नई दिल्ली: आर्बिट्रेज म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशकों ने सोमवार को अपने पोर्टफोलियो की नेट एसेट वैल्यू (NAV) में असामान्य तेजी देखी। औसतन 0.46% की एक दिन की बढ़ोतरी ने कई निवेशकों को हैरान कर दिया, क्योंकि आमतौर पर आर्बिट्रेज फंड सालभर में लगभग 6-7% का रिटर्न देते हैं और दैनिक बढ़त बेहद सीमित रहती है। इस अचानक उछाल की सबसे बड़ी वजह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा F&O शेयरों के लिए शुरू किया गया नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (Closing Auction Session – CAS) माना जा रहा है।
हालांकि, फंड मैनेजर्स ने स्पष्ट किया है कि इसे स्थायी मुनाफा मानना बड़ी भूल हो सकती है। उनके अनुसार यह बढ़त मुख्य रूप से वैल्यूएशन इफेक्ट का परिणाम है और बाजार के सामान्य होते ही इसमें गिरावट भी आ सकती है।
क्यों बढ़ गया आर्बिट्रेज फंड्स का NAV?
आर्बिट्रेज फंड्स कैश मार्केट और फ्यूचर्स मार्केट के बीच मौजूद छोटे-छोटे प्राइस गैप का फायदा उठाकर रिटर्न कमाते हैं। नई व्यवस्था लागू होने के पहले ही दिन CAS के कारण दोनों बाजारों के बीच कीमतों में असामान्य अंतर देखने को मिला, जिसका सीधा असर फंड्स के दैनिक NAV पर दिखाई दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह वास्तविक कमाई नहीं बल्कि मार्क-टू-मार्केट वैल्यूएशन का असर है।
CAS सिस्टम से क्या बदला?
NSE ने F&O शेयरों के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन शुरू किया है ताकि बाजार के क्लोजिंग प्राइस अधिक पारदर्शी और बेहतर तरीके से तय हो सकें।
लेकिन शुरुआती चरण में इस सिस्टम ने आर्बिट्रेज फंड्स के लिए नई चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं।
DSP म्यूचुअल फंड के फंड मैनेजर कैवल्य नडकर्णी के अनुसार,
- कैश मार्केट दोपहर 3:15 बजे बंद हो जाता है।
- जबकि इक्विटी डेरिवेटिव मार्केट 3:40 बजे तक खुला रहता है।
- ऐसे में दोनों बाजारों में एक साथ हेजिंग करना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गया है।
इसी वजह से शुरुआती दिनों में NAV में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
निवेशकों को क्यों दी गई चेतावनी?
फंड मैनेजर्स ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे केवल एक दिन की तेज बढ़त देखकर आर्बिट्रेज फंड्स में ट्रेडिंग शुरू न करें।
विशेषज्ञों के अनुसार—
- सोमवार की बढ़त स्थायी नहीं है।
- कैश और फ्यूचर्स बाजार की कीमतें सामान्य होने पर यह लाभ कम हो सकता है।
- अल्पकालिक NAV मूवमेंट को वास्तविक रिटर्न नहीं माना जाना चाहिए।
अब कितना समय रखें निवेश?
Edelweiss Mutual Fund के प्रेसिडेंट भावेश जैन का कहना है कि आर्बिट्रेज रणनीति का वास्तविक लाभ एक्सपायरी के समय मिलता है। बीच-बीच में NAV में उतार-चढ़ाव सामान्य बात है।
उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि अब आर्बिट्रेज फंड्स में निवेश की अवधि कम से कम 6 महीने रखनी चाहिए। पहले जहां 3 महीने का निवेश पर्याप्त माना जाता था, वहीं नए सिस्टम के बाद बढ़ी हुई वोलैटिलिटी को देखते हुए लंबी अवधि बेहतर मानी जा रही है।
अभी शुरुआती दौर में है नया सिस्टम
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार NSE का नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन अभी शुरुआती चरण में है। फिलहाल इसका योगदान कुल बाजार कारोबार का करीब 2.2% ही है। जैसे-जैसे बाजार इस नई व्यवस्था के अनुरूप ढलेगा, वैसे-वैसे कीमतों में असामान्य अंतर और NAV की वोलैटिलिटी भी कम होने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए क्या है सीख?
यदि आप आर्बिट्रेज फंड में निवेश करते हैं, तो केवल एक दिन के NAV में आई तेजी या गिरावट के आधार पर फैसला लेने से बचें। इस श्रेणी के फंड अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले माने जाते हैं, लेकिन इनमें मिलने वाला रिटर्न समय के साथ स्थिर रूप से बनता है। नए CAS सिस्टम की वजह से शुरुआती महीनों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, इसलिए निवेश का नजरिया मध्यम अवधि का रखना अधिक समझदारी होगी।
मुख्य बातें
- NSE के नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के पहले दिन आर्बिट्रेज फंड्स का NAV औसतन 0.46% बढ़ा।
- यह बढ़त मुख्य रूप से वैल्यूएशन इफेक्ट की वजह से आई है, स्थायी रिटर्न नहीं है।
- कैश और फ्यूचर्स बाजार के समय में अंतर के कारण हेजिंग करना चुनौतीपूर्ण हुआ है।
- एक्सपर्ट्स ने केवल NAV देखकर ट्रेडिंग से बचने की सलाह दी है।
- निवेश की अवधि कम से कम 6 महीने रखने की सलाह दी गई है।
- CAS सिस्टम अभी शुरुआती चरण में है और भविष्य में इसकी वोलैटिलिटी कम हो सकती है।


