US Iran Conflict: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही जल्द बहाल नहीं हुई, तो अमेरिका कड़ा सैन्य जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा। हालांकि ट्रंप ने यह भी दावा किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और समझौते की संभावना अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
ट्रंप ने दिया सख्त संदेश
फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद रहना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि व्यापारिक जहाजों की आवाजाही जल्द सामान्य नहीं हुई, तो ईरान को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों और वैश्विक व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जहाजों को रोका गया या उन पर हमला हुआ तो अमेरिकी सेना निर्णायक कार्रवाई करेगी।
बातचीत जारी, समझौते की उम्मीद भी बरकरार
कैलिफोर्निया दौरे के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उनके अनुसार पिछले पांच महीनों से जारी सैन्य और आर्थिक तनाव को समाप्त करने के लिए ईरान भी समाधान चाहता है।
ट्रंप ने कहा कि मौजूदा वार्ता दोनों देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यदि समझौता हो जाता है तो क्षेत्र में लंबे समय से चला आ रहा तनाव कम हो सकता है।
अमेरिकी वित्त मंत्री का बड़ा बयान
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भी संकेत दिए हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा पूरी तरह खोलने को लेकर समझौता करीब पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि बातचीत में प्रगति हो रही है और दोनों पक्ष समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि ट्रंप पहले ही साफ कर चुके हैं कि यह वार्ता ईरान के साथ चल रहे पांच महीने लंबे टकराव को खत्म करने का अंतिम अवसर है। यदि बातचीत असफल रहती है, तो खाड़ी क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ सकता है।
क्यों पूरी दुनिया की नजर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
विशेषज्ञों के अनुसार—
- दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल का परिवहन इसी जलमार्ग से होता है।
- बड़ी मात्रा में एलएनजी (Liquefied Natural Gas) की आपूर्ति भी इसी मार्ग से होती है।
- यहां किसी भी तरह की रुकावट से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है।
- कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर भारत समेत कई देशों में पेट्रोल-डीजल, गैस और महंगाई पर पड़ सकता है।
भारत पर क्या पड़ सकता है असर?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ता है या तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, परिवहन लागत और महंगाई पर देखने को मिल सकता है।
फिलहाल क्या है स्थिति?
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, लेकिन ट्रंप की कड़ी चेतावनी ने यह साफ कर दिया है कि यदि समुद्री व्यापार बाधित होता है तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेगा। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और दोनों देशों के बीच जारी वार्ता पर टिकी हुई है।


