नई दिल्ली: देश के प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) में दाखिला लाखों छात्रों का सपना होता है। लेकिन एक IIM छात्र ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि MBA की पढ़ाई उसके लिए उम्मीद से कहीं ज्यादा कठिन साबित हो रही है। आर्ट्स बैकग्राउंड से आने वाले इस छात्र ने कहा कि एडवांस्ड मैथ्स और स्टैटिस्टिक्स समझने में उसे भारी परेशानी हो रही है, जिससे उसका आत्मविश्वास लगातार गिरता जा रहा है।
Reddit पर बयां किया अपना दर्द
I am struggling at IIM academically
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MBAIndia MBAIndia सबरेडिट पर साझा की गई पोस्ट में छात्र ने लिखा कि वह IIM के MBA प्रोग्राम को बीच में छोड़ने तक के बारे में सोच रहा है। उसके मुताबिक, उसका अकादमिक बैकग्राउंड आर्ट्स का रहा है और गणित या सांख्यिकी उसके लिए हमेशा से चुनौतीपूर्ण विषय रहे हैं।
छात्र ने लिखा कि क्लास में पढ़ाए जा रहे एडवांस्ड स्टैटिस्टिक्स कॉन्सेप्ट्स को समझना उसके लिए बेहद मुश्किल हो गया है। इतना ही नहीं, कई अन्य विषयों में भी उसे लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है।
“मेरा बैकग्राउंड आर्ट्स का है। मैं गणित या स्टैटिस्टिक्स में कभी अच्छा नहीं रहा। यहां एडवांस्ड स्टैटिस्टिक्स पढ़ाई जा रही है और मुझे इसे समझने में बहुत दिक्कत हो रही है। दूसरे विषय भी मुश्किल लग रहे हैं। इससे मेरा कॉन्फिडेंस टूट रहा है और एंग्जायटी बढ़ गई है। मुझे लगता है कि मैं कुछ भी ठीक से सीख नहीं पा रहा हूं।”
TISS में HRM करने का बना रहा है मन
छात्र ने बताया कि वह अब IIM छोड़कर टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) में Human Resource Management (HRM) में मास्टर्स करने पर विचार कर रहा है। उसका मानना है कि HRM उसके करियर लक्ष्यों के अधिक करीब है और वहां क्वांटिटेटिव विषयों पर अपेक्षाकृत कम जोर दिया जाता है।
उसने लिखा,
“मैं यहां से जाने और शायद TISS में HRM के लिए फिर से आवेदन करने के बारे में सोच रहा हूं। वहां मैथ्स कम है और मैं भविष्य में HR प्रोफेशन में जाना चाहता हूं। सच कहूं तो मुझे यहां पढ़ाई जारी रखने का मन नहीं है।”
माता-पिता का साथ, लेकिन समाज के सवालों की चिंता
छात्र ने बताया कि उसके माता-पिता उसके हर फैसले में साथ देने को तैयार हैं, लेकिन उसे इस बात का डर है कि IIM जैसा प्रतिष्ठित संस्थान छोड़ने पर रिश्तेदार और समाज सवाल उठाएंगे।
उसने कहा कि इससे उसके माता-पिता को भी लोगों के सवालों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, अब कोर्स छोड़ने पर ट्यूशन फीस का रिफंड भी नहीं मिलेगा, जिससे आर्थिक नुकसान भी होगा।
Reddit यूजर्स ने दी जल्दबाजी न करने की सलाह
इस पोस्ट पर कई Reddit यूजर्स ने छात्र को भावनाओं में बहकर फैसला न लेने की सलाह दी। कई लोगों ने बताया कि IIM में रिलेटिव ग्रेडिंग सिस्टम लागू होता है, इसलिए शुरुआती कठिनाइयों का मतलब यह नहीं कि छात्र आगे सफल नहीं हो सकता।
एक यूजर, जो खुद नॉन-इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से थे, ने लिखा,
“IIMs में रिलेटिव ग्रेडिंग होती है और हर विषय में कई मूल्यांकन घटक होते हैं। नॉन-इंजीनियरिंग बैकग्राउंड होने के बावजूद घबराने की जरूरत नहीं है। समय के साथ चीजें आसान हो जाती हैं। अभी ड्रॉपआउट होने का फैसला मत लीजिए।”
कई अन्य यूजर्स ने भी सुझाव दिया कि शुरुआती सेमेस्टर में लगभग सभी छात्रों को पढ़ाई कठिन लगती है। उन्होंने छात्र को सीनियर्स, फैकल्टी और स्टडी ग्रुप्स की मदद लेने तथा खुद को थोड़ा समय देने की सलाह दी।
MBA में नॉन-इंजीनियरिंग छात्रों के सामने क्यों आती है चुनौती?
IIM और अन्य शीर्ष बिजनेस स्कूलों में MBA के दौरान छात्रों को फाइनेंस, बिजनेस एनालिटिक्स, स्टैटिस्टिक्स, ऑपरेशंस रिसर्च और डेटा आधारित विषय पढ़ाए जाते हैं। ऐसे में जिन छात्रों का बैकग्राउंड आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज या अन्य नॉन-क्वांटिटेटिव क्षेत्रों से होता है, उन्हें शुरुआती महीनों में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित अभ्यास, फैकल्टी की मदद और समूह में पढ़ाई करने से इस अंतर को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।


