Income Tax Refund: अगर ITR फाइल करने के बाद भी आपके बैंक खाते में इनकम टैक्स रिफंड नहीं आया है, तो इसकी वजह सिर्फ प्रोसेसिंग में देरी नहीं हो सकती। बैंक अकाउंट की जानकारी में गलती, ITR में किसी तरह की गड़बड़ी, TDS और AIS में अंतर या रिटर्न के अतिरिक्त वेरिफिकेशन में जाने जैसी वजहों से भी रिफंड अटक सकता है। अगर आपने अपना ITR दाखिल कर दिया है और रिफंड का इंतजार कर रहे हैं, तो सबसे पहले रिटर्न का स्टेटस और बैंक अकाउंट की जानकारी जरूर जांच लें।
इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने के बाद रिफंड तभी जारी होता है, जब विभाग आपके रिटर्न को प्रोसेस कर लेता है और आपके द्वारा क्लेम किए गए रिफंड की पुष्टि हो जाती है। इसलिए केवल ITR फाइल हो जाना इस बात की गारंटी नहीं है कि रिफंड तुरंत बैंक खाते में आ जाएगा।
1. ITR अभी प्रोसेस नहीं हुआ है
रिफंड नहीं मिलने की सबसे सामान्य वजह यह हो सकती है कि आपका ITR अभी तक प्रोसेस नहीं हुआ है। रिटर्न दाखिल करने और उसे ई-वेरिफाई करने के बाद इनकम टैक्स विभाग उसकी प्रोसेसिंग करता है।
अगर इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर आपके रिटर्न के सामने ‘Return Under Processing’ दिखाई दे रहा है, तो इसका मतलब है कि विभाग की तरफ से रिटर्न की प्रोसेसिंग अभी पूरी नहीं हुई है। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक रिफंड जारी नहीं किया जाता।
ऐसे में टैक्सपेयर को बार-बार रिफंड क्लेम करने की जरूरत नहीं होती। सबसे पहले पोर्टल पर रिटर्न का मौजूदा स्टेटस देखना चाहिए और किसी तरह का नोटिस या कम्युनिकेशन आया है या नहीं, यह भी जांचना चाहिए।
2. बैंक अकाउंट में हो सकती है समस्या
इनकम टैक्स रिफंड आमतौर पर आपके बैंक अकाउंट में इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भेजा जाता है। इसलिए बैंक खाते से जुड़ी जानकारी सही होना बहुत जरूरी है।
अगर बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेट नहीं है, बैंक डिटेल गलत है या खाते से जुड़ी किसी जानकारी में समस्या है, तो रिफंड क्रेडिट होने में परेशानी आ सकती है।
कई बार टैक्सपेयर ITR दाखिल करते समय पुराने बैंक अकाउंट की जानकारी दे देते हैं, जबकि बाद में वह अकाउंट बंद हो चुका होता है। ऐसी स्थिति में भी रिफंड प्रभावित हो सकता है।
इसलिए ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर यह जरूर देखें कि आपके बैंक अकाउंट की डिटेल सही है और संबंधित अकाउंट रिफंड पाने के लिए वैलिड है।
3. ITR में दी गई जानकारी में गलती
ITR दाखिल करते समय आय, TDS, बैंक अकाउंट, ब्याज से हुई कमाई या अन्य वित्तीय जानकारी में गलती होने पर भी रिफंड की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
उदाहरण के लिए, अगर आपने अपनी आय या TDS की जानकारी गलत दर्ज कर दी है और आपके रिटर्न में दावा किया गया रिफंड विभाग के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता, तो विभाग अतिरिक्त जांच कर सकता है।
ऐसे मामले में टैक्सपेयर को अपने ITR की जानकारी दोबारा जांचनी चाहिए। यदि कानून और लागू समयसीमा के अनुसार जरूरी हो, तो गलती सुधारने के लिए Revised Return दाखिल करने का विकल्प भी देखा जा सकता है।
हालांकि, रिटर्न संशोधित करने से पहले यह समझना जरूरी है कि गलती वास्तव में कहां है और उसे सुधारने के लिए कौन-सा विकल्प लागू होता है।
4. TDS और AIS या Form 26AS में अंतर
रिफंड में देरी की एक अहम वजह आपके ITR में दर्ज TDS और इनकम टैक्स विभाग के रिकॉर्ड में उपलब्ध जानकारी के बीच अंतर भी हो सकता है।
ITR दाखिल करते समय टैक्सपेयर को अपने Form 26AS और Annual Information Statement (AIS) की जानकारी जरूर देखनी चाहिए। अगर नियोक्ता, बैंक या किसी अन्य संस्था की ओर से रिपोर्ट की गई TDS जानकारी और ITR में दर्ज आंकड़े अलग हैं, तो विभाग को रिटर्न की जांच करने की जरूरत पड़ सकती है।
ऐसी स्थिति में टैक्सपेयर को पहले यह पता करना चाहिए कि अंतर किस वजह से है। कई बार TDS सर्टिफिकेट और विभाग के रिकॉर्ड में अपडेट होने के बीच भी अंतर दिखाई दे सकता है।
इसलिए रिफंड का इंतजार कर रहे टैक्सपेयर्स के लिए AIS और Form 26AS की जांच करना एक महत्वपूर्ण कदम है।
5. ITR अतिरिक्त जांच या वेरिफिकेशन के लिए चुना गया है
हर रिटर्न की प्रक्रिया एक जैसी नहीं होती। कुछ मामलों में विभाग को रिटर्न में दी गई जानकारी को लेकर अतिरिक्त जांच या वेरिफिकेशन की जरूरत पड़ सकती है।
अगर आपका ITR किसी तरह की जांच या अतिरिक्त सत्यापन के लिए चुना गया है, तो रिफंड जारी होने में सामान्य से अधिक समय लग सकता है। ऐसी स्थिति में टैक्सपेयर को ई-फाइलिंग पोर्टल पर आने वाले नोटिस, सूचना या किसी अन्य कम्युनिकेशन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अगर विभाग की तरफ से कोई नोटिस आया है, तो उसका जवाब समय पर देना जरूरी है। जवाब देने में देरी होने पर आपकी रिफंड प्रक्रिया और प्रभावित हो सकती है।
Income Tax Refund का स्टेटस कैसे चेक करें?
अगर रिफंड अभी तक बैंक खाते में नहीं आया है, तो सबसे पहले ऑनलाइन इसका स्टेटस चेक करें। इसके लिए इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करना होगा।
इसके बाद सामान्य तौर पर ये स्टेप्स फॉलो किए जा सकते हैं:
- इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करें।
- e-File मेन्यू में जाएं।
- Income Tax Returns विकल्प चुनें।
- View Filed Returns पर क्लिक करें।
- जिस Assessment Year का रिटर्न देखना है, उसे चुनें।
- संबंधित ITR का मौजूदा स्टेटस चेक करें।
अगर रिफंड जारी किया जा चुका है, तो पोर्टल पर रिफंड से जुड़ी जानकारी भी दिखाई दे सकती है। इससे आपको यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि रिफंड जारी हुआ है, प्रोसेसिंग में है या किसी वजह से अटका हुआ है।
रिफंड में देरी हो तो क्या करें?
सबसे पहले घबराने के बजाय अपने ITR का स्टेटस चेक करें। इसके बाद बैंक अकाउंट, PAN से जुड़ी जानकारी, AIS, Form 26AS और ITR में दर्ज TDS की जानकारी को क्रॉस-चेक करें।
अगर पोर्टल पर किसी तरह का नोटिस या कार्रवाई लंबित दिखाई दे रही है, तो उसे ध्यान से पढ़ें और निर्धारित समयसीमा के भीतर जरूरी जवाब या कार्रवाई करें।
अगर रिटर्न में कोई गलती दिखाई देती है, तो उसे सुधारने के लिए उपलब्ध कानूनी विकल्पों की जांच करें। बड़ी टैक्स राशि या जटिल मामले में किसी योग्य टैक्स प्रोफेशनल की मदद लेना बेहतर हो सकता है।
ध्यान रखें
ITR फाइल करने के बाद रिफंड आने में लगने वाला समय हर टैक्सपेयर के लिए एक जैसा नहीं होता। इसलिए केवल कुछ दिन बीत जाने को रिफंड अटकने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। सही स्थिति जानने का सबसे भरोसेमंद तरीका ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपने रिटर्न और रिफंड का स्टेटस चेक करना है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। टैक्स से जुड़े नियम और आपकी व्यक्तिगत स्थिति के आधार पर प्रक्रिया अलग हो सकती है। किसी भी टैक्स या अन्य वित्तीय फैसले से पहले संबंधित विशेषज्ञ या योग्य टैक्स प्रोफेशनल से सलाह जरूर लें। NewsJagran किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।


