Maruti Suzuki Small Cars: भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में पिछले कुछ वर्षों से SUV यानी स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल की मांग लगातार बढ़ी है। बड़ी कारों और SUV की लोकप्रियता बढ़ने के कारण छोटी हैचबैक कारों की बिक्री और बाजार हिस्सेदारी पर दबाव देखने को मिला। हालांकि, अब आने वाले वर्षों में यह ट्रेंड बदल सकता है। मारुति सुजुकी के चेयरमैन आरसी भार्गव ने छोटी कारों को लेकर ऐसा अनुमान जताया है, जिससे ऑटो सेक्टर में नई चर्चा शुरू हो गई है।
आरसी भार्गव का मानना है कि अगले पांच वर्षों में छोटी कारों की ग्रोथ पिछले पांच वर्षों की तुलना में तेज हो सकती है। यानी जिस सेगमेंट को लंबे समय से SUV के बढ़ते दबदबे के कारण कमजोर माना जा रहा था, उसमें दोबारा मांग लौटने की संभावना बन रही है। मारुति सुजुकी ने भी बदलते बाजार को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है।
कंपनी एक तरफ छोटी कारों की संभावित वापसी पर नजर रख रही है, वहीं दूसरी तरफ SUV पोर्टफोलियो को भी तेजी से विस्तार देने की तैयारी कर रही है। अगले 5 से 6 वर्षों में कंपनी 7 नई SUV पेश करने की योजना पर काम कर रही है। इसके अलावा वैकल्पिक ईंधन के क्षेत्र में भी मारुति सुजुकी ने बड़ा कदम उठाया है और शुरुआती चरण में बायोगैस प्लांट लगाने के लिए 561 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी गई है।
अगले 5 साल में छोटी कारों की ग्रोथ तेज होने का अनुमान
मारुति सुजुकी की सालाना इंटीग्रेटेड रिपोर्ट में चेयरमैन आरसी भार्गव ने भारतीय कार बाजार और छोटी कारों की मांग को लेकर अपना अनुमान साझा किया है। उनके मुताबिक अगले पांच साल छोटी कारों के लिए पिछले पांच साल से बेहतर साबित हो सकते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय ग्राहकों की पसंद में बड़ा बदलाव आया है। खासकर शहरी और अर्ध-शहरी बाजारों में ग्राहक पहले की तुलना में ज्यादा फीचर्स, बेहतर रोड प्रेजेंस और ऊंची ड्राइविंग पोजिशन वाली कारों को प्राथमिकता देने लगे हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा SUV सेगमेंट को मिला है।
इस बदलाव का असर छोटी हैचबैक कारों पर पड़ा। एंट्री-लेवल और छोटी कारों की हिस्सेदारी कम हुई और कई ग्राहकों ने थोड़े ज्यादा बजट में कॉम्पैक्ट SUV या बड़ी कार खरीदना पसंद किया।
लेकिन अब स्थिति में बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। आरसी भार्गव के अनुमान के मुताबिक, छोटी कारों की मांग आने वाले वर्षों में फिर से बढ़ सकती है।
FY2030-31 तक 61-63 लाख यूनिट तक पहुंच सकता है पैसेंजर व्हीकल बाजार
मारुति सुजुकी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2030-31 तक भारत का पैसेंजर व्हीकल बाजार करीब 61 लाख से 63 लाख यूनिट तक पहुंच सकता है। यदि बाजार इस स्तर तक पहुंचता है, तो आने वाले वर्षों में वाहन कंपनियों के लिए बड़ी ग्रोथ की संभावनाएं पैदा होंगी।
भारत दुनिया के प्रमुख ऑटोमोबाइल बाजारों में शामिल है और यहां पहली बार कार खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या अभी भी काफी बड़ी है। ऐसे में कार बाजार के विस्तार के साथ एंट्री-लेवल और छोटी कारों की मांग में भी सुधार की संभावना बनी हुई है।
छोटी कारों की बिक्री पर कीमत, फ्यूल एफिशिएंसी, मेंटेनेंस लागत और परिवार के आकार जैसे कई फैक्टर का असर पड़ता है। यदि कारों की कीमतें ग्राहकों की पहुंच में रहती हैं और फाइनेंसिंग की सुविधा बेहतर होती है, तो इस सेगमेंट को दोबारा फायदा मिल सकता है।
GST सुधारों से ऑटो सेक्टर को सपोर्ट की उम्मीद
आरसी भार्गव ने हालिया GST सुधारों को भी ऑटो इंडस्ट्री के लिए सकारात्मक बताया है। टैक्स से जुड़े बदलावों का असर वाहनों की अंतिम कीमत और ग्राहकों की खरीद क्षमता पर पड़ सकता है।
छोटी कारों का सेगमेंट खास तौर पर कीमत को लेकर संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में टैक्स और लागत में किसी तरह की राहत मिलने पर इसका सीधा फायदा ग्राहकों की खरीदारी की क्षमता पर पड़ सकता है।
यही वजह है कि मारुति सुजुकी आने वाले वर्षों में छोटी कारों की मांग को लेकर ज्यादा सकारात्मक नजर आ रही है। कंपनी अब अगले पांच वर्षों के बाजार विस्तार और ग्राहकों की बदलती पसंद को ध्यान में रखते हुए अपनी उत्पादन और मॉडल रणनीति तैयार कर रही है।
छोटी कारों के साथ SUV पर भी बड़ा दांव
मारुति सुजुकी सिर्फ छोटी कारों की संभावित वापसी पर निर्भर नहीं रहना चाहती। कंपनी SUV सेगमेंट में भी आक्रामक विस्तार की तैयारी कर रही है।
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO हिसाशी ताकेउची के मुताबिक अगले 5 से 6 वर्षों में 7 नई SUV पेश की जाएंगी। इससे साफ है कि कंपनी भारतीय ग्राहकों की बदलती पसंद के अनुरूप अपने पोर्टफोलियो में दोनों तरह के विकल्प बनाए रखना चाहती है।
एक तरफ छोटी और किफायती कारों की मांग बढ़ने की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ SUV सेगमेंट पहले से ही मजबूत बना हुआ है। ऐसे में मारुति सुजुकी दोनों बाजारों को एक साथ साधने की कोशिश कर रही है।
नई SUV आने से कंपनी को उन ग्राहकों को आकर्षित करने में मदद मिल सकती है जो ज्यादा स्पेस, बेहतर ग्राउंड क्लीयरेंस और SUV जैसी डिजाइन वाली कार खरीदना चाहते हैं।
मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में 5 लाख यूनिट का इजाफा
बढ़ती मांग और नए मॉडल लॉन्च को देखते हुए मारुति सुजुकी ने अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया है। वित्त वर्ष 2026-27 में कंपनी ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में करीब 5 लाख यूनिट का इजाफा किया है।
उत्पादन क्षमता बढ़ाने का मकसद सिर्फ मौजूदा मांग को पूरा करना नहीं है, बल्कि भविष्य में बाजार के विस्तार के लिए कंपनी को तैयार रखना भी है।
यदि आने वाले वर्षों में छोटी कारों और SUV दोनों की बिक्री बढ़ती है, तो अतिरिक्त उत्पादन क्षमता मारुति सुजुकी के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे कंपनी नए मॉडल की मांग को तेजी से पूरा करने की स्थिति में आ सकती है।
बिक्री में भी बनाया रिकॉर्ड
मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2025-26 में बिक्री के मामले में भी नया रिकॉर्ड बनाया। कंपनी ने इस दौरान कुल 24.22 लाख वाहन बेचे।
कंपनी का एक्सपोर्ट भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा और वित्त वर्ष के दौरान करीब 4.47 लाख वाहनों का निर्यात किया गया। खास बात यह है कि कंपनी ने लगातार तीसरे साल 20 लाख से ज्यादा वाहनों की बिक्री का आंकड़ा पार किया।
यह प्रदर्शन बताता है कि घरेलू बाजार में SUV और दूसरी कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के बावजूद मारुति सुजुकी का कुल कारोबार मजबूत बना हुआ है।
अब कंपनी की अगली चुनौती बदलते ग्राहक व्यवहार के बीच अपनी बाजार हिस्सेदारी को बनाए रखना और नए सेगमेंट में ग्रोथ हासिल करना है।
बायोगैस प्लांट पर 561 करोड़ रुपये का निवेश
मारुति सुजुकी का फोकस सिर्फ पेट्रोल, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित नहीं है। कंपनी वैकल्पिक ईंधन के क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
कंपनी के बोर्ड ने शुरुआती चरण में 4 बायोगैस प्लांट लगाने के लिए 561 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है।
आरसी भार्गव के अनुसार कंपनी पहले बायोगैस के उत्पादन, इसकी प्रक्रिया और संबंधित तकनीक को बेहतर तरीके से समझना चाहती है। इसके बाद जरूरत और संभावनाओं के आधार पर इस कारोबार में बड़े स्तर पर निवेश किया जा सकता है।
बायोगैस को लेकर कंपनी का मानना है कि यह भविष्य में कम-उत्सर्जन वाले ईंधन के विकल्प के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बायोगैस से CNG और ऊर्जा क्षेत्र को मिल सकता है फायदा
बायोगैस या कंप्रेस्ड बायोगैस यानी CBG का इस्तेमाल परिवहन क्षेत्र में किया जा सकता है। इससे पारंपरिक CNG पर दबाव कम करने और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा बायोगैस उत्पादन के लिए कृषि और जैविक कचरे का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे कचरा प्रबंधन और ऊर्जा उत्पादन, दोनों क्षेत्रों में फायदा मिलने की संभावना है।
मारुति सुजुकी के लिए यह निवेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी लंबे समय से CNG वाहनों पर मजबूत फोकस रखती आई है। यदि भविष्य में CBG का उत्पादन और वितरण बड़े स्तर पर होता है, तो कंपनी के वैकल्पिक ईंधन वाले कारोबार को इससे फायदा मिल सकता है।
गोबरधन योजना को 23,731 करोड़ रुपये की मंजूरी
केंद्र सरकार ने 6 अगस्त को गोबरधन योजना के लिए 23,731 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी है। योजना के तहत कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादकों के लिए भरोसेमंद बाजार तैयार करने और खरीद की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार की योजना देश में CBG उत्पादन को बढ़ावा देने की है। इसके लिए CNG और घरेलू PNG में CBG के इस्तेमाल का लक्ष्य भी तय किया गया है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए यह लक्ष्य 3 फीसदी, 2027-28 के लिए 4 फीसदी और वित्त वर्ष 2028-29 से 5 फीसदी रखा गया है।
यदि CBG का उत्पादन और इस्तेमाल बढ़ता है, तो इससे वैकल्पिक ईंधन के क्षेत्र में नई मांग पैदा हो सकती है। ऐसे में मारुति सुजुकी का शुरुआती स्तर पर बायोगैस प्लांट में निवेश करना कंपनी की लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।
क्या छोटी कारों का दौर फिर लौटेगा?
भारतीय ऑटो बाजार में छोटी कारों का महत्व अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि SUV की बिक्री ने पिछले कुछ वर्षों में बाजार का संतुलन जरूर बदला है। पहली बार कार खरीदने वाले ग्राहक, कम बजट वाले परिवार और ऐसे ग्राहक जो कम रनिंग कॉस्ट चाहते हैं, उनके लिए छोटी कारें अब भी एक महत्वपूर्ण विकल्प हैं।
आने वाले वर्षों में यदि कारों की कीमत, ब्याज दर, फाइनेंसिंग सुविधा और ईंधन लागत जैसे फैक्टर ग्राहकों के पक्ष में रहते हैं, तो छोटी कारों की मांग में दोबारा तेजी आ सकती है।
मारुति सुजुकी की रणनीति को देखें तो कंपनी एक ही सेगमेंट पर निर्भर रहने के बजाय बाजार के दोनों प्रमुख ट्रेंड को पकड़ने की कोशिश कर रही है। छोटी कारों की संभावित वापसी के लिए कंपनी तैयार रहना चाहती है, जबकि SUV की मौजूदा मजबूत मांग को देखते हुए नए मॉडल भी लॉन्च किए जाएंगे।
निष्कर्ष
मारुति सुजुकी के चेयरमैन आरसी भार्गव का छोटी कारों को लेकर अनुमान भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है। पिछले कुछ वर्षों में SUV की लोकप्रियता के कारण छोटी कारों का बाजार दबाव में रहा है, लेकिन अगले पांच वर्षों में तस्वीर बदलने की संभावना जताई जा रही है।
कंपनी ने एक तरफ छोटी कारों की संभावित मांग को देखते हुए भविष्य की रणनीति तैयार की है, वहीं 7 नई SUV लाने की योजना के जरिए तेजी से बढ़ते SUV बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने की तैयारी भी की है। इसके साथ ही 561 करोड़ रुपये का शुरुआती बायोगैस निवेश मारुति की वैकल्पिक ईंधन रणनीति को भी दिखाता है।
अगर छोटी कारों की मांग वास्तव में अगले पांच वर्षों में तेज होती है और SUV बाजार भी मजबूत बना रहता है, तो मारुति सुजुकी के लिए दोनों सेगमेंट में एक साथ ग्रोथ हासिल करने का बड़ा अवसर बन सकता है।


