Siddhivinayak Mandir Donation Scam: मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर में दान राशि की कथित हेराफेरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मंदिर ट्रस्ट के आठ ट्रस्टियों ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। ट्रस्टियों का दावा है कि दान-पात्रों से नकदी की कथित चोरी के कारण मंदिर को हर साल करीब 18 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ हो सकता है। मामले में अब तक 9 कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और सरकार ने दान की ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर के ट्रस्टियों ने 21 अप्रैल 2026 को महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर मंदिर के दान-पात्रों से कथित नकदी चोरी की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
ट्रस्टियों का कहना है कि जब कैश चोरी के आरोप में कुछ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया, उसके बाद मंदिर के दान-पात्रों में जमा होने वाली राशि में अचानक बड़ा इजाफा देखने को मिला। इससे आशंका जताई जा रही है कि लंबे समय से दान की रकम में गड़बड़ी की जा रही थी।
गिरफ्तारी के बाद दान में तीन गुना बढ़ोतरी
पत्र में दावा किया गया है कि गिरफ्तारियों से पहले मंदिर के दान-पात्रों से हर सप्ताह 50 लाख रुपये से भी कम नकदी निकलती थी।
लेकिन कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद लगातार तीन बुधवार तक दान की राशि बढ़कर करीब 1.5 करोड़ रुपये प्रति सप्ताह पहुंच गई।
ट्रस्टियों का कहना है कि यह अंतर इस बात की ओर इशारा करता है कि दान-पात्रों से गिनती से पहले ही बड़ी मात्रा में नकदी निकाली जा रही थी। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर मंदिर को सालाना करीब 18 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका जताई गई है।
वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग
ट्रस्टियों ने अपने पत्र में कहा है कि मामला केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं हो सकता। उन्होंने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पत्र पर जिन ट्रस्टियों के हस्ताक्षर हैं, उनमें शामिल हैं—
- अतुल लोधे
- भास्कर राउत
- महेश मुरलीधर
- जितेंद्र राउत
- मीना कांबले
- मंगला तुपे
- गोपाल दलवी
- सुदर्शन सांगले
ट्रस्टियों का कहना है कि पिछले डेढ़ साल में प्रशासनिक सुधारों के कारण मंदिर की आय में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, लेकिन अब सामने आए आरोपों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एकनाथ शिंदे से मुलाकात के बाद जांच के आदेश
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात के बाद सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन ने बताया कि पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि—
- मंदिर में आने वाली दान राशि का ऑडिट कराया जाएगा।
- कथित हेराफेरी की विस्तृत जांच होगी।
- दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
राज ठाकरे ने भी उठाया मुद्दा
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने भी इस मुद्दे को सार्वजनिक मंच से उठाया।
उन्होंने अपनी पार्टी की छात्र शाखा के कार्यक्रम में ट्रस्टियों के पत्र के अंश पढ़ते हुए आरोप लगाया कि सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल लगभग 18 करोड़ रुपये की दान राशि की कथित हेराफेरी हुई है।
राज ठाकरे ने यह भी दावा किया कि अयोध्या के राम मंदिर में भी कथित वित्तीय गड़बड़ी हुई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ मंदिरों में दान करते हैं, तब ऐसे आरोप लोगों के विश्वास को गहरा आघात पहुंचाते हैं।
अब तक 9 कर्मचारियों की गिरफ्तारी
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने पुष्टि की है कि इस मामले में अब तक 9 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि जहां आवश्यक था वहां पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और पुलिस दान राशि की कथित हेराफेरी से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। ट्रस्ट प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मामले के प्रमुख बिंदु
- मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में दान राशि की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया।
- ट्रस्टियों ने सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
- अनुमानित नुकसान 18 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष बताया गया।
- गिरफ्तारी के बाद साप्ताहिक दान 50 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ रुपये पहुंचा।
- वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच की भी मांग।
- डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने ऑडिट और जांच के आदेश दिए।
- अब तक 9 कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
- राज ठाकरे ने भी मामले को लेकर गंभीर सवाल उठाए।


