भारत में जल्द ही प्लास्टिक (पॉलीमर) के नोटों की शुरुआत हो सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अगर पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो अगले वित्त वर्ष (Financial Year) की शुरुआत में देश में पहली बार प्लास्टिक के नोट चलन में आ सकते हैं।
सरकार ने RBI को 2 अरब (200 करोड़) पॉलीमर बैंक नोट छापने की मंजूरी दी है। इनमें 1 अरब ₹10 के नोट और 1 अरब ₹20 के नोट शामिल होंगे। हालांकि फिलहाल कागज के नोटों को पूरी तरह बंद करने की कोई योजना नहीं है। शुरुआती चरण में दोनों प्रकार के नोट एक साथ चलन में रहेंगे।
Highlights
- अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में लॉन्च हो सकते हैं प्लास्टिक के नोट
- RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दी महत्वपूर्ण जानकारी
- सरकार ने ट्रायल के लिए 2 अरब पॉलीमर नोट छापने की मंजूरी दी
- ₹10 और ₹20 के मूल्यवर्ग में होंगे पहले प्लास्टिक नोट
- फिलहाल कागजी नोटों को बंद करने की कोई योजना नहीं
अगले वित्त वर्ष में शुरू हो सकता है ट्रायल
नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पॉलीमर नोटों का प्रोजेक्ट फिलहाल पायलट स्टेज में है। इन नोटों की सफलता भारतीय मौसम, तापमान, नमी, उपयोग के तरीके और मौजूदा बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में इनके प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।
उन्होंने कहा कि यदि परीक्षण के नतीजे सकारात्मक रहते हैं तो अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में इन्हें आम लोगों के लिए जारी किया जा सकता है।
2 अरब पॉलीमर नोटों की होगी छपाई
सरकार ने RBI को कुल 2 अरब पॉलीमर बैंक नोट छापने की मंजूरी दी है।
इनमें शामिल होंगे—
- 1 अरब ₹10 के नोट
- 1 अरब ₹20 के नोट
इन नोटों का उपयोग पहले सीमित क्षेत्रों में किया जाएगा ताकि इनके प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जा सके।
क्यों ला रहा है RBI प्लास्टिक के नोट?
RBI के अनुसार पॉलीमर नोट लाने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं।
1. ज्यादा टिकाऊ
कम मूल्य वाले ₹10 और ₹20 के नोट सबसे अधिक इस्तेमाल होते हैं। कागज के नोट जल्दी फट जाते हैं और खराब हो जाते हैं, जबकि पॉलीमर नोट कई वर्षों तक सुरक्षित रहते हैं।
2. कम रखरखाव लागत
हालांकि पॉलीमर नोट बनाने की शुरुआती लागत अधिक होती है, लेकिन उनकी लंबी उम्र के कारण बार-बार नए नोट छापने की जरूरत कम पड़ती है। इससे कुल खर्च घट सकता है।
3. नकली नोटों पर रोक
पॉलीमर नोटों में एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स जोड़ना आसान होता है। इससे नकली नोट बनाना काफी कठिन हो जाता है।
4. पर्यावरण के लिए बेहतर
कम बार नोट बदलने की जरूरत पड़ने से संसाधनों की बचत होती है और कार्बन फुटप्रिंट भी कम होता है।
भारतीय परिस्थितियों में होगी पूरी टेस्टिंग
RBI गवर्नर ने कहा कि केवल तकनीक उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह देखा जाएगा कि पॉलीमर नोट—
- भारत की गर्मी और उमस में कैसे टिकते हैं।
- धूल और नमी में कितने प्रभावी रहते हैं।
- ATM मशीनों में सही तरीके से काम करते हैं या नहीं।
- बैंकिंग सिस्टम और कैश हैंडलिंग मशीनों के साथ पूरी तरह अनुकूल हैं या नहीं।
टेस्टिंग सफल रहने के बाद ही बड़े स्तर पर इन्हें जारी करने का फैसला लिया जाएगा।
BRBNMPL ने जारी किया ग्लोबल टेंडर
RBI की करेंसी प्रिंटिंग कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने हाल ही में पॉलीमर सब्सट्रेट शीट की खरीद के लिए वैश्विक टेंडर जारी किया है।
इन शीट्स में आधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल होंगे, जिससे नोट अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनेंगे।
भारत में क्यों महसूस हुई जरूरत?
पिछले कुछ वर्षों में भारत में बड़ी मात्रा में पुराने और खराब नोटों को चलन से बाहर करना पड़ा है।
मुख्य कारण—
- कम मूल्य वाले नोट जल्दी खराब हो जाते हैं।
- हर साल सिक्योरिटी फीचर्स पर हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं।
- नकली नोटों की चुनौती लगातार बनी रहती है।
- बार-बार नए नोट छापने से लागत बढ़ती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, वित्त वर्ष 2017 के बाद RBI द्वारा जारी किए गए प्रत्येक 100 नए नोटों के मुकाबले लगभग 71 खराब नोटों को वापस लेना पड़ा।
दुनिया के कई देशों में पहले से चल रहे हैं पॉलीमर नोट
भारत पहला देश नहीं होगा जो पॉलीमर नोट अपनाएगा।
कई देशों में पिछले कई दशकों से इनका सफल उपयोग हो रहा है।
- ब्रिटेन में £5 का पॉलीमर नोट औसतन लगभग 4.8 वर्ष तक चलता है।
- कनाडा में पॉलीमर नोट अपनाने के बाद बैंक नोटों की औसत उम्र लगभग चार गुना बढ़ गई।
- ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कई अन्य देशों में भी पॉलीमर करेंसी लंबे समय से उपयोग में है।
प्लास्टिक (पॉलीमर) नोटों के प्रमुख फायदे
| फायदा | विवरण |
|---|---|
| अधिक टिकाऊ | कागज के नोटों की तुलना में कई गुना लंबी उम्र |
| बेहतर सुरक्षा | नकली नोट बनाना बेहद कठिन |
| कम लागत | लंबे समय में छपाई और बदलने का खर्च कम |
| वाटरप्रूफ | पानी और नमी से कम नुकसान |
| साफ-सुथरे | गंदगी कम पकड़ते हैं |
| पर्यावरण हितैषी | कम कार्बन फुटप्रिंट और कम संसाधनों की जरूरत |
क्या अभी बंद हो जाएंगे कागज के नोट?
नहीं। RBI ने साफ किया है कि फिलहाल कागज के नोटों को पूरी तरह बंद करने की कोई योजना नहीं है। शुरुआती चरण में प्लास्टिक और कागजी दोनों प्रकार के नोट एक साथ चलन में रहेंगे। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।
निष्कर्ष
भारत की करेंसी प्रणाली में यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। यदि RBI का पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोट आम लोगों तक पहुंच सकते हैं। इससे नोटों की उम्र बढ़ेगी, नकली नोटों पर रोक लगेगी और लंबे समय में करेंसी प्रबंधन की लागत भी कम हो सकती है। हालांकि देशभर में इनका पूर्ण विस्तार परीक्षण के परिणामों पर निर्भर करेगा।


