AI Virtual Influencers: सोशल मीडिया की दुनिया में अब हर चर्चित चेहरा इंसान हो, यह जरूरी नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से बनाए गए वर्चुअल इन्फ्लुएंसर आज लाखों लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं। ये डिजिटल कैरेक्टर देखने में बिल्कुल वास्तविक इंसानों जैसे नजर आते हैं, सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं, ब्रांड प्रमोट करते हैं और बड़े-बड़े कंपनियों के साथ विज्ञापन डील भी कर रहे हैं।
सबसे हैरानी की बात इनकी लोकप्रियता और कमाई है। कुछ रिपोर्ट्स और अध्ययनों के मुताबिक, AI-जनरेटेड वर्चुअल इन्फ्लुएंसर्स की एंगेजमेंट दर पारंपरिक इंसानी इन्फ्लुएंसर्स की तुलना में कई गुना अधिक हो सकती है। इस बढ़ते बाजार में महिला-रूप वाले वर्चुअल कैरेक्टर्स की हिस्सेदारी भी काफी ज्यादा बताई जाती है।
इन्हीं डिजिटल सितारों में लिल मिक्वेला (Lil Miquela) का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है। रिपोर्ट्स में उसकी अनुमानित नेट वर्थ करीब 16 मिलियन डॉलर यानी ₹150 करोड़ से ज्यादा बताई जाती है। Prada, Calvin Klein और अन्य बड़े ब्रांड्स के साथ काम कर चुकी यह वर्चुअल इन्फ्लुएंसर दिखाती है कि सोशल मीडिया की दुनिया में अब ‘वर्चुअल’ होना कमाई के रास्ते में बाधा नहीं है।
Highlights
- AI वर्चुअल इन्फ्लुएंसर्स की एंगेजमेंट दर कई मामलों में इंसानी इन्फ्लुएंसर्स से ज्यादा बताई जाती है।
- लिल मिक्वेला की अनुमानित नेट वर्थ करीब ₹150 करोड़ से ज्यादा बताई जाती है।
- Prada, Netflix, Adidas और Hugo Boss जैसे बड़े ब्रांड्स वर्चुअल कैरेक्टर्स के साथ काम कर चुके हैं।
- भारत में Kyra, Naina Avtar और Vrittika Patel जैसे AI-आधारित डिजिटल चेहरे लोकप्रिय हो रहे हैं।
- ब्रांड्स के लिए AI इन्फ्लुएंसर 24 घंटे उपलब्ध रहने वाला डिजिटल मार्केटिंग एसेट बन सकते हैं।
क्या होते हैं AI वर्चुअल इन्फ्लुएंसर?
AI वर्चुअल इन्फ्लुएंसर ऐसे डिजिटल कैरेक्टर होते हैं जिन्हें कंप्यूटर ग्राफिक्स, 3D मॉडलिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जनरेटिव AI जैसी तकनीकों की मदद से तैयार किया जाता है। इनके चेहरे, कपड़े, व्यक्तित्व और सोशल मीडिया की पूरी कहानी को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि लोगों को वे किसी वास्तविक सोशल मीडिया सेलिब्रिटी जैसे लगें।
हालांकि, इनके पीछे कोई वास्तविक व्यक्ति उसी रूप में मौजूद नहीं होता। इनके पोस्ट, तस्वीरें, वीडियो और कई बार इनकी पूरी डिजिटल पर्सनैलिटी एक टीम या कंपनी द्वारा मैनेज की जाती है।
यही वजह है कि इन्हें वर्चुअल या डिजिटल इन्फ्लुएंसर कहा जाता है।
इनका इस्तेमाल केवल फोटो पोस्ट करने तक सीमित नहीं है। फैशन, ब्यूटी, गेमिंग, मनोरंजन, ट्रैवल और लाइफस्टाइल जैसे क्षेत्रों में इन डिजिटल चेहरों को ब्रांड कैंपेन का हिस्सा बनाया जा रहा है।
लिल मिक्वेला की ₹150 करोड़ से ज्यादा की नेट वर्थ!
AI वर्चुअल इन्फ्लुएंसर्स की बात हो और Lil Miquela का नाम न आए, ऐसा मुश्किल है। यह डिजिटल कैरेक्टर दुनिया के सबसे चर्चित वर्चुअल इन्फ्लुएंसर्स में गिनी जाती है।
रिपोर्ट्स में उसकी अनुमानित नेट वर्थ करीब 16 मिलियन डॉलर, यानी भारतीय मुद्रा में ₹150 करोड़ से ज्यादा बताई गई है। सोशल मीडिया पर उसके लाखों फॉलोअर्स हैं और फैशन इंडस्ट्री के कई बड़े नाम उसके साथ काम कर चुके हैं।
Prada और Calvin Klein जैसे ब्रांड्स के साथ उसकी साझेदारी ने यह भी दिखाया कि लग्जरी कंपनियां अब केवल वास्तविक मॉडल्स और सेलिब्रिटीज पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। एक डिजिटल कैरेक्टर भी ब्रांड की कहानी और कैंपेन का हिस्सा बन सकता है।
हालांकि, किसी वर्चुअल इन्फ्लुएंसर की नेट वर्थ का आंकड़ा आमतौर पर अनुमान पर आधारित होता है। इसलिए इसे किसी पारंपरिक कंपनी की तरह ऑडिटेड संपत्ति का आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
लू डो मगालू भी है बड़ा डिजिटल स्टार
ब्राजील की वर्चुअल स्टार Lu do Magalu भी AI और डिजिटल इन्फ्लुएंसर की दुनिया में जाना-पहचाना नाम है। इसे ब्राजील की रिटेल कंपनी Magazine Luiza से जोड़ा जाता है।
सोशल मीडिया पर इसकी मौजूदगी लंबे समय से है और यह ब्रांड प्रमोशन के लिए डिजिटल कैरेक्टर के इस्तेमाल का बड़ा उदाहरण है। रिपोर्ट्स में इसकी सालाना कमाई को करोड़ों रुपये में बताया गया है।
लू डो मगालू की लोकप्रियता इस बात का उदाहरण है कि वर्चुअल कैरेक्टर सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि सीधे तौर पर किसी कंपनी की मार्केटिंग रणनीति का हिस्सा भी बन सकता है।
ऐताना लोपेज की भी है जबरदस्त चर्चा
Aitana Lopez को एक वर्चुअल स्पैनिश मॉडल के तौर पर पेश किया गया है। गुलाबी बालों वाला यह डिजिटल कैरेक्टर सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुआ है।
इसके जरिए फैशन और लाइफस्टाइल ब्रांड्स तक पहुंच बनाई गई है। इसकी सफलता यह बताती है कि कंपनियां अब डिजिटल मॉडल को पारंपरिक मॉडल के विकल्प के तौर पर भी देखने लगी हैं।
AI मॉडल के साथ काम करने का एक बड़ा फायदा यह है कि कंपनी उसके लुक, लोकेशन, कपड़े और कैंपेन की थीम को अपनी जरूरत के हिसाब से बदल सकती है।
क्यों AI इन्फ्लुएंसर से ज्यादा कमाई कर रहे हैं?
AI वर्चुअल इन्फ्लुएंसर्स की कमाई का मॉडल काफी हद तक इंसानी इन्फ्लुएंसर्स जैसा है। ब्रांड उन्हें अपने प्रोडक्ट और कैंपेन के लिए इस्तेमाल करते हैं। अंतर यह है कि डिजिटल कैरेक्टर को बनाने और मैनेज करने वाली टीम उसके कंटेंट और पहचान पर ज्यादा नियंत्रण रख सकती है।
मान लीजिए किसी फैशन ब्रांड को एक ही मॉडल के साथ 10 अलग-अलग देशों में कैंपेन चलाना है। वास्तविक शूट के लिए मॉडल, फोटोग्राफर, मेकअप, लोकेशन, यात्रा और प्रोडक्शन जैसी कई चीजों की जरूरत पड़ सकती है। वहीं डिजिटल मॉडल के मामले में इनमें से कई प्रक्रियाओं को वर्चुअल तरीके से किया जा सकता है।
इसके अलावा AI इन्फ्लुएंसर बीमार नहीं पड़ता, यात्रा नहीं करता और एक ही समय में अलग-अलग डिजिटल कैंपेन के लिए तैयार किया जा सकता है। यही वजह है कि ब्रांड्स के लिए यह मॉडल आकर्षक हो सकता है।
AI इन्फ्लुएंसर की एंगेजमेंट दर क्यों चर्चा में है?
वर्चुअल इन्फ्लुएंसर्स की सबसे बड़ी ताकत उनकी डिजिटल पर्सनैलिटी है। उन्हें शुरू से एक खास ऑडियंस को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है।
उनकी हर पोस्ट, कपड़े, बोलने का अंदाज और कहानी को एक खास ब्रांड इमेज के अनुरूप बनाया जा सकता है। इससे सोशल मीडिया पर एक अलग तरह का क्यूरियोसिटी फैक्टर पैदा होता है।
कुछ अध्ययनों में वर्चुअल इन्फ्लुएंसर्स के एंगेजमेंट को इंसानी इन्फ्लुएंसर्स की तुलना में काफी ज्यादा बताया गया है। हालांकि, एंगेजमेंट का आंकड़ा प्लेटफॉर्म, फॉलोअर्स की संख्या, कंटेंट की क्वालिटी और मापने के तरीके के अनुसार काफी बदल सकता है।
इसलिए ‘तीन गुना ज्यादा एंगेजमेंट’ जैसे आंकड़ों को पूरे उद्योग पर लागू करने के बजाय एक रिपोर्टेड या स्टडी-आधारित दावा समझना ज्यादा उचित है।
भारत में भी तेजी से बढ़ रहा है AI इन्फ्लुएंसर का क्रेज
AI वर्चुअल इन्फ्लुएंसर का ट्रेंड अब भारत तक भी पहुंच चुका है। यहां कई डिजिटल कैरेक्टर सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बना रहे हैं और ब्रांड कैंपेन का हिस्सा बन रहे हैं।
Kyra भारत की चर्चित AI इन्फ्लुएंसर में से एक है। इसके सोशल मीडिया अकाउंट पर लाखों की संख्या में फॉलोअर्स बताए जाते हैं। इसके अलावा Naina Avtar और Vrittika Patel जैसे नाम भी डिजिटल इन्फ्लुएंसर की बढ़ती लोकप्रियता को दिखाते हैं।
भारत जैसे बड़े सोशल मीडिया बाजार में ब्रांड्स के लिए यह एक नया मार्केटिंग टूल बन सकता है। खासकर फैशन, कॉस्मेटिक्स, टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल कंपनियां डिजिटल कैरेक्टर्स के जरिए युवा दर्शकों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकती हैं।
क्या AI इन्फ्लुएंसर इंसानी इन्फ्लुएंसर की जगह ले लेंगे?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। वास्तविक इंसानी इन्फ्लुएंसर के पास व्यक्तिगत अनुभव, भावनाएं और वास्तविक जीवन की विश्वसनीयता होती है। यही चीज उनकी ऑडियंस के साथ मजबूत संबंध बनाने में मदद करती है।
दूसरी तरफ, AI इन्फ्लुएंसर पूरी तरह नियंत्रित डिजिटल पहचान के साथ काम करते हैं। वे ब्रांड्स को ज्यादा क्रिएटिव कंट्रोल और लगातार कंटेंट तैयार करने की सुविधा दे सकते हैं।
इसलिए आने वाले समय में दोनों के बीच सीधी प्रतिस्पर्धा के बजाय एक हाइब्रिड मॉडल देखने को मिल सकता है, जहां इंसानी सेलिब्रिटी और AI कैरेक्टर दोनों एक ही कैंपेन में दिखाई दें।
‘नकली’ चेहरों की असली चुनौती भी समझिए
AI इन्फ्लुएंसर की लोकप्रियता बढ़ने के साथ कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि दर्शकों को यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि सामने मौजूद चेहरा वास्तविक इंसान नहीं है।
अगर किसी डिजिटल कैरेक्टर को वास्तविक व्यक्ति के तौर पर पेश किया जाता है, तो इससे ऑडियंस के भरोसे पर असर पड़ सकता है। ब्रांड्स के लिए भी यह जरूरी होगा कि वे AI-generated या virtual content के बारे में पारदर्शिता बरतें।
इसके अलावा AI से बनाए गए चेहरों, आवाज और व्यक्तित्व के इस्तेमाल से कॉपीराइट, पहचान और नैतिकता से जुड़े सवाल भी आने वाले समय में ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
करोड़ों का यह डिजिटल कारोबार अभी शुरुआत में है
AI वर्चुअल इन्फ्लुएंसर की कहानी केवल सोशल मीडिया ट्रेंड नहीं है। यह डिजिटल विज्ञापन और मनोरंजन के बदलते कारोबार का संकेत भी है।
आज जहां एक वर्चुअल कैरेक्टर लाखों फॉलोअर्स जुटा सकता है, वहीं बड़े ब्रांड उसके साथ करोड़ों रुपये के कैंपेन कर सकते हैं। लिल मिक्वेला जैसे उदाहरणों ने साबित किया है कि डिजिटल दुनिया में प्रभाव बनाने के लिए वास्तविक शरीर का होना जरूरी नहीं रह गया है।
भारत में भी Kyra और अन्य AI-आधारित डिजिटल चेहरों की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए आने वाले वर्षों में यह बाजार और बड़ा हो सकता है।
यानी सोशल मीडिया का अगला बड़ा स्टार शायद कोई वास्तविक इंसान नहीं, बल्कि AI से बनाया गया एक ऐसा डिजिटल चेहरा हो सकता है, जो कभी पैदा ही नहीं हुआ।


