Craft Village Bihar: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ विजन को आगे बढ़ाते हुए बिहार के मधुबनी जिले के जितवारपुर को देश का पहला ‘क्राफ्ट विलेज’ बनाया गया है। यहां मिथिला हैंडीक्राफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी का गठन किया गया है, जिसके जरिए हजारों शिल्पकारों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की तैयारी है।
बिहार के जितवारपुर से शुरू हुई नई पहल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ अभियान के तहत बिहार ने पारंपरिक हस्तशिल्प और सहकारिता को जोड़ने की दिशा में बड़ी पहल की है। मधुबनी जिले के जितवारपुर को केंद्र सरकार द्वारा देश का पहला ‘क्राफ्ट विलेज’ (Craft Village) घोषित किए जाने के बाद यहां औपचारिक रूप से कार्य शुरू हो गया है।
इस पहल का उद्देश्य मिथिला पेंटिंग और अन्य पारंपरिक हस्तशिल्प से जुड़े कलाकारों को संगठित कर उनकी आय बढ़ाना, उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देना है।
मिथिला हैंडीक्राफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी का गठन
बीते शुक्रवार को मिथिला हैंडीक्राफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी का गठन किया गया। यह समिति मिथिला कला और हस्तशिल्प से जुड़े हजारों कलाकारों को एक मंच पर लाकर उनके उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग और बिक्री सुनिश्चित करेगी।
मधुबनी स्थित मिथिला हस्तकला केंद्र में आयोजित पहली बैठक में बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव एवं कॉम्फेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक शीर्षत कपिल अशोक, मधुबनी के जिलाधिकारी आनंद शर्मा, पटना संग्रहालय, मिथिला चित्रकला संस्थान, पर्यटन विभाग और नाबार्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
इस अवसर पर पद्मश्री सम्मानित कलाकार दुलारी देवी और बाऊआ देवी भी मौजूद रहीं।
50 हजार से अधिक कलाकारों को मिलेगा लाभ
बैठक में शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि मधुबनी कला केवल बिहार की सांस्कृतिक पहचान नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक समृद्धि का भी मजबूत आधार बन सकती है।
उन्होंने बताया कि मधुबनी जिले में करीब 50,000 पंजीकृत आर्टिजन कार्डधारक हैं। इनमें कई कलाकार पद्मश्री सहित राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं।
नई सहकारी समिति के माध्यम से कलाकारों को—
- राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिलेगी।
- बेहतर विपणन (मार्केटिंग) की सुविधा उपलब्ध होगी।
- उचित मूल्य मिलने से आय में स्थायी वृद्धि होगी।
- निर्यात के नए अवसर तैयार होंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि सदस्यता के पहले चरण में ही करीब 200 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें कई पद्मश्री सम्मानित कलाकार भी शामिल हैं। इससे इस पहल के प्रति कलाकारों का भरोसा साफ दिखाई देता है।
केंद्र सरकार और NDDB ने सराहा कदम
कार्यक्रम को भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के सचिव आशीष भूटानी तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के अध्यक्ष मीनिश शाह ने रिकॉर्डेड संदेश के माध्यम से संबोधित किया।
दोनों अधिकारियों ने इसे सहकारिता आंदोलन के विस्तार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
वहीं नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने इस परियोजना के लिए आवश्यक वित्तीय सहयोग का भरोसा दिलाया।
‘सुधा मखाना खीर’ भी हुई लॉन्च
कार्यक्रम के दौरान मिथिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ ने ‘सुधा मखाना खीर’ नामक नया उत्पाद भी लॉन्च किया।
यह उत्पाद बिहार की विश्व प्रसिद्ध मखाना परंपरा और सुधा ब्रांड का अनूठा संगम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कृषि, डेयरी और फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने इसका स्वाद चखा और इसकी सराहना की।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई ताकत
विशेषज्ञों का मानना है कि जितवारपुर को देश का पहला क्राफ्ट विलेज बनाए जाने से न केवल मिथिला पेंटिंग और पारंपरिक हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय कलाकारों की आय बढ़ेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। सहकारिता मॉडल के जरिए छोटे शिल्पकारों को बड़े बाजारों से जोड़ने की यह पहल भविष्य में देश के अन्य हस्तशिल्प क्षेत्रों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।


