नई दिल्ली: अगर आप अपनी कार, टैक्सी, ऑटो या कमर्शियल वाहन में CNG भरवाते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। देश के अरबपति उद्योगपति गौतम अदाणी की कंपनी अदाणी टोटल गैस लिमिटेड (ATGL) ने 1 अगस्त 2026 से अपने सभी परिचालन क्षेत्रों में CNG की कीमत ₹4 प्रति किलोग्राम बढ़ा दी है। इस बढ़ोतरी के बाद गुजरात के अहमदाबाद में CNG की कीमत बढ़कर ₹94.02 प्रति किलोग्राम हो गई है।
कंपनी का कहना है कि घरेलू प्राकृतिक गैस की उपलब्धता घटने और वैश्विक बाजार में LNG की कीमतों में तेज उछाल के कारण गैस खरीदने की लागत काफी बढ़ गई है। ऐसे में कंपनी को कीमतों में बढ़ोतरी करने का फैसला लेना पड़ा।
Highlights
- अदाणी टोटल गैस ने CNG के दाम ₹4 प्रति किलो बढ़ाए
- अहमदाबाद में नई कीमत ₹94.02 प्रति किलोग्राम हुई
- घरेलू गैस की कमी और महंगी LNG बनी वजह
- अप्रैल 2026 के बाद पांचवीं बार बढ़े CNG के दाम
- सरकारी कंपनी गुजरात एनर्जी की तुलना में करीब ₹9 महंगी हुई CNG
अहमदाबाद में अब कितनी हुई CNG की कीमत?
नई दरों के लागू होने के बाद अहमदाबाद में CNG की कीमत ₹94.02 प्रति किलोग्राम (टैक्स सहित) हो गई है। इसका सीधा असर उन लाखों वाहन चालकों पर पड़ेगा जो रोजाना CNG का इस्तेमाल करते हैं।
विशेष रूप से इन लोगों का मासिक ईंधन खर्च बढ़ेगा—
- निजी कार मालिक
- ऑटो-रिक्शा चालक
- टैक्सी ऑपरेटर
- लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट कंपनियां
- कमर्शियल वाहन संचालक
सरकारी कंपनी अभी भी बेच रही सस्ती CNG
कीमत बढ़ने के बाद अदाणी टोटल गैस और गुजरात एनर्जी के बीच बड़ा अंतर दिखाई देने लगा है।
| कंपनी | CNG कीमत (₹/किलोग्राम) |
|---|---|
| अदाणी टोटल गैस | 94.02 |
| गुजरात एनर्जी | 85.01 |
यानी दोनों कंपनियों की कीमतों में अब करीब ₹9 प्रति किलोग्राम का अंतर हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतर बढ़ने से ग्रामीण और कीमत-संवेदनशील बाजारों में कुछ ग्राहक दूसरे सप्लायर की ओर रुख कर सकते हैं।
अप्रैल 2026 के बाद पांचवीं बार बढ़े दाम
अदाणी टोटल गैस ने अप्रैल 2026 के बाद अब तक पांच बार CNG की कीमतों में बढ़ोतरी की है।
इन बढ़ोतरी से पहले CNG की कीमत करीब ₹81.36 प्रति किलोग्राम थी। लगातार हो रही बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
आखिर क्यों महंगी हुई CNG?
कंपनी के मुताबिक गैस खरीदने की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं—
- घरेलू प्राकृतिक गैस की उपलब्धता में कमी
- गैस सप्लाई में कटौती
- मध्य पूर्व में बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव
- वैश्विक LNG कीमतों में तेज उछाल
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से LNG शिपमेंट प्रभावित होना
इन कारणों से कंपनियों की इनपुट कॉस्ट काफी बढ़ गई है, जिसका कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाया गया है।
LNG की कीमतों में कितना आया उछाल?
कंपनी के अनुसार पिछले छह महीनों में वैश्विक LNG बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
- फरवरी 2026 में LNG की कीमत 10-13 डॉलर प्रति MMBTU के बीच थी।
- मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के बाद यह बढ़कर 25 डॉलर प्रति MMBTU तक पहुंच गई।
- अप्रैल और जून में थोड़ी नरमी आई।
- जुलाई में फिर क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से कीमतें 19-22 डॉलर प्रति MMBTU तक पहुंच गईं।
यही कारण है कि गैस खरीदने की लागत पहले के मुकाबले काफी अधिक बनी हुई है।
भारत के लिए क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है।
भारत अपने LNG आयात का बड़ा हिस्सा कतर और UAE से खरीदता है। वर्ष 2025 में भारत के कुल LNG आयात में इन दोनों देशों की हिस्सेदारी करीब 59% रही थी।
ऐसे में इस समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर LNG की वैश्विक कीमतों और भारत की गैस लागत पर पड़ता है।
कंपनी का कारोबार लगातार बढ़ रहा
कीमतें बढ़ने के बावजूद अदाणी टोटल गैस की बिक्री में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है।
जून तिमाही के प्रमुख आंकड़े
- CNG बिक्री में 18% सालाना वृद्धि
- कुल CNG बिक्री 218 MMSCM
- कुल गैस बिक्री 303 MMSCM, जो 13% अधिक रही
- छह नए CNG स्टेशन शुरू किए गए
- देशभर में 1,167 CNG स्टेशन (जॉइंट वेंचर सहित)
कंपनी फिलहाल 18 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के 125 जिलों में फैले 53 भौगोलिक क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रही है।
वाहन चालकों पर कितना पड़ेगा असर?
यदि कोई वाहन चालक हर महीने लगभग 100 किलोग्राम CNG का उपयोग करता है, तो ₹4 प्रति किलो की बढ़ोतरी से उसका मासिक ईंधन खर्च करीब ₹400 तक बढ़ सकता है। वहीं टैक्सी, ऑटो और मालवाहक वाहनों का खर्च इससे भी अधिक बढ़ सकता है।
निष्कर्ष
अदाणी टोटल गैस द्वारा CNG की कीमतों में की गई नई बढ़ोतरी का असर लाखों उपभोक्ताओं और परिवहन क्षेत्र पर दिखाई देगा। हालांकि कंपनी का कहना है कि यह फैसला बढ़ती इनपुट लागत और महंगी LNG के कारण लिया गया है। यदि आने वाले महीनों में वैश्विक गैस बाजार में राहत नहीं मिलती, तो CNG की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।


