Tata Group News: देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons) की आगामी सालाना आम बैठक (AGM) से पहले एक बड़ा कानूनी और प्रशासनिक पेच सामने आ गया है। इस बैठक में कंपनी के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की डायरेक्टर के रूप में दोबारा नियुक्ति का प्रस्ताव रखा जाना है। लेकिन महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के एक आदेश के कारण AGM के कोरम को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। यदि बैठक तय नियमों के अनुसार नहीं हो पाती, तो चंद्रशेखरन की डायरेक्टरशिप और आगे चलकर उनकी चेयरमैनशिप पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
AGM में आखिर क्या है विवाद?
टाटा संस की वार्षिक आम बैठक (AGM) अगले महीने प्रस्तावित है। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों के साथ एन. चंद्रशेखरन की डायरेक्टर के रूप में पुनर्नियुक्ति भी एजेंडे में शामिल है।
कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AoA) के अनुसार, किसी भी AGM के वैध रूप से आयोजित होने के लिए कम से कम पांच सदस्यों की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक है। इनमें एक सदस्य ऐसा होना चाहिए जिसे सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) संयुक्त रूप से नामित करें।
दोनों ट्रस्ट मिलकर टाटा संस में करीब 66% हिस्सेदारी रखते हैं, इसलिए अब तक यह प्रक्रिया सामान्य रूप से पूरी होती रही है।
कहां फंसा पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के उस आदेश से हुई, जिसमें सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) को कथित तौर पर सार्वजनिक ट्रस्ट कानूनों के उल्लंघन के मामले में बोर्ड बैठकों में भाग लेने से रोक दिया गया।
इस प्रतिबंध का सीधा असर AGM पर पड़ रहा है क्योंकि SRTT, SDTT के साथ मिलकर संयुक्त प्रतिनिधि नामित नहीं कर पा रहा है। ऐसे में AGM के लिए जरूरी कोरम पूरा होना मुश्किल हो सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि संयुक्त ट्रस्ट प्रतिनिधि मौजूद नहीं होता, तो बैठक को वैध नहीं माना जाएगा और उसमें कोई भी आधिकारिक निर्णय नहीं लिया जा सकेगा।
कोरम पूरा नहीं होने पर क्या होगा?
टाटा संस के आर्टिकल 87 के अनुसार यदि AGM में कोरम पूरा नहीं होता है तो बैठक को स्थगित (Adjourn) किया जा सकता है।
हालांकि स्थगित बैठक में पांच सदस्यों की अनिवार्यता में कुछ छूट मिल सकती है, लेकिन संयुक्त ट्रस्ट प्रतिनिधि की उपस्थिति फिर भी जरूरी रहेगी।
यानी यदि ट्रस्ट प्रतिनिधि नहीं पहुंचता, तो स्थगित बैठक भी कानूनी रूप से आगे नहीं बढ़ पाएगी।
कंपनी के सामने क्या विकल्प हैं?
मौजूदा स्थिति से निकलने के लिए टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के पास कई संभावित विकल्प मौजूद हैं।
- रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) से AGM आयोजित करने के लिए समय सीमा बढ़ाने की अनुमति लेना।
- महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से आदेश में आंशिक राहत मांगना ताकि SRTT संयुक्त प्रतिनिधि नामित कर सके।
- आवश्यकता पड़ने पर बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर कानूनी निर्देश प्राप्त करना।
इन विकल्पों पर अंतिम फैसला परिस्थितियों और कानूनी सलाह के आधार पर लिया जा सकता है।
एन. चंद्रशेखरन की डायरेक्टरशिप पर क्यों मंडरा रहा है खतरा?
AGM के एजेंडे में एन. चंद्रशेखरन की डायरेक्टर के रूप में पुनर्नियुक्ति सबसे अहम प्रस्तावों में शामिल है।
टाटा संस में चेयरमैन बने रहने के लिए उनका बोर्ड का डायरेक्टर होना आवश्यक है। यदि किसी कारण से उनकी पुनर्नियुक्ति समय पर नहीं हो पाती, तो उनकी डायरेक्टरशिप पर सवाल उठ सकते हैं और इसका असर चेयरमैन पद पर भी पड़ सकता है।
हालांकि उनका वर्तमान चेयरमैन कार्यकाल फरवरी 2027 तक निर्धारित है।
कानूनी विशेषज्ञों की राय क्यों अलग-अलग है?
इस पूरे मामले में कानूनी विशेषज्ञों की राय एक जैसी नहीं है।
एक पक्ष का मानना है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर AGM नहीं होती और पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव पारित नहीं हो पाता, तो उनकी डायरेक्टरशिप प्रभावित हो सकती है।
वहीं दूसरी राय यह है कि चूंकि AGM केवल स्थगित होगी, समाप्त नहीं मानी जाएगी, इसलिए नई बैठक होने तक उनकी डायरेक्टरशिप स्वतः जारी रह सकती है।
कंपनी अधिनियम (Companies Act) में इस विशेष परिस्थिति को लेकर स्पष्ट प्रावधान नहीं होने के कारण अलग-अलग कानूनी व्याख्याएं सामने आ रही हैं।
पिछले साल किसने किया था ट्रस्ट का प्रतिनिधित्व?
पिछली AGM में मेहली मिस्त्री और विजय सिंह ने क्रमशः टाटा ट्रस्ट्स की ओर से प्रतिनिधित्व किया था। दोनों ट्रस्टों को एक से अधिक प्रतिनिधि अधिकृत करने का अधिकार है, लेकिन उनसे संयुक्त रूप से निर्णय लेने और अपने बहुमत मतदान अधिकार का इस्तेमाल करने की अपेक्षा की जाती है।
आगे क्या हो सकता है?
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि टाटा संस समय बढ़ाने का विकल्प चुनती है या ट्रस्ट कानूनी राहत हासिल करने में सफल होते हैं। AGM समय पर होती है या नहीं, इसी पर एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति और टाटा समूह की कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों का भविष्य निर्भर करेगा।


