैकेजिंग के साथ-साथ उसकी कीमतों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

महत्वपूर्ण बात: पैकेजिंग नियम बदलने का मतलब यह नहीं है कि पान मसाला या गुटखा स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हो गया है। तंबाकू और संबंधित उत्पादों का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

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TAGGED: FSSAI New Rule 2026, FSSAI Pan Masala Rule, Pan Masala Packaging Rule 2026, Pan Masala Price, गुटखा पैकेजिंग नियम, पान मसाला पैकिंग नियम, पान मसाला प्लास्टिक बैन
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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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