TamilNadu Mid-Day Meal: तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों के मिड-डे मील को अधिक पौष्टिक और आकर्षक बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य सरकार सप्ताह में एक दिन चिकन बिरयानी परोसने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। यह सुझाव राज्य के विभिन्न शिक्षक संगठनों की ओर से मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के समक्ष रखा गया है। सरकार फिलहाल इस प्रस्ताव के वित्तीय, प्रशासनिक और पोषण संबंधी पहलुओं का अध्ययन कर रही है।
मिड-डे मील में चिकन बिरयानी देने का प्रस्ताव
तमिलनाडु में सरकारी स्कूलों के छात्रों को जल्द ही सप्ताह में एक दिन चिकन बिरयानी परोसी जा सकती है। स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने बताया कि इस संबंध में मिला सुझाव मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के सामने रखा जा चुका है और सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है।
यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो राज्य की मिड-डे मील योजना में यह एक बड़ा बदलाव माना जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे बच्चों को अधिक पौष्टिक भोजन मिलेगा और स्कूलों में उनकी नियमित उपस्थिति बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
बजट से पहले हुई अहम बैठक में उठा मुद्दा
‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार यह प्रस्ताव 28 जुलाई को आयोजित एक परामर्श बैठक के दौरान सामने आया। इस बैठक में राज्यभर के 80 से अधिक शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
यह बैठक आगामी 5 अगस्त को पेश होने वाले तमिलनाडु बजट से पहले आयोजित की गई थी, ताकि शिक्षा व्यवस्था और सरकारी स्कूलों से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव सरकार तक पहुंचाए जा सकें।
शिक्षक संगठनों ने क्यों की चिकन बिरयानी की मांग?
बैठक में शिक्षक संगठनों ने कहा कि मौजूदा मिड-डे मील योजना में परोसे जाने वाले चावल की गुणवत्ता में सुधार किया जाना चाहिए। इसके साथ ही सप्ताह में एक दिन चिकन बिरयानी शामिल करने से कई फायदे हो सकते हैं।
शिक्षक संगठनों के अनुसार इसके प्रमुख कारण हैं:
- छात्रों को अधिक पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना।
- स्कूल के भोजन को बच्चों के लिए अधिक आकर्षक बनाना।
- सरकारी स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाना।
- बच्चों में प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाना।
मुख्यमंत्री नाश्ता योजना में भी बदलाव की मांग
बैठक के दौरान केवल चिकन बिरयानी ही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री नाश्ता योजना (Chief Minister’s Breakfast Scheme) में भी बदलाव की मांग उठाई गई।
शिक्षक संगठनों ने सुझाव दिया कि:
- नाश्ता योजना का संचालन नून मील कर्मचारियों को सौंपा जाए।
- इन कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित किया जाए।
- योजना का दायरा बढ़ाकर इसे कक्षा 12 तक लागू किया जाए।
कितने छात्रों को मिलेगा फायदा?
वर्तमान में:
- मुख्यमंत्री नाश्ता योजना के तहत कक्षा 1 से 8 तक के करीब 32 लाख छात्र लाभान्वित हो रहे हैं।
- मिड-डे मील योजना का लाभ कक्षा 10 तक के लगभग 40 लाख छात्रों को मिलता है।
यदि सरकार इस योजना को कक्षा 11 और 12 तक बढ़ाती है, तो करीब 8 लाख अतिरिक्त छात्रों को इसका लाभ मिल सकेगा।
सरकार ने क्या कहा?
स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने कहा कि सरकार पहले से ही इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है। हालांकि यदि मिड-डे मील में चिकन बिरयानी शामिल करने का फैसला लिया जाता है, तो इस संबंध में सामाजिक कल्याण एवं महिला सशक्तिकरण विभाग से भी चर्चा करनी होगी क्योंकि यही विभाग इस योजना के संचालन का जिम्मेदार है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार सरकार इस सुझाव को सकारात्मक नजरिए से देख रही है और अंतिम फैसला सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद लिया जाएगा।
बैठक में TET परीक्षा का मुद्दा भी उठा
बैठक के दौरान शिक्षक संगठनों ने स्पेशल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) को लेकर भी सरकार से राहत देने की मांग की।
उनकी प्रमुख मांगें थीं:
- अनुभवी शिक्षकों को अतिरिक्त वेटेज अंक दिए जाएं।
- न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स कम किए जाएं।
- सभी वर्गों के लिए समान पासिंग मार्क्स लागू किए जाएं।
तमिलनाडु हाई एंड हायर सेकेंडरी स्कूल ग्रेजुएट टीचर्स एसोसिएशन के संस्थापक ए. मायावन ने कहा कि यह स्पेशल TET नई नियुक्तियों के लिए नहीं बल्कि पहले से कार्यरत शिक्षकों की सेवा जारी रखने के लिए है। इसलिए अनुभव के आधार पर वेटेज देना या पासिंग मार्क्स में राहत देना कानूनी रूप से संभव है।
क्या आगामी बजट में हो सकती है घोषणा?
फिलहाल सरकार शिक्षक संगठनों की सभी मांगों पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि 5 अगस्त को पेश होने वाले तमिलनाडु बजट या उसके बाद सरकार इस संबंध में कोई महत्वपूर्ण घोषणा कर सकती है। यदि चिकन बिरयानी को मिड-डे मील का हिस्सा बनाया जाता है, तो यह देश की सबसे चर्चित स्कूल पोषण योजनाओं में से एक बन सकती है।


