Success Story of Moringa Farming: बढ़ती खेती लागत, मौसम की मार और घटते मुनाफे के बीच महाराष्ट्र के एक किसान ने पारंपरिक अनार की खेती छोड़कर सहजन (ड्रमस्टिक) की व्यावसायिक खेती शुरू की। आज उनकी 18 एकड़ की खेती हर साल करीब 1.15 करोड़ रुपये का कारोबार करती है और 80 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा देती है। उनकी सफलता उन किसानों के लिए बड़ी प्रेरणा है जो खेती में कम लागत और अधिक मुनाफे वाले विकल्प तलाश रहे हैं।
खेती में बढ़ती चुनौतियों के बीच नई राह तलाश रहे किसान
भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में खेती पहले की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है। अनिश्चित मौसम, कीट एवं रोगों का बढ़ता प्रकोप, महंगे उर्वरक और कीटनाशक, मजदूरी की बढ़ती लागत और बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव ने किसानों की आय पर बड़ा असर डाला है।
ऐसे हालात में देश के कई किसान पारंपरिक फसलों की जगह ऐसी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं, जिनमें लागत कम हो, उत्पादन अच्छा मिले और बाजार में लगातार मांग बनी रहे। महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के किसान सागर येलपले इसी बदलाव की एक सफल मिसाल बनकर सामने आए हैं।
पीढ़ियों से करते थे अनार की खेती
सागर येलपले ने वर्ष 2012 में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद परिवार की खेती संभाली। उनके परिवार में कई पीढ़ियों से लगभग 10 एकड़ में अनार की खेती की जाती थी।
हालांकि समय के साथ अनार की खेती में कई समस्याएं बढ़ने लगीं।
- बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा था।
- कीटनाशकों और रसायनों पर भारी खर्च करना पड़ता था।
- फसल तैयार होने में लगभग छह महीने लगते थे।
- एक एकड़ से लगभग 3 लाख रुपये की आय होती थी, लेकिन आधी रकम खेती की लागत में चली जाती थी।
इन परिस्थितियों ने उन्हें किसी नए विकल्प की तलाश करने के लिए प्रेरित किया।
दोस्त की सलाह ने बदल दी किस्मत
साल 2017 में उनके एक दोस्त ने उन्हें व्यावसायिक सहजन (ड्रमस्टिक) की खेती करने की सलाह दी।
सागर ने बिना बड़ा जोखिम उठाए पहले केवल एक एकड़ में प्रयोग करने का फैसला किया।
उन्होंने लगभग 400 ग्राम बीज करीब 4,000 रुपये में खरीदे, खेत में गोबर की सड़ी खाद डाली और जनवरी 2017 में बुवाई कर दी।
सिर्फ पांच महीने बाद जून में पहली फसल तैयार हो गई।
पहली फसल से ही मिला शानदार मुनाफा
पहले ही सीजन में एक एकड़ से करीब 10 टन सहजन का उत्पादन हुआ।
उस समय बाजार में सहजन का भाव 25 से 30 रुपये प्रति किलो था।
इस तरह पहली ही फसल से उन्हें 3 लाख रुपये से अधिक की कमाई हुई।
यहीं से उन्हें भरोसा हो गया कि भविष्य सहजन की खेती में ही है।
धीरे-धीरे पूरी खेती बदल दी
सागर ने जल्दबाजी नहीं की। उन्होंने एक साथ पूरी अनार की खेती खत्म करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से सहजन के पौधे लगाने शुरू किए।
बाद में उन्होंने अतिरिक्त 8 एकड़ जमीन भी जोड़ी।
आज उनके पास कुल 18 एकड़ में लगभग 12,000 सहजन के पौधे हैं।
उनके खेत में मुख्य रूप से ODC-3 और ODC-4 किस्मों की खेती की जाती है, जिन्हें बेहतर उत्पादन के लिए जाना जाता है।
हर साल 200 टन तक होता है उत्पादन
शुरुआती वर्षों में एक पौधे से लगभग 25 किलो सहजन मिलता था।
लेकिन नियमित छंटाई, बेहतर पोषण और वैज्ञानिक तरीके अपनाने के बाद अब एक पौधा करीब 50 किलो तक उत्पादन देने लगा है।
पूरे फार्म से हर साल लगभग 180 से 200 टन सहजन की पैदावार होती है।
बायोगैस प्लांट से घटाई खेती की लागत
सागर ने खेती को और अधिक लाभदायक बनाने के लिए अपने खेत में बायोगैस प्लांट भी लगाया।
इस प्लांट से प्रतिदिन लगभग 200 से 300 लीटर स्लरी निकलती है, जिसे वे जैविक खाद के रूप में खेतों में उपयोग करते हैं।
इससे कई फायदे हुए—
- रासायनिक खाद की जरूरत कम हुई।
- मिट्टी की उर्वरता बेहतर हुई।
- खेती की लागत घटी।
- बायोगैस का उपयोग घर में खाना बनाने के लिए भी होने लगा।
हैदराबाद बना सबसे बड़ा बाजार
अच्छी खेती के साथ सागर ने मजबूत मार्केटिंग नेटवर्क भी तैयार किया।
आज उनकी अधिकांश उपज लगभग 400 किलोमीटर दूर हैदराबाद भेजी जाती है, जहां व्यापारी पूरी फसल खरीद लेते हैं।
पहले वे सहजन का निर्यात दुबई भी करते थे, लेकिन अब हैदराबाद से इतनी अधिक मांग मिलने लगी है कि पूरी उपज वहीं बिक जाती है।
मौसम बदलता है, लेकिन मुनाफा बना रहता है
सहजन की कीमत पूरे साल एक जैसी नहीं रहती।
- सर्दियों में कीमत करीब 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है।
- गर्मियों में यह लगभग 25 रुपये प्रति किलो रहती है।
इसके बावजूद पूरे वर्ष का औसत भाव करीब 50 रुपये प्रति किलो रहता है, जिससे खेती लगातार लाभ में रहती है।
बीज बेचकर भी हो रही लाखों की अतिरिक्त कमाई
सागर केवल सहजन की फसल ही नहीं बेचते, बल्कि उसकी गुणवत्तापूर्ण बीज भी किसानों को उपलब्ध कराते हैं।
वे लगभग 10,000 रुपये प्रति किलो की दर से बीज बेचते हैं।
इससे उन्हें हर साल करीब 15 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होती है।
1.15 करोड़ का कारोबार, 80 लाख तक शुद्ध मुनाफा
सहजन की बिक्री और बीज कारोबार को मिलाकर सागर येलपले का वार्षिक कारोबार अब करीब 1.15 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
इसमें से लगभग 80 लाख रुपये का शुद्ध लाभ होता है, जो उन्हें पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना बेहतर आय देता है।
दूसरे किसानों के लिए सागर की सलाह
सागर येलपले का मानना है कि किसी भी नई फसल को अपनाने से पहले पूरे खेत में बदलाव करने की बजाय छोटे स्तर पर प्रयोग करना चाहिए।
उनके अनुसार किसान को पहले इन बातों को समझना चाहिए—
- स्थानीय बाजार में मांग कितनी है।
- खरीदारों की उपलब्धता कैसी है।
- फसल की देखभाल का तरीका।
- उत्पादन लागत और संभावित मुनाफा।
इन सभी पहलुओं का आकलन करने के बाद ही बड़े स्तर पर निवेश करना समझदारी होगी।
सहजन की खेती क्यों बन रही है किसानों की पसंद?
सहजन की खेती तेजी से लोकप्रिय होने के पीछे कई कारण हैं—
- कम समय में फसल तैयार होती है।
- उत्पादन क्षमता अधिक होती है।
- बाजार में पूरे साल मांग बनी रहती है।
- फल, पत्तियां और बीज सभी की व्यावसायिक उपयोगिता है।
- निर्यात की भी अच्छी संभावनाएं हैं।
- उचित प्रबंधन के साथ कम लागत में बेहतर मुनाफा मिल सकता है।
निष्कर्ष
महाराष्ट्र के किसान सागर येलपले की सफलता यह साबित करती है कि खेती में सही फसल का चुनाव, आधुनिक तकनीक, लागत नियंत्रण और मजबूत बाजार व्यवस्था किसानों की आय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है। हालांकि, किसी भी नई फसल को अपनाने से पहले स्थानीय जलवायु, मिट्टी, बाजार और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर ही निर्णय लेना चाहिए। सही योजना के साथ सहजन जैसी व्यावसायिक फसल किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक प्रभावी विकल्प बन सकती है।


