बहुत से लोग यह मानते हैं कि अगर वे अपनी पत्नी या पति (Spouse) के बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर दें या उनके नाम पर निवेश कर दें, तो परिवार का कुल टैक्स कम हो जाएगा। खासकर तब, जब स्पाउस की आय कम हो या वे किसी टैक्स स्लैब में न आते हों। लेकिन आयकर कानून इस मामले में कुछ अलग नियम लागू करता है।
दरअसल, पति-पत्नी के बीच पैसे गिफ्ट करना पूरी तरह वैध और टैक्स-फ्री है। हालांकि, यदि उस गिफ्ट की गई रकम से निवेश किया जाता है और उससे आय होने लगती है, तो ‘क्लबिंग ऑफ इनकम’ (Clubbing of Income) के नियम लागू हो सकते हैं। ऐसे में टैक्स किसे देना होगा, यह समझना बेहद जरूरी है।
अगर आप इन नियमों को समझे बिना केवल टैक्स बचाने के उद्देश्य से स्पाउस के नाम निवेश करते हैं, तो भविष्य में आयकर विभाग की ओर से नोटिस या अतिरिक्त टैक्स का सामना करना पड़ सकता है।
क्या पति या पत्नी को पैसे गिफ्ट करने पर टैक्स लगता है?
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 56 के तहत पति या पत्नी को “रिश्तेदार” (Relative) माना गया है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी या पति को नकद, बैंक ट्रांसफर, चेक, डिमांड ड्राफ्ट या किसी अन्य माध्यम से कितनी भी राशि गिफ्ट करता है, तो उस गिफ्ट पर प्राप्त करने वाले व्यक्ति को कोई टैक्स नहीं देना पड़ता।
यानी अगर पति अपनी पत्नी को ₹5 लाख, ₹20 लाख या ₹1 करोड़ तक भी गिफ्ट करे, तो केवल गिफ्ट मिलने के कारण कोई टैक्स नहीं लगेगा।
गैर-रिश्तेदार से गिफ्ट मिलने पर क्या नियम है?
यदि किसी व्यक्ति को किसी गैर-रिश्तेदार से एक वित्तीय वर्ष में ₹50,000 से अधिक का गिफ्ट मिलता है, तो वह राशि आयकर के दायरे में आ सकती है।
लेकिन पति-पत्नी के मामले में यह ₹50,000 की सीमा लागू नहीं होती। इसलिए स्पाउस के बीच किसी भी राशि का गिफ्ट टैक्स-फ्री रहता है।
असली टैक्स का खेल निवेश के बाद शुरू होता है
यहीं सबसे बड़ी गलतफहमी होती है।
मान लीजिए पति ने पत्नी को ₹10 लाख गिफ्ट किए। पत्नी ने इस रकम को एफडी, म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार, बॉन्ड या गोल्ड में निवेश कर दिया।
अब यदि इस निवेश से ब्याज, डिविडेंड या कैपिटल गेन होता है, तो क्या उस आय पर पत्नी टैक्स देगी?
जवाब है—नहीं, हमेशा नहीं।
क्या है ‘क्लबिंग ऑफ इनकम’ का नियम?
आयकर अधिनियम की धारा 64 के तहत क्लबिंग ऑफ इनकम का प्रावधान बनाया गया है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई व्यक्ति केवल टैक्स बचाने के लिए अपनी आय या निवेश को कम टैक्स स्लैब वाले पारिवारिक सदस्य के नाम ट्रांसफर न कर दे।
अगर पति द्वारा गिफ्ट की गई राशि से पत्नी आय अर्जित करती हैं, तो उस आय को पत्नी की नहीं बल्कि पति की आय माना जाएगा और उसे पति की कुल टैक्सेबल इनकम में जोड़ दिया जाएगा।
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए—
- पति ने पत्नी को ₹10 लाख गिफ्ट किए।
- पत्नी ने यह रकम एफडी में निवेश कर दी।
- एफडी से एक साल में ₹70,000 ब्याज मिला।
इस स्थिति में ₹70,000 की आय पत्नी की नहीं मानी जाएगी। यह पति की आय में जुड़ जाएगी और उसी के टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा।
इसी तरह म्यूचुअल फंड, शेयर, बॉन्ड या अन्य निवेश से होने वाला डिविडेंड और कैपिटल गेन भी क्लबिंग के दायरे में आ सकता है।
किन परिस्थितियों में क्लबिंग ऑफ इनकम लागू नहीं होती?
हर स्थिति में क्लबिंग का नियम लागू नहीं होता। कुछ मामलों में आय पूरी तरह स्पाउस की मानी जाती है।
1. प्रोफेशनल योग्यता से होने वाली कमाई
यदि पत्नी अपनी शिक्षा, तकनीकी योग्यता, प्रोफेशनल स्किल या अनुभव के आधार पर नौकरी, कंसल्टेंसी, फीस या कमीशन कमाती हैं, तो उस आय को पति की आय में नहीं जोड़ा जाएगा।
2. PPF में निवेश
यदि पति पत्नी के नाम पीपीएफ खाते में राशि जमा करता है, तो पीपीएफ पर मिलने वाला ब्याज वैसे भी पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है। इसलिए यहां क्लबिंग का व्यावहारिक प्रभाव नहीं पड़ता।
3. घर के खर्च से हुई बचत (Pin Money)
यदि पत्नी को घरेलू खर्च के लिए नियमित रूप से पैसे दिए जाते हैं और वे उसमें से बचत करके निवेश करती हैं, तो उस निवेश से हुई आय पर सामान्यतः क्लबिंग के नियम लागू नहीं होते।
4. पहली कमाई पर दूसरी कमाई
यह नियम भी काफी महत्वपूर्ण है।
मान लीजिए—
- पति ने ₹10 लाख गिफ्ट किए।
- पत्नी ने एफडी कराई।
- एफडी से ₹70,000 ब्याज मिला।
यह ₹70,000 पति की आय में जुड़ेगा।
लेकिन यदि पत्नी इसी ₹70,000 को दोबारा निवेश करती हैं और उससे आगे ₹5,000 की अतिरिक्त आय होती है, तो यह दूसरी आय पत्नी की अपनी आय मानी जाएगी और उस पर क्लबिंग लागू नहीं होगी।
क्या स्पाउस के नाम निवेश करके टैक्स बचाया जा सकता है?
सिर्फ स्पाउस के नाम पैसा ट्रांसफर कर देने से टैक्स नहीं बचाया जा सकता।
यदि गिफ्ट की गई रकम से आय उत्पन्न होती है, तो अधिकांश मामलों में क्लबिंग ऑफ इनकम के कारण वह आय मूल दाता (जिसने गिफ्ट किया) की आय मानी जाएगी।
इसलिए टैक्स प्लानिंग करते समय केवल बैंक ट्रांसफर या निवेश का नाम बदलना पर्याप्त नहीं होता। आयकर कानून के प्रावधानों को समझकर ही कोई फैसला लेना चाहिए।
ध्यान रखने योग्य बातें
- पति-पत्नी के बीच पैसे गिफ्ट करना पूरी तरह टैक्स-फ्री है।
- स्पाउस को गिफ्ट पर ₹50,000 की सीमा लागू नहीं होती।
- गिफ्ट किए गए पैसे से होने वाली पहली आय पर क्लबिंग ऑफ इनकम लागू हो सकती है।
- प्रोफेशनल आय, PPF और कुछ विशेष परिस्थितियों में क्लबिंग लागू नहीं होती।
- टैक्स बचाने के लिए निवेश से पहले नियमों को समझना बेहद जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। आयकर नियम समय-समय पर बदल सकते हैं और हर व्यक्ति की वित्तीय स्थिति अलग होती है। किसी भी टैक्स प्लानिंग या निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या टैक्स विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।


