Share Market Rally: बुधवार को भारतीय शेयर बाजार ने दिनभर भारी उतार-चढ़ाव देखने के बावजूद मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। सप्ताहिक एक्सपायरी से एक दिन पहले सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 600 अंकों से अधिक उछला, जबकि निफ्टी 24,600 के ऊपर पहुंच गया। हालांकि दिन के दौरान मुनाफावसूली और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण बाजार ने अपनी अधिकांश बढ़त गंवा दी, लेकिन अंतिम घंटे में हुई खरीदारी से दोनों प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बंद होने में सफल रहे। बाजार की मजबूती में ऑटो और PSU बैंकिंग सेक्टर का सबसे बड़ा योगदान रहा।
एक कारोबारी दिन पहले यानी 4 अगस्त को सेंसेक्स 210.08 अंक (0.27%) गिरकर 78,428.95 पर और निफ्टी 159.40 अंक (0.64%) टूटकर 24,614.90 पर बंद हुआ था। इसके मुकाबले बुधवार को बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की और दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद बढ़त के साथ क्लोजिंग दी।
दिनभर कैसी रही बाजार की चाल?
कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स 626 अंकों तक उछलकर 79,055.38 के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 24,677.60 तक चढ़ा। लेकिन बाद में मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों के चलते सेंसेक्स करीब 770 अंक फिसलकर 78,285.74 तक आ गया। इसी दौरान निफ्टी भी 24,500 के नीचे 24,497.95 तक लुढ़क गया।
हालांकि अंतिम घंटे में खरीदारी लौटने से बाजार ने रिकवरी दिखाई और अंत में सेंसेक्स 152.05 अंक यानी 0.19% की बढ़त के साथ 78,581.00 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50, 9.75 अंक यानी 0.04% की मामूली मजबूती के साथ 24,624.65 पर बंद हुआ।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी रही तेजी
बाजार की चौड़ाई (Market Breadth) भी सकारात्मक रही। बड़े शेयरों के अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी खरीदारी देखने को मिली।
- निफ्टी मिडकैप 100 में 0.18% की बढ़त दर्ज हुई।
- निफ्टी स्मॉलकैप 100 करीब 0.76% मजबूत होकर बंद हुआ।
इससे साफ संकेत मिला कि निवेशकों की रुचि केवल लार्जकैप तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार में भी खरीदारी देखने को मिली।
बाजार में तेजी की 5 बड़ी वजहें
1. अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद से बढ़ा भरोसा
अमेरिका के वित्त मंत्री के बयान के बाद यह उम्मीद मजबूत हुई कि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द समझौता हो सकता है। इससे मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की संभावना बढ़ी, जिसका सकारात्मक असर एशियाई बाजारों पर भी देखने को मिला।
2. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
होर्मुज जलडमरूमध्य के सामान्य संचालन की उम्मीद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए सस्ता कच्चा तेल महंगाई और चालू खाते के लिहाज से सकारात्मक माना जाता है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा।
3. FIIs की लगातार खरीदारी
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 4 अगस्त को लगातार छठे कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में निवेश जारी रखा।
- FIIs की नेट खरीदारी: ₹2,446.47 करोड़
लगातार विदेशी निवेश से बाजार को मजबूत आधार मिला।
4. ऑटो और PSU बैंकिंग सेक्टर बने बाजार के हीरो
आज की तेजी में सबसे बड़ा योगदान ऑटो और सरकारी बैंकिंग शेयरों का रहा।
- निफ्टी ऑटो में 1.5% से अधिक की तेजी दर्ज हुई।
- निफ्टी PSU बैंक आधे फीसदी से ज्यादा मजबूत हुआ।
ऑटो कंपनियों के जुलाई बिक्री आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे, जबकि RBI की मौद्रिक नीति के बाद सरकारी बैंकों में खरीदारी बढ़ी।
5. डॉलर इंडेक्स में नरमी
मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की उम्मीद से अमेरिकी डॉलर इंडेक्स छह सप्ताह के निचले स्तर के करीब 99.83 पर बना रहा। कमजोर डॉलर आमतौर पर उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है, जिससे भारतीय बाजार को भी समर्थन मिला।
RBI के फैसले का भी दिखा असर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। हालांकि केंद्रीय बैंक ने महंगाई के अनुमान में हल्की कटौती की, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। खासतौर पर बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में इसका सकारात्मक असर देखने को मिला।
आगे किन बातों पर रहेगी निवेशकों की नजर?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर इन प्रमुख कारकों पर रहेगी—
- अमेरिका-ईरान वार्ता में आगे की प्रगति
- कच्चे तेल की कीमतों का रुख
- विदेशी निवेशकों (FIIs) का निवेश पैटर्न
- वैश्विक बाजारों का प्रदर्शन
- कॉर्पोरेट कंपनियों के तिमाही नतीजे
यदि वैश्विक संकेत सकारात्मक बने रहते हैं और विदेशी निवेश जारी रहता है, तो बाजार में मजबूती का सिलसिला आगे भी देखने को मिल सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। NewsJagran किसी भी निवेश की सलाह नहीं देता।


