PM Kisan Yojana: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे किसानों के लिए धान की MSP को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। सरकार ने संसद में दिए गए लिखित जवाब में मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए धान और जूट की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से जुड़ी जानकारी साझा की है। सरकार के मुताबिक, 2026-27 मार्केटिंग सीजन के लिए धान (कॉमन) की MSP 2,441 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है, जबकि ग्रेड-ए धान के लिए MSP 2,461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है।
यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब देशभर के किसान पीएम किसान योजना की 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अभी 24वीं किस्त जारी करने की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है।
HighLights
- धान (कॉमन) की MSP 2026-27 के लिए 2,441 रुपये प्रति क्विंटल तय।
- ग्रेड-ए धान की MSP 2,461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित।
- सरकार ने संसद में MSP और सरकारी खरीद की प्रक्रिया की जानकारी दी।
- MSP तय करते समय उत्पादन लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत मार्जिन का सिद्धांत लागू है।
- PM Kisan की 24वीं किस्त की तारीख पर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
संसद में सरकार ने MSP पर क्या बताया?
धान और जूट की MSP तथा किसानों से खरीद को लेकर संसद में सरकार से सवाल पूछा गया था। एनसीपी सांसद अबू ताहिर खान ने सरकार से धान और जूट के लिए चालू मार्केटिंग सीजन में निर्धारित MSP के अलावा पश्चिम बंगाल में समय पर खरीद और किसानों को सीधे भुगतान सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी थी।
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री राम नाथ ठाकुर ने इन सवालों का लिखित जवाब दिया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार हर साल संबंधित राज्य सरकारों और केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों से विचार-विमर्श करने के बाद कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर 22 अनिवार्य कृषि फसलों के लिए MSP तय करती है।
इन फसलों में धान और जूट समेत खरीफ, रबी तथा अन्य वाणिज्यिक फसलें शामिल हैं।
2026-27 में धान की MSP कितनी है?
मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए सरकार ने धान की MSP इस प्रकार तय की है:
| धान की किस्म | MSP |
|---|---|
| धान (कॉमन) | ₹2,441 प्रति क्विंटल |
| ग्रेड-ए धान | ₹2,461 प्रति क्विंटल |
इसका मतलब है कि सामान्य श्रेणी के धान की सरकारी MSP 2,441 रुपये प्रति क्विंटल है। वहीं बेहतर गुणवत्ता वाली ग्रेड-ए श्रेणी के धान के लिए किसानों को 20 रुपये अधिक यानी 2,461 रुपये प्रति क्विंटल की MSP निर्धारित की गई है।
MSP तय करने में उत्पादन लागत का क्या रोल है?
सरकार ने अपने जवाब में MSP तय करने की नीति को भी स्पष्ट किया। सरकार के अनुसार, 2018-19 के केंद्रीय बजट में यह सिद्धांत घोषित किया गया था कि MSP को किसानों की उत्पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुना स्तर पर रखा जाएगा।
इसी नीति के तहत 2018-19 से सभी अनिवार्य खरीफ, रबी और अन्य वाणिज्यिक फसलों के लिए MSP तय करते समय अखिल भारतीय औसत उत्पादन लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत का मार्जिन जोड़ा गया है।
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को उनकी फसल के लिए बेहतर मूल्य उपलब्ध कराना और खेती से होने वाली आय को समर्थन देना है।
सरकार धान की खरीद कैसे करती है?
MSP घोषित होने के बाद हर किसान की पूरी उपज सरकारी एजेंसियां खरीदें, ऐसा जरूरी नहीं है। सरकार के अनुसार, कुल उत्पादन में से बाजार में बेचने योग्य अतिरिक्त उपज ही सरकारी खरीद के लिए उपलब्ध होती है।
जब बाजार में कृषि उत्पादों की कीमत MSP से नीचे चली जाती है, तब किसानों को मूल्य समर्थन देने के लिए सरकार निर्धारित एजेंसियों के माध्यम से खरीद करती है।
धान और अन्य अनाजों की खरीद में भारतीय खाद्य निगम (FCI) और संबंधित राज्य सरकारों की निर्धारित एजेंसियों की भूमिका होती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को बाजार में MSP से कम कीमत मिलने की स्थिति में सहायता देना है।
दाल और तिलहन की खरीद PM-AASHA के तहत
सरकार ने संसद में बताया कि दालों, तिलहन और खोपरा की खरीद प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के तहत मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत की जाती है।
यह खरीद संबंधित राज्य सरकार के अनुरोध और निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार की जाती है। जब बाजार कीमत MSP से नीचे आती है, तब योजना के तहत किसानों को मूल्य समर्थन देने के लिए खरीद की जाती है।
इस खरीद व्यवस्था में NAFED और NCCF जैसी केंद्रीय सहकारी एजेंसियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कपास और जूट की खरीद भी MSP पर
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कपास और जूट की खरीद के लिए अलग-अलग एजेंसियां निर्धारित हैं। कपास की खरीद कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) और जूट की खरीद जूट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (JCI) के माध्यम से MSP पर की जाती है।
सरकार के अनुसार, MSP में बढ़ोतरी से देशभर के किसानों को लाभ मिला है। इसमें पश्चिम बंगाल के किसान भी शामिल हैं। सरकार ने खरीद के आंकड़ों और किसानों को किए गए MSP भुगतान को इसका आधार बताया है।
PM Kisan की 24वीं किस्त कब आएगी?
अब किसानों की नजर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त पर है। हालांकि, अभी तक केंद्र सरकार ने 24वीं किस्त जारी करने की आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की है।
PM Kisan के तहत पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि तीन बराबर किस्तों में किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है।
24वीं किस्त की तारीख को लेकर फिलहाल अलग-अलग अनुमान लगाए जा रहे हैं। उम्मीद है कि अगली किस्त अक्टूबर 2026 के आसपास जारी की जा सकती है, लेकिन आधिकारिक घोषणा होने तक इसे निश्चित तारीख नहीं माना जा सकता।
इसलिए किसानों को सलाह है कि वे किस्त की तारीख के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और PM Kisan के आधिकारिक अपडेट पर ही भरोसा करें।
किसानों के लिए MSP और PM Kisan दोनों क्यों महत्वपूर्ण हैं?
MSP और PM Kisan किसानों के लिए अलग-अलग तरह की सरकारी सहायता हैं। MSP फसल की बिक्री के समय किसानों को मूल्य समर्थन देने की व्यवस्था है, जबकि PM Kisan के तहत पात्र किसानों को सीधे आर्थिक सहायता दी जाती है।
धान की 2026-27 सीजन के लिए 2,441 रुपये प्रति क्विंटल MSP तय होने से धान उत्पादक किसानों के लिए फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। दूसरी ओर, PM Kisan की 24वीं किस्त को लेकर किसानों को अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।
नोट: PM Kisan की 24वीं किस्त की तारीख से जुड़ी किसी भी जानकारी को आधिकारिक घोषणा के बाद ही अंतिम माना जाना चाहिए।


