Viral Post: सोशल मीडिया पर एक कथित कर्मचारी मॉनिटरिंग एक्सेल शीट का स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि इस शीट के जरिए कर्मचारियों के काम के घंटे, कंप्यूटर गतिविधि, कीबोर्ड इस्तेमाल और माउस जिगलर जैसे टूल्स की निगरानी की जा रही थी। हालांकि, इस स्क्रीनशॉट की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
वर्कप्लेस प्राइवेसी और कर्मचारी निगरानी को लेकर सोशल मीडिया पर एक नई बहस शुरू हो गई है। वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों की हर डिजिटल गतिविधि पर नजर रखने के लिए एडवांस मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर रही हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ एक्सेल शीट का स्क्रीनशॉट
Someone posted on reddit on how his/her company tracking them 💀💀💀💀 pic.twitter.com/gCWRD9znHL
— Lohith (@lolhith07) August 4, 2026 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक यूजर द्वारा शेयर किया गया स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल हो रहा है। पोस्ट में दावा किया गया कि यह किसी कंपनी का इंटरनल डैशबोर्ड है, जिसमें कर्मचारियों की रोजाना की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जा रहा है।
यूजर lolhith07 ने स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा कि किसी व्यक्ति ने रेडिट पर बताया कि उसकी कंपनी इस तरह कर्मचारियों की निगरानी कर रही है। हालांकि, वायरल स्क्रीनशॉट और उसमें किए गए दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इसके बावजूद इस पोस्ट ने कर्मचारियों की प्राइवेसी, ऑफिस मॉनिटरिंग और कंपनियों की निगरानी नीतियों को लेकर इंटरनेट पर चर्चा तेज कर दी है।
“June 2026” नाम की एक्सेल शीट में क्या दिखा?
वायरल स्क्रीनशॉट में “June 2026” नाम की एक एक्सेल शीट दिखाई दे रही है। इसमें कथित तौर पर कर्मचारियों की गतिविधियों को कई अलग-अलग मापदंडों के आधार पर दर्ज किया गया है।
शीट में कई तरह के कॉलम दिखाई देने का दावा किया गया है, जिनमें शामिल हैं:
- प्रोडक्टिव घंटे
- सिस्टम से दूर रहने का समय
- लंबे समय तक कीबोर्ड गतिविधि
- माउस मूवमेंट रिकॉर्ड
- माउस जिगलर डिटेक्शन
- MS Teams कॉल गतिविधि
दावे के मुताबिक, इन आंकड़ों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही थी कि कर्मचारी कंप्यूटर पर कितना सक्रिय रहा और उसने काम के दौरान किन गतिविधियों को अंजाम दिया।
कर्मचारियों के काम के घंटे भी किए गए रिकॉर्ड?
वायरल पोस्ट के अनुसार, एक्सेल शीट में कुछ दिनों की प्रोडक्टिविटी रिपोर्ट भी दिखाई गई थी। इसमें 10 जून को 7.93 घंटे, 11 जून को 7.01 घंटे और 12 जून को 7.32 घंटे की एक्टिविटी दर्ज होने का दावा किया गया।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ये आंकड़े किस कंपनी के हैं और क्या वास्तव में किसी आधिकारिक सिस्टम से लिए गए हैं।
रेडिट यूजर ने उठाए सवाल
रेडिट पर पोस्ट शेयर करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि ऐसे डैशबोर्ड कर्मचारियों के वास्तविक काम को सही तरीके से नहीं माप सकते।
उसका कहना था कि कई बार कर्मचारी किसी समस्या को हल करने, रणनीति बनाने या किसी बड़े प्रोजेक्ट की योजना तैयार करने में काफी समय सोचने में लगाते हैं। लेकिन मॉनिटरिंग सिस्टम इसे “निष्क्रिय समय” मान सकता है।
उसने कहा कि केवल कीबोर्ड और माउस गतिविधि के आधार पर किसी कर्मचारी की क्षमता या मेहनत का मूल्यांकन करना सही तरीका नहीं है।
क्या कंपनियां इतनी निगरानी कर सकती हैं?
कई कंपनियां आजकल रिमोट वर्क और हाइब्रिड वर्क कल्चर के चलते कर्मचारी मॉनिटरिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करती हैं। इन टूल्स के जरिए आमतौर पर सिस्टम लॉगिन, एप्लिकेशन इस्तेमाल और कार्य गतिविधि जैसी जानकारी जुटाई जा सकती है।
कुछ एडवांस मॉनिटरिंग सिस्टम में स्क्रीन रिकॉर्डिंग, वेबसाइट विजिट, इस्तेमाल किए गए एप्लिकेशन और नेटवर्क गतिविधि जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होती हैं।
हालांकि, ऐसी निगरानी को लेकर दुनियाभर में प्राइवेसी और कर्मचारी अधिकारों से जुड़े सवाल उठते रहे हैं।
माउस जिगलर को लेकर भी हुई चर्चा
वायरल पोस्ट में “माउस जिगलर” का जिक्र भी किया गया है। माउस जिगलर एक ऐसा टूल होता है जो कंप्यूटर में हलचल दिखाने के लिए माउस की गतिविधि को कृत्रिम रूप से बनाए रखता है।
कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि अगर कोई कर्मचारी माउस जिगलर का इस्तेमाल करता है तो कंपनियां इसे कैसे पहचान रही हैं।
वहीं कुछ लोगों ने बताया कि कुछ क्षेत्रों में कर्मचारी माउस जिगलर का इस्तेमाल इसलिए करते हैं ताकि लंबे समय तक काम करते हुए सिस्टम अपने आप लॉक न हो जाए।
सोशल मीडिया यूजर्स ने जताई नाराजगी
इस वायरल पोस्ट पर कई लोगों ने कंपनियों की निगरानी नीतियों की आलोचना की।
एक यूजर ने लिखा कि कई कंपनियां कर्मचारियों की गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए बड़ी रकम खर्च करती हैं, लेकिन कर्मचारियों की खुशी और बेहतर कार्य वातावरण बनाने पर उतना ध्यान नहीं देतीं।
कुछ अन्य यूजर्स ने कहा कि केवल कंप्यूटर एक्टिविटी से किसी कर्मचारी की मेहनत को नहीं मापा जा सकता, क्योंकि कई नौकरियों में सोचने, योजना बनाने और समस्या समाधान का समय भी काम का हिस्सा होता है।
क्या वायरल एक्सेल शीट असली है?
फिलहाल वायरल एक्सेल शीट की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यह भी साफ नहीं है कि यह किस कंपनी की शीट है या इसमें दर्ज आंकड़े वास्तविक हैं या नहीं।
फिर भी इस पोस्ट ने एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि आधुनिक कार्यस्थलों में कर्मचारियों की निगरानी की सीमा क्या होनी चाहिए और कंपनियों को प्रोडक्टिविटी मापने के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट और यूजर्स के दावों पर आधारित है। इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है। कंपनियों की निगरानी नीतियां अलग-अलग हो सकती हैं।


