भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और देश में कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस का घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) और वैश्विक ऊर्जा कंपनी Shell Energy India Pvt. Ltd. ने गहरे पानी में तेल एवं गैस की खोज और LNG खरीद के संभावित अवसर तलाशने के लिए एक नॉन-बाइंडिंग समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए घरेलू तेल-गैस उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ विदेशी तकनीक और विशेषज्ञता का इस्तेमाल करने पर जोर दे रहा है। दोनों कंपनियों के बीच सहयोग का फोकस भारत के गहरे समुद्री क्षेत्रों में संभावित हाइड्रोकार्बन संसाधनों की तलाश और भविष्य के कारोबारी अवसरों की पहचान पर रहेगा।
ONGC और Shell के बीच क्या हुआ समझौता?
Exploring deeper. Collaborating stronger. Powering India’s energy future.#ONGC and #Shell Energy India Private Limited (SEI) signed a Memorandum of Understanding (MoU) on 10 August 2026 to explore potential collaboration opportunities across India’s energy sector.
The… pic.twitter.com/63jxWEXijt
— Oil and Natural Gas Corporation Limited (ONGC) (@ONGC_) August 10, 2026 10 अगस्त को हुए इस MoU के तहत ONGC और Shell गहरे पानी वाले क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज के अवसरों की पहचान करेंगे। इसके साथ ही दोनों कंपनियां लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की खरीद से जुड़े संभावित अवसरों पर भी मिलकर काम करने की संभावनाएं तलाशेंगी।
इस समझौते में सरकार की Open Acreage Licensing Policy (OALP) के 10वें और 11वें दौर के अलावा भविष्य में होने वाली नीलामी प्रक्रियाओं में संभावित सहयोग की भी गुंजाइश रखी गई है।
हालांकि, यह समझौता नॉन-बाइंडिंग है। इसका मतलब है कि MoU अपने आप किसी निश्चित निवेश, संयुक्त परियोजना या ब्लॉक में भागीदारी की कानूनी बाध्यता पैदा नहीं करता। फिलहाल यह दोनों कंपनियों के बीच संभावित सहयोग के क्षेत्रों की पहचान करने के लिए एक फ्रेमवर्क उपलब्ध कराता है।
गहरे समुद्र में क्यों बढ़ रहा है फोकस?
भारत की ऊर्जा खपत लगातार बढ़ रही है। देश अपनी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर नए तेल और गैस भंडार की खोज ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
विशेष रूप से भारत के समुद्री क्षेत्रों में गहरे और अति-गहरे पानी वाले ब्लॉकों में हाइड्रोकार्बन की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि ऐसे क्षेत्रों में खोज और उत्पादन तकनीकी रूप से काफी चुनौतीपूर्ण होता है और इसके लिए आधुनिक तकनीक, बड़े निवेश तथा विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
यही वजह है कि ONGC जैसी भारतीय ऊर्जा कंपनी के लिए Shell जैसी वैश्विक कंपनी के साथ संभावित सहयोग महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
‘समुद्र मंथन’ पहल के तहत सहयोग
ONGC ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस समझौते की जानकारी साझा करते हुए इसे ‘समुद्र मंथन’ पहल से जोड़ा है। इस पहल का उद्देश्य भारत के समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज के लिए वैश्विक विशेषज्ञता और तकनीकी क्षमताओं का इस्तेमाल करना है।
समझौते के तहत दोनों कंपनियां नए ब्लॉकों के अलावा ONGC के मौजूदा OALP ब्लॉकों में भी फार्म-इन और फार्म-आउट के अवसर तलाश सकती हैं।
तेल एवं गैस उद्योग में फार्म-इन का मतलब किसी कंपनी द्वारा किसी मौजूदा परियोजना या ब्लॉक में हिस्सेदारी हासिल करके उसमें शामिल होना है, जबकि फार्म-आउट के तहत कोई कंपनी अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा दूसरी कंपनी को दे सकती है।
इस तरह की व्यवस्था से कंपनियों के बीच तकनीक, पूंजी, जोखिम और विशेषज्ञता साझा करने के अवसर पैदा होते हैं।
LNG खरीद में भी तलाशे जाएंगे अवसर
MoU का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू LNG से जुड़ा है। प्राकृतिक गैस को बेहद कम तापमान पर तरल रूप में बदलकर LNG बनाया जाता है। इसे समुद्री जहाजों के जरिए एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाना आसान होता है।
भारत में प्राकृतिक गैस की मांग बढ़ने के साथ LNG आयात भी ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। ऐसे में ONGC और Shell LNG खरीद के क्षेत्र में भी संभावित अवसरों की पहचान कर सकते हैं।
Shell की वैश्विक LNG कारोबार में मजबूत मौजूदगी होने के कारण इस क्षेत्र में सहयोग से दोनों कंपनियों को संभावित कारोबारी अवसर तलाशने में मदद मिल सकती है।
भारत में Shell का करीब 100 साल पुराना इतिहास
Shell का भारत से जुड़ाव नया नहीं है। कंपनी की भारतीय बाजार में मौजूदगी का इतिहास करीब एक सदी पुराना है।
Shell ने 1928 में Burmah Shell के नाम से भारत में प्रवेश किया था। उस दौर में कंपनी का कारोबार मुख्य रूप से पेट्रोलियम और ईंधन से जुड़े क्षेत्रों में था। समय के साथ भारत के ऊर्जा बाजार में कंपनी की गतिविधियां बदलती और विस्तारित होती गईं।
1990 के दशक में Shell ने भारत में लुब्रिकेंट्स और अन्य ऊर्जा कारोबार पर अपना ध्यान बढ़ाया। इसके बाद 2004 में कंपनी ने भारत में अपना फ्यूल रिटेल नेटवर्क दोबारा शुरू किया।
आज Shell भारत में रिटेल, टेक्नोलॉजी और ऊर्जा से जुड़े कई क्षेत्रों में काम करती है। कंपनी की भारतीय गतिविधियां पारंपरिक ऊर्जा के साथ-साथ नए ऊर्जा क्षेत्रों की ओर भी बढ़ी हैं।
ONGC पहले भी कर चुकी है विदेशी कंपनियों से साझेदारी
Shell के साथ यह समझौता ONGC की अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों के साथ सहयोग बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। कंपनी इससे पहले भी वैश्विक ऊर्जा कंपनियों के साथ भारत के गहरे समुद्री क्षेत्रों में खोज के लिए सहयोग कर चुकी है।
अगस्त 2022 में ONGC ने ExxonMobil के साथ भारत के पूर्वी और पश्चिमी तट के पास गहरे और अति-गहरे पानी वाले क्षेत्रों में तेल एवं गैस की खोज के अवसरों को लेकर एक शुरुआती समझौता किया था।
इसके अलावा, ONGC ने वैश्विक ऊर्जा कंपनियों के साथ गहरे समुद्र में हाइड्रोकार्बन खोज के लिए तकनीकी और कारोबारी सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर भी काम किया है।
इस रणनीति के पीछे मुख्य उद्देश्य यह है कि भारत के कठिन समुद्री क्षेत्रों में दुनिया की अनुभवी ऊर्जा कंपनियों की तकनीक और विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जा सके।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों अहम है यह समझौता?
ONGC और Shell के बीच MoU को सिर्फ दो कंपनियों के कारोबारी समझौते के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। भारत के लिए घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाना रणनीतिक महत्व रखता है।
यदि गहरे समुद्री क्षेत्रों में नई व्यावसायिक खोज सफल होती है, तो इससे भविष्य में भारत के घरेलू तेल और गैस उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है। इससे आयात पर निर्भरता कम करने और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, किसी MoU के आधार पर तत्काल तेल या गैस उत्पादन शुरू होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। पहले संभावित ब्लॉकों की पहचान, तकनीकी मूल्यांकन, अन्वेषण, निवेश और नियामकीय प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। इसलिए इस समझौते का वास्तविक असर आने वाले वर्षों में सामने आएगा।
आगे क्या होगा?
फिलहाल ONGC और Shell के बीच हुआ समझौता संभावित सहयोग के लिए शुरुआती ढांचा तैयार करता है। दोनों कंपनियां OALP के आगामी दौरों, मौजूदा ब्लॉकों और LNG खरीद से जुड़े अवसरों का मूल्यांकन करेंगी।
अगर किसी क्षेत्र में दोनों कंपनियों को व्यावसायिक और तकनीकी संभावना दिखाई देती है, तो भविष्य में अलग समझौते, निवेश या संयुक्त परियोजनाओं का रास्ता खुल सकता है।
कुल मिलाकर, ONGC और Shell की यह साझेदारी भारत के गहरे समुद्री तेल-गैस अन्वेषण कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण कदम है। एक तरफ ONGC का भारत के समुद्री क्षेत्रों में लंबा अनुभव है, वहीं Shell की वैश्विक तकनीकी और ऊर्जा बाजार की विशेषज्ञता इस सहयोग को रणनीतिक रूप से अहम बनाती है। आने वाले समय में यह साझेदारी भारत के घरेलू हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज और LNG कारोबार में नए अवसर पैदा कर सकती है।


