US Water System Cyber Attack: ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिका के कई राज्यों में पानी की सप्लाई और वेस्टवॉटर सिस्टम पर साइबर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। FBI के मुताबिक, कम से कम सात राज्यों में पानी से जुड़े सिस्टम को निशाना बनाने की कोशिश की गई। मिनेसोटा में ही करीब 30 स्थानीय वॉटर सिस्टम प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर हैकर पानी जैसी जरूरी सार्वजनिक सेवा के सिस्टम में कैसे सेंध लगा रहे हैं और इससे कितना बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच अब साइबर मोर्चे पर भी खतरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका के कई राज्यों में पानी की सप्लाई और गंदे पानी के ट्रीटमेंट से जुड़े सिस्टम पर साइबर हमलों की जानकारी सामने आई है। इन घटनाओं ने अमेरिकी अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि पानी की सप्लाई व्यवस्था को किसी भी शहर की सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं में गिना जाता है।
मामला सामने आने के बाद अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने भी पानी और वेस्टवॉटर सिस्टम को लेकर चेतावनी जारी की। एजेंसी के मुताबिक, साइबर हमलावरों ने अमेरिका के कम से कम सात राज्यों में पानी और गंदे पानी से जुड़े सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच बनाने की कोशिश की। इन घटनाओं में कुछ जगहों पर रोजमर्रा के कामकाज पर असर पड़ने की बात सामने आई है।
मिनेसोटा में करीब 30 वॉटर सिस्टम निशाने पर
मिनेसोटा में अधिकारियों ने बताया कि राज्य के कम से कम 30 स्थानीय जल आपूर्ति सिस्टम एक साथ साइबर हमले की कोशिशों का सामना कर चुके हैं। जुलाई के आखिर में इस मामले की जानकारी सामने आने के बाद अधिकारियों ने स्थानीय जल संस्थानों को अपने साइबर सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने की सलाह दी।
इसके बाद जॉर्जिया, न्यू जर्सी और साउथ डकोटा से भी पानी से जुड़े सिस्टम पर इसी तरह के साइबर हमलों की जानकारी सामने आई। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन सभी घटनाओं का आपस में सीधा संबंध है या नहीं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि अलग-अलग राज्यों में सामने आई घटनाओं के पीछे एक ही समूह है या अलग-अलग साइबर हमलावर सक्रिय हैं।
इन घटनाओं को इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि पानी की सप्लाई केवल एक डिजिटल सेवा नहीं है। इसके पीछे पंप, ट्रीटमेंट प्लांट, पाइपलाइन, स्टोरेज टैंक और कई तरह के औद्योगिक नियंत्रण उपकरण काम करते हैं। इनमें से किसी महत्वपूर्ण सिस्टम में अनधिकृत बदलाव होने पर पानी की सप्लाई, दबाव या ट्रीटमेंट प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
अमेरिका में इतने बड़े पैमाने पर है पानी का नेटवर्क
अमेरिका में पानी की सप्लाई व्यवस्था बेहद विशाल है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में करीब 1.52 लाख सार्वजनिक पेयजल सिस्टम और 16 हजार से ज्यादा वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट प्लांट हैं।
किसी शहर या इलाके में पानी आमतौर पर झीलों, नदियों या जमीन के नीचे मौजूद जल स्रोतों से लिया जाता है। इसके बाद इलेक्ट्रिक पंप की मदद से पानी को पाइपलाइन के जरिए ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाता है।
ट्रीटमेंट प्लांट में पानी से गंदगी और दूसरी अशुद्धियों को हटाया जाता है। इसके बाद जरूरी प्रक्रिया के जरिए पानी को कीटाणुओं से मुक्त किया जाता है। साफ किए गए पानी को बड़े स्टोरेज टैंकों में रखा जाता है और फिर पाइपलाइन के नेटवर्क के जरिए घरों, दुकानों, कारोबार और सार्वजनिक संस्थानों तक पहुंचाया जाता है।
यानी पानी की एक सामान्य सप्लाई के पीछे कई डिजिटल और औद्योगिक सिस्टम एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। यही कनेक्टिविटी साइबर हमलावरों के लिए संभावित रास्ता बन सकती है।
हैकर पानी के सिस्टम को कैसे निशाना बना रहे हैं?
साइबर हमलों में सबसे ज्यादा चिंता प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर यानी PLC को लेकर है। PLC ऐसे औद्योगिक उपकरण होते हैं, जो मशीनों और प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
वॉटर ट्रीटमेंट और सप्लाई सिस्टम में इनका इस्तेमाल कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को मॉनिटर और कंट्रोल करने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, पानी का दबाव बनाए रखना, पंप को चलाना और कुछ मामलों में पानी के ट्रीटमेंट से जुड़ी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करना इनके काम का हिस्सा हो सकता है।
अगर किसी PLC या उससे जुड़े नेटवर्क तक किसी हमलावर की अनधिकृत पहुंच बन जाती है तो वह सिस्टम के संचालन में बदलाव करने की कोशिश कर सकता है। यही कारण है कि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ऐसे औद्योगिक कंट्रोल सिस्टम को महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा मानते हैं।
इंटरनेट से जुड़े सिस्टम बन रहे हैं कमजोर कड़ी
अमेरिकन यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल सर्विस स्कूल में ग्लोबल सिक्योरिटी के सहायक प्रोफेसर विलियम अकोटो के मुताबिक, हमलावर इंटरनेट से जुड़े कंट्रोलरों और बाहरी कंपनियों के नेटवर्क को खोज सकते हैं।
कई जल संस्थान अपने सिस्टम की निगरानी या रखरखाव के लिए बाहरी कंपनियों और रिमोट एक्सेस का इस्तेमाल करते हैं। अगर ऐसे किसी नेटवर्क की सुरक्षा कमजोर है तो हमलावर वहां से आगे बढ़ने की कोशिश कर सकते हैं।
साइबर अपराधी कभी-कभी डिफॉल्ट पासवर्ड, कमजोर पासवर्ड या चोरी किए गए लॉगिन क्रेडेंशियल का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। एक बार सिस्टम तक पहुंच मिलने के बाद वे पासवर्ड बदलने, सेटिंग्स में बदलाव करने या सिस्टम को कुछ कमांड देने की कोशिश कर सकते हैं।
यही वजह है कि पानी की सप्लाई के लिए इस्तेमाल होने वाले औद्योगिक उपकरणों को इंटरनेट से जोड़ते समय मजबूत ऑथेंटिकेशन और अलग नेटवर्क जैसी सुरक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
ईरान पर क्यों जताया जा रहा है शक?
इन साइबर हमलों का समय भी काफी महत्वपूर्ण है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध और बढ़े हुए भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर साइबर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं।
इसी वजह से अमेरिकी अधिकारियों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान ईरान से जुड़े संभावित साइबर खतरों की ओर गया है। ईरान से जुड़े हैकर समूहों पर पहले भी महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी संस्थानों को साइबर निशाना बनाने के आरोप लगते रहे हैं।
हालांकि, केवल किसी हमले के समय और पैटर्न के आधार पर यह निश्चित रूप से कहना जल्दबाजी होगी कि अमेरिका के इन सभी वॉटर सिस्टम हमलों के पीछे ईरान ही है। किसी साइबर हमले के पीछे वास्तविक हमलावर की पहचान करना तकनीकी रूप से बेहद मुश्किल हो सकता है और इसके लिए डिजिटल फॉरेंसिक जांच की जरूरत पड़ती है।
इसलिए फिलहाल ईरान से जुड़े होने का शक जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू है, लेकिन इसे अंतिम तौर पर स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
क्या इन हमलों से पानी जहरीला हो सकता है?
पानी के सिस्टम पर साइबर हमले की सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि अगर कोई हमलावर ट्रीटमेंट प्रक्रिया को प्रभावित करने में सफल हो जाए तो पानी की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, किसी सिस्टम में सेंध लगने और वास्तव में बड़े पैमाने पर लोगों तक असुरक्षित पानी पहुंचने के बीच कई सुरक्षा स्तर मौजूद हो सकते हैं। इसके अलावा, जल संस्थान आमतौर पर पानी की गुणवत्ता की निगरानी करते हैं और किसी असामान्य स्थिति का पता चलने पर सिस्टम को मैनुअल नियंत्रण में ले सकते हैं।
फिर भी साइबर हमले से पंप बंद होने, पानी का दबाव प्रभावित होने या किसी इलाके में सप्लाई बाधित होने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए विशेषज्ञों के लिए खतरा केवल पानी की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी जल आपूर्ति व्यवस्था के संचालन को लेकर भी है।
FBI की चेतावनी क्यों अहम है?
FBI की चेतावनी यह संकेत देती है कि अमेरिकी जल संस्थानों को अब साइबर सुरक्षा को केवल तकनीकी समस्या के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे के रूप में देखना होगा।
छोटे स्थानीय जल संस्थान विशेष रूप से चुनौती का सामना कर सकते हैं। कई छोटे शहरों और स्थानीय एजेंसियों के पास बड़े निजी संस्थानों जैसी साइबर सुरक्षा टीम या बजट नहीं होता। ऐसे में पुराने उपकरण, कमजोर पासवर्ड, इंटरनेट से जुड़े कंट्रोल सिस्टम और रिमोट एक्सेस जैसी व्यवस्थाएं संभावित जोखिम बढ़ा सकती हैं।
इस घटना ने यह भी दिखाया है कि आधुनिक सार्वजनिक सेवाएं जितनी ज्यादा डिजिटल और कनेक्टेड हो रही हैं, साइबर हमले की स्थिति में उनका जोखिम भी उतना ही बढ़ रहा है।
अमेरिका के लिए बढ़ी महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर की चिंता
पानी की सप्लाई, बिजली, गैस, परिवहन और संचार जैसी सेवाएं किसी भी देश के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा होती हैं। इनमें से किसी एक सेवा पर बड़े स्तर का साइबर हमला होने पर उसका असर केवल कंप्यूटर सिस्टम तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ सकता है।
अमेरिका में वॉटर सिस्टम पर सामने आए ताजा साइबर हमलों ने इसी खतरे को फिर उजागर किया है। फिलहाल जांच एजेंसियां हमलों के स्रोत और उनके आपसी संबंधों का पता लगाने में जुटी हैं। साथ ही स्थानीय जल संस्थानों को अपने इंटरनेट से जुड़े उपकरणों, पासवर्ड, रिमोट एक्सेस और औद्योगिक नियंत्रण प्रणालियों की सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत बताई जा रही है।
कुल मिलाकर, अमेरिका के कई राज्यों में पानी से जुड़े सिस्टम पर हुए साइबर हमले यह दिखाते हैं कि युद्ध के दौर में साइबर मोर्चा कितना महत्वपूर्ण हो चुका है। ईरान पर शक जरूर जताया जा रहा है, लेकिन हमलों के पीछे किसका हाथ है, इसे लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।


