नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर दुनिया भर में यह चिंता लगातार बढ़ रही है कि ऑटोमेशन और स्मार्ट टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल से बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां खत्म हो सकती हैं। हालांकि, भारत को लेकर सामने आई नोमुरा की एक ग्लोबल रिपोर्ट इस धारणा की तस्वीर कुछ अलग दिखाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में AI के कारण जितनी नौकरियां खत्म या प्रभावित हुई हैं, उनसे कहीं अधिक नई नौकरियां पैदा हुई हैं।
नोमुरा के विश्लेषण के अनुसार, भारत में AI की वजह से हर एक नौकरी जाने के बदले करीब 2.6 नई नौकरियां पैदा हुई हैं। यह आंकड़ा बताता है कि फिलहाल AI का भारतीय रोजगार बाजार पर केवल नकारात्मक असर नहीं पड़ रहा है, बल्कि टेक्नोलॉजी से जुड़े नए काम और भूमिकाएं भी तेजी से सामने आ रही हैं।
AI से गई 31,921 नौकरियां, 83,100 नई भर्तियां

नोमुरा के अर्थशास्त्रियों सोनल वर्मा और सी यिंग तोह ने एशिया में AI के रोजगार पर प्रभाव को समझने के लिए 69 रोजगार मामलों का अध्ययन किया। रिपोर्ट में भारत के आंकड़े खास तौर पर उल्लेखनीय हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, भारत में AI के कारण करीब 31,921 नौकरियां खत्म हुईं या प्रभावित हुईं, जबकि इसी अवधि में AI से जुड़ी करीब 83,100 नई नियुक्तियां दर्ज की गईं।
इन दोनों आंकड़ों की तुलना करने पर पता चलता है कि प्रत्येक एक प्रभावित नौकरी के मुकाबले लगभग 2.6 नई नौकरियां पैदा हुईं। यानी AI केवल मौजूदा नौकरियों को बदलने वाली तकनीक नहीं है, बल्कि इससे नए प्रकार के रोजगार की मांग भी पैदा हो रही है।
हालांकि, इन आंकड़ों को यह मानने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए कि AI से हर कर्मचारी को सीधे नई नौकरी मिल जाएगी। AI से पैदा होने वाली नौकरियों के लिए अक्सर अलग तरह के तकनीकी कौशल, प्रशिक्षण और अनुभव की आवश्यकता होती है।
भारत को AI का ‘ग्राउंड जीरो’ क्यों बताया गया?
नोमुरा की रिपोर्ट में भारत को AI के प्रभाव का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह देश की विशाल वर्कफोर्स और टेक्नोलॉजी सर्विसेज तथा बिजनेस-प्रोसेस आउटसोर्सिंग यानी BPO सेक्टर पर भारत की मजबूत निर्भरता है।
भारत लंबे समय से कस्टमर सपोर्ट, सॉफ्टवेयर टेस्टिंग, डेटा प्रोसेसिंग और दूसरे बैक-ऑफिस कार्यों के लिए वैश्विक कंपनियों का बड़ा केंद्र रहा है। इनमें से कई काम ऐसे हैं जिन्हें AI और ऑटोमेशन तेजी से बदल सकते हैं।
लेकिन इसी बदलाव के साथ AI इंजीनियरिंग, डेटा, मशीन लर्निंग, AI सिस्टम मैनेजमेंट और दूसरी तकनीकी भूमिकाओं की मांग भी बढ़ रही है। यही वजह है कि एक तरफ कुछ पारंपरिक भूमिकाओं पर दबाव बन रहा है, तो दूसरी तरफ नई नौकरियों के रास्ते खुल रहे हैं।
एक नौकरी जाने पर सीधे दूसरी नौकरी नहीं मिलेगी
AI के रोजगार प्रभाव को समझते समय एक महत्वपूर्ण अंतर को समझना जरूरी है। किसी सपोर्ट कर्मचारी की नौकरी AI के कारण खत्म होती है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि वही कर्मचारी तुरंत AI इंजीनियर की नौकरी कर लेगा।
नोमुरा के विश्लेषण में भी इसी चुनौती की ओर संकेत किया गया है। AI से पैदा होने वाली कई नौकरियों के लिए नई तकनीकी जानकारी, विशेष प्रशिक्षण, डिग्री या व्यावहारिक अनुभव की जरूरत हो सकती है।
इसलिए भारत के लिए असली चुनौती केवल नई नौकरियां पैदा करना नहीं है, बल्कि मौजूदा कर्मचारियों को उन नई भूमिकाओं के लिए तैयार करना भी है।
नए ग्रेजुएट्स के सामने बढ़ सकती है चुनौती
रिपोर्ट AI के कारण लेबर मार्केट में एक संभावित दो-स्तरीय स्थिति की ओर भी इशारा करती है। कंपनियां ऐसे कर्मचारियों को प्राथमिकता दे सकती हैं जिनके पास पहले से अनुभव के साथ AI और डिजिटल तकनीक की समझ हो।
इसका असर एंट्री-लेवल नौकरियों पर पड़ सकता है। पहले जिन कामों को सीखने के लिए नए ग्रेजुएट्स को कंपनियों में शुरुआती अवसर मिल जाते थे, उनमें से कुछ काम अब AI टूल्स के जरिए अधिक तेजी से किए जा सकते हैं।
भारत के लिए यह महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि हर साल बड़ी संख्या में युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार बाजार में प्रवेश करते हैं। अगर कंपनियां कम शुरुआती कर्मचारियों के साथ अधिक काम करने लगती हैं, तो युवाओं को नौकरी हासिल करने के लिए केवल सामान्य डिग्री पर निर्भर रहने के बजाय AI और डिजिटल स्किल्स भी सीखनी पड़ सकती हैं।
टेक्नोलॉजी सेक्टर में सबसे ज्यादा नई नौकरियां
नोमुरा के एशिया संबंधी आंकड़ों से पता चलता है कि AI से जुड़ी नई नियुक्तियों का बड़ा हिस्सा टेक्नोलॉजी सेक्टर में आया है। रिपोर्ट में पूरे एशिया में 1,30,758 AI-संबंधित नियुक्तियां दर्ज की गईं, जबकि करीब 60,654 नौकरियां खत्म या प्रभावित हुईं।
रिपोर्ट के मुताबिक, नई नियुक्तियों में 90 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी टेक्नोलॉजी सेक्टर की रही। दूसरी तरफ, नौकरी जाने के मामलों में फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर का हिस्सा काफी बड़ा रहा और छंटनी का करीब 60 फीसदी हिस्सा इसी क्षेत्र में देखा गया।
यह अंतर बताता है कि AI का प्रभाव हर उद्योग पर एक जैसा नहीं है। कुछ सेक्टरों में AI नई नौकरियों की मांग पैदा कर रहा है, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह मौजूदा कामों को ऑटोमेट कर रहा है।
AI से भारत में रोजगार का भविष्य कैसा होगा?
भारत के लिए AI का प्रभाव आने वाले वर्षों में दोहरा हो सकता है। एक तरफ ऑटोमेशन के कारण कुछ पारंपरिक और दोहराए जाने वाले काम कम हो सकते हैं। दूसरी तरफ AI को विकसित करने, लागू करने और नियंत्रित करने के लिए नई भूमिकाएं पैदा होंगी।
AI मॉडल विकसित करने वाले इंजीनियर, डेटा विशेषज्ञ, साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स, AI सिस्टम मैनेजर, क्लाउड विशेषज्ञ और AI से जुड़े बिजनेस रोल्स की मांग बढ़ सकती है।
इस बदलाव में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका स्किलिंग और री-स्किलिंग की होगी। जिन कर्मचारियों को नई तकनीक के साथ काम करना आता होगा, उनके लिए AI रोजगार के अवसर बढ़ा सकता है। वहीं केवल ऐसे कामों पर निर्भर रहने वाले कर्मचारियों पर दबाव अधिक हो सकता है जिन्हें AI आसानी से ऑटोमेट कर सकता है।
निष्कर्ष
नोमुरा की रिपोर्ट भारत में AI और रोजगार के बीच बन रहे नए समीकरण की ओर इशारा करती है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, भारत में AI से प्रभावित करीब 31,921 नौकरियों के मुकाबले 83,100 नई नियुक्तियां हुईं। यानी एक नौकरी के बदले 2.6 नई नौकरियों का अनुपात सामने आया।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि AI से नौकरी जाने का खतरा खत्म हो गया है। असली बदलाव नौकरियों की प्रकृति में हो रहा है। भविष्य में उन कर्मचारियों की मांग अधिक हो सकती है जो AI के साथ काम करना जानते हैं और बदलती तकनीक के अनुसार अपने कौशल को अपडेट करते रहते हैं।
इस लिहाज से भारत के लिए AI केवल रोजगार का खतरा नहीं, बल्कि एक बड़ा अवसर भी बन सकता है—बशर्ते देश की वर्कफोर्स को नई तकनीकी भूमिकाओं के लिए समय रहते तैयार किया जाए।


