Bharat Forge Q1 Results: भारत फोर्ज के जून 2026 तिमाही के नतीजे बाजार की उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहे। कंपनी को अप्रैल-जून तिमाही में कंसोलिडेटेड आधार पर करीब ₹90 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी ने ₹283.87 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था। नतीजों के सामने आने के बाद सोमवार, 10 अगस्त को कंपनी के शेयर में तेज गिरावट देखने को मिली और स्टॉक करीब 9 फीसदी तक फिसल गया।
हालांकि, कंपनी के ऑपरेशनल प्रदर्शन में कुछ मजबूती दिखाई दी। जून तिमाही में ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 18.7 फीसदी बढ़कर ₹4,639.94 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹3,908.75 करोड़ था। दूसरी तरफ, खर्च में तेज बढ़ोतरी ने मुनाफे पर दबाव बनाया।
जून तिमाही में ₹89.89 करोड़ का घाटा
भारत फोर्ज ने शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी को कंसोलिडेटेड आधार पर ₹89.89 करोड़ का घाटा हुआ। पिछले वित्त वर्ष की जून तिमाही में कंपनी को ₹283.87 करोड़ का मुनाफा हुआ था। यानी सालाना आधार पर कंपनी के मुनाफे में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है।
कंपनी के रेवेन्यू में अच्छी वृद्धि के बावजूद निचले स्तर पर प्रदर्शन कमजोर रहा। जून 2026 तिमाही में ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹4,639.94 करोड़ रहा। इसकी तुलना में जून 2025 तिमाही में यह ₹3,908.75 करोड़ था। इस तरह कंपनी के रेवेन्यू में करीब 18.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
खर्च बढ़ने से मुनाफे पर दबाव
भारत फोर्ज के लिए जून तिमाही में सबसे बड़ी चिंता बढ़ते खर्च रहे। कंपनी का कुल खर्च जून 2026 तिमाही में बढ़कर ₹4,283.47 करोड़ हो गया, जबकि एक साल पहले की समान तिमाही में कुल खर्च ₹3,544.16 करोड़ था।
इसका मतलब है कि रेवेन्यू में मजबूत बढ़ोतरी के बावजूद कंपनी के खर्च की रफ्तार भी काफी तेज रही। बढ़ते खर्च और अन्य दबावों का असर कंपनी के नेट प्रॉफिट पर साफ दिखाई दिया और कंपनी मुनाफे से सीधे घाटे में पहुंच गई।
EBITDA बढ़ा, लेकिन मार्जिन घटा
ऑपरेशनल स्तर पर तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक नहीं रही। जून 2026 तिमाही में भारत फोर्ज का EBITDA यानी ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई ₹709.4 करोड़ रही। एक साल पहले इसी तिमाही में EBITDA ₹670 करोड़ था।
इस तरह EBITDA में सालाना आधार पर बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, मार्जिन के मोर्चे पर दबाव देखने को मिला। कंपनी का EBITDA मार्जिन 15.29 फीसदी रहा, जो सालाना आधार पर 170 बेसिस पॉइंट कम है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी की कमाई बढ़ने के बावजूद मार्जिन पर लागत का दबाव बना हुआ है।
नतीजों के बाद भारत फोर्ज के शेयर में गिरावट
तिमाही नतीजे जारी होने के बाद भारत फोर्ज के शेयरों पर बाजार की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही। 10 अगस्त के कारोबारी सत्र में शेयर पिछले बंद भाव से करीब 9 फीसदी तक गिर गया। BSE पर स्टॉक ₹2,073 के निचले स्तर तक पहुंच गया।
दिलचस्प बात यह है कि इसी कारोबारी सत्र में शेयर ने BSE पर ₹2,293 का 52 सप्ताह का नया हाई भी बनाया था। यानी दिन के ऊपरी स्तर से स्टॉक में तेज बिकवाली देखने को मिली।
गिरावट के बाद कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹99,700 करोड़ रह गया है। भारत फोर्ज के शेयर की फेस वैल्यू ₹2 है और यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है।
एक साल में 84 फीसदी चढ़ चुका है शेयर
हालिया गिरावट के बावजूद भारत फोर्ज के शेयर ने लंबी अवधि में निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, शेयर पिछले 6 महीनों में करीब 29 फीसदी मजबूत हुआ है, जबकि एक साल की अवधि में इसमें लगभग 84 फीसदी की तेजी आई है।
स्टॉक का 52 सप्ताह का एडजस्टेड लो ₹1,100.50 है। इस लिहाज से देखें तो शेयर ने अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर से काफी मजबूत रिकवरी की है। हालांकि, ताजा तिमाही नतीजों के बाद निवेशकों का फोकस अब कंपनी की कमाई, मार्जिन और आगे की ग्रोथ पर रहेगा।
₹2,500 करोड़ जुटाएगी Bharat Forge
भारत फोर्ज ने तिमाही नतीजों के साथ फंड जुटाने की भी बड़ी योजना बताई है। कंपनी के बोर्ड ने अधिकतम ₹2,500 करोड़ तक की रकम जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
कंपनी यह फंड इक्विटी शेयर, डेट इंस्ट्रूमेंट्स या इक्विटी में कन्वर्ट हो सकने वाली सिक्योरिटीज जारी करके जुटा सकती है। इसके लिए पब्लिक ऑफर, राइट्स इश्यू, अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स (ADR), ग्लोबल डिपॉजिटरी रिसीट्स (GDR), फॉरेन करेंसी कनवर्टिबल बॉन्ड (FCCB), क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP), प्रिफरेंशियल इश्यू या अन्य अनुमत तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
हालांकि, इस फंड जुटाने की योजना को आगे बढ़ाने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी और जरूरी रेगुलेटरी अप्रूवल लेना अभी बाकी है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
भारत फोर्ज के जून तिमाही के नतीजों को देखें तो कंपनी के कारोबार में रेवेन्यू और EBITDA के स्तर पर वृद्धि हुई है, लेकिन बढ़ते खर्च और EBITDA मार्जिन में गिरावट चिंता का विषय है। सबसे अहम बात यह है कि कंपनी एक साल पहले के मुनाफे से इस तिमाही में घाटे में पहुंच गई है।
वहीं, ₹2,500 करोड़ की फंड जुटाने की योजना कंपनी के भविष्य के विस्तार और पूंजी जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, इससे कंपनी की पूंजी संरचना और मौजूदा शेयरधारकों पर संभावित प्रभाव को लेकर भी बाजार की नजर रहेगी।
इसलिए निवेशकों को केवल एक दिन की शेयर कीमत की चाल देखकर फैसला लेने के बजाय कंपनी के आगामी तिमाहियों में मार्जिन, ऑर्डर बुक, कैश फ्लो, खर्च और फंड जुटाने की प्रक्रिया पर नजर रखनी चाहिए।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी स्टॉक में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें और अपनी रिस्क प्रोफाइल के अनुसार ही निवेश का फैसला करें। NewsJagran किसी भी व्यक्ति को किसी शेयर में निवेश करने की सलाह नहीं देता है।


