Vedanta Demerger: अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाले वेदांता समूह की आयरन एंड स्टील कारोबार से जुड़ी कंपनी पर टैक्स विभाग की कार्रवाई सामने आई है। कंपनी की सहायक कंपनी ESL स्टील लिमिटेड को रांची CGST विभाग से ₹51.23 करोड़ से अधिक का टैक्स नोटिस मिला है। यह मामला वित्त वर्ष 2020-21 से 2022-23 के दौरान आयातित वस्तुओं पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के कथित तौर पर अधिक लाभ लेने और उसके इस्तेमाल से जुड़ा है।
Vedanta की कंपनी को ₹51 करोड़ से ज्यादा का नोटिस
वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड (VISL) की सहायक कंपनी ESL स्टील लिमिटेड को केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) और केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्त कार्यालय, रांची की ओर से नोटिस मिला है।
कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि उसे 7 अगस्त 2026 को GST विभाग से Form GST DRC-01A प्राप्त हुआ। इस नोटिस में वित्त वर्ष 2020-21 से 2022-23 के दौरान आयातित वस्तुओं से जुड़े इनपुट टैक्स क्रेडिट के कथित अधिक लाभ और उसके इस्तेमाल पर सवाल उठाया गया है।
विभाग की ओर से इस मामले में कुल ₹51,23,19,275 की मांग की गई है। यानी टैक्स नोटिस की रकम करीब ₹51.23 करोड़ है।
क्या है पूरा मामला?
टैक्स विभाग का आरोप है कि ESL स्टील ने संबंधित अवधि में आयातित वस्तुओं पर उपलब्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट का निर्धारित नियमों से अधिक लाभ लिया और उसका इस्तेमाल किया।
GST व्यवस्था में Input Tax Credit (ITC) कारोबारियों को पात्र खरीद पर चुकाए गए टैक्स का क्रेडिट लेने की सुविधा देता है। हालांकि, इस क्रेडिट का लाभ लेने और इस्तेमाल करने के लिए GST कानून के तहत कई शर्तों का पालन करना होता है।
इसी व्यवस्था से जुड़े कथित उल्लंघन को लेकर विभाग ने ESL स्टील के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। हालांकि, केवल टैक्स नोटिस जारी होना यह साबित नहीं करता कि कंपनी पर अंतिम रूप से टैक्स देनदारी तय हो गई है। कंपनी को अपना पक्ष रखने और उपलब्ध कानूनी उपायों का इस्तेमाल करने का अधिकार है।
कंपनी ने क्या कहा?
वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड ने स्टॉक एक्सचेंज को बताया है कि कंपनी इस नोटिस का अध्ययन कर रही है। प्रबंधन निर्धारित समयसीमा के भीतर लागू कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करेगा।
कंपनी ने यह भी कहा है कि वह मामले में कानूनी उपाय (Legal Remedy) तलाश रही है। इसके साथ ही कंपनी के अनुसार, इस नोटिस का उसके वित्तीय या परिचालन प्रदर्शन पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।
इसका मतलब है कि फिलहाल कंपनी की ओर से इस टैक्स मांग को स्वीकार करने के बजाय मामले को कानूनी और नियामकीय प्रक्रिया के तहत चुनौती देने की तैयारी की जा रही है।
Vedanta Demerger के बाद अलग हुई आयरन-स्टील कंपनी
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब वेदांता समूह अपने बड़े कॉर्पोरेट पुनर्गठन के दौर से गुजर चुका है।
वेदांता लिमिटेड के डिमर्जर के तहत समूह के अलग-अलग कारोबारों को स्वतंत्र कंपनियों में विभाजित करने की योजना बनाई गई। आयरन और स्टील कारोबार के लिए Vedanta Iron and Steel Limited (VISL) को अलग इकाई के तौर पर सामने लाया गया।
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 1 मई 2026 रिकॉर्ड डेट के बाद आयरन और स्टील कारोबार से जुड़ी नई कंपनी के शेयर 15 जून 2026 को BSE और NSE पर लिस्ट हुए।
इस डिमर्जर का उद्देश्य वेदांता समूह के अलग-अलग कारोबारों को स्वतंत्र कंपनियों के रूप में संचालित करना और प्रत्येक कारोबार के लिए अलग पूंजी एवं रणनीतिक ढांचा तैयार करना है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
₹51.23 करोड़ का टैक्स नोटिस रकम के लिहाज से महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन कंपनी ने फिलहाल इसके अपने वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन पर किसी महत्वपूर्ण असर की संभावना से इनकार किया है।
इसके अलावा, यह मामला अभी टैक्स विभाग की नोटिस और कंपनी की प्रतिक्रिया के स्तर पर है। अंतिम देनदारी, यदि कोई बनती है, वह आगे की कानूनी और नियामकीय प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
इसलिए निवेशकों के लिए इस मामले में कंपनी के आगामी एक्सचेंज फाइलिंग, टैक्स विभाग की कार्रवाई और अदालत अथवा संबंधित प्राधिकरण के फैसले पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
टैक्स नोटिस की मुख्य जानकारी
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| कंपनी | ESL Steel Limited |
| मूल कंपनी | Vedanta Iron and Steel Limited |
| नोटिस की तारीख | 7 अगस्त 2026 |
| विभाग | CGST एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्त कार्यालय, रांची |
| नोटिस | Form GST DRC-01A |
| संबंधित वित्त वर्ष | 2020-21 से 2022-23 |
| मामला | आयातित वस्तुओं से जुड़े ITC का कथित अधिक लाभ/उपयोग |
| टैक्स मांग | ₹51,23,19,275 |
| कुल रकम | करीब ₹51.23 करोड़ |
| कंपनी का रुख | कानूनी उपाय तलाशेगी |
आगे क्या होगा?
अब ESL स्टील को टैक्स विभाग की ओर से उठाए गए सवालों पर अपना पक्ष रखना होगा। कंपनी उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर नोटिस का जवाब दे सकती है और जरूरत पड़ने पर संबंधित कानूनी मंच पर चुनौती भी दे सकती है।
इस मामले में आगे होने वाली कार्रवाई से ही यह स्पष्ट होगा कि टैक्स विभाग की पूरी मांग बरकरार रहती है या कंपनी की दलीलों के बाद इसमें कोई बदलाव होता है।
फिलहाल कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में स्पष्ट किया है कि उसे इस मामले से अपने कारोबार या वित्तीय स्थिति पर किसी महत्वपूर्ण प्रभाव की उम्मीद नहीं है।
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