Success Story of Tanya and Saumya: झांसी की दो बहुओं तान्या बंसल और सौम्या गुप्ता ने परिवार की वर्षों से बिना मुनाफे वाली गौशाला को एक सफल बिजनेस मॉडल में बदल दिया। सिर्फ ₹80,000 की बचत से शुरू हुई यह पहल आज सालाना करीब ₹3 करोड़ के कारोबार तक पहुंच चुकी है। बिना केमिकल और बिना मशीन से तैयार होने वाले उत्पादों ने देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है।
Success Story: संकट के समय लिया बड़ा फैसला
भारत में कई पारिवारिक व्यवसाय समय के साथ बंद हो जाते हैं, लेकिन कुछ लोग चुनौतियों को अवसर में बदल देते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है झांसी की तान्या बंसल और सौम्या गुप्ता की, जिन्होंने कोरोना महामारी के दौरान नौकरी बचाने की चिंता को कारोबार की ताकत बना दिया।
आज उनकी ‘कान्हा गौशाला’ सिर्फ एक गौशाला नहीं, बल्कि प्राकृतिक और पारंपरिक उत्पादों का एक सफल ब्रांड बन चुकी है। इस ब्रांड के उत्पादों की तारीफ बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन, कॉमेडियन भारती सिंह और अभिनेता अनुपम खेर जैसी हस्तियां भी कर चुकी हैं।
2007 में शुरू हुई थी कान्हा गौशाला

कान्हा गौशाला की स्थापना वर्ष 2007 में झांसी के उद्योगपति राजेश बंसल और सुधा बंसल ने देसी गायों के संरक्षण के उद्देश्य से की थी।
- शुरुआत सिर्फ 5 गायों से हुई।
- करीब 10 साल तक गौशाला से कोई मुनाफा नहीं हुआ।
- परिवार हर महीने लगभग ₹6 लाख अपनी जेब से खर्च करता था।
- दूध बेचकर केवल करीब ₹1 लाख की आमदनी होती थी।
- खास बात यह रही कि परिवार ने कभी किसी तरह का दान या फंडिंग नहीं ली।
कोरोना महामारी ने बदल दी पूरी तस्वीर
साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान गौशाला में काम करने वाले 22 कर्मचारियों की नौकरी पर संकट मंडराने लगा।
इसी समय परिवार की दो बहुएं तान्या बंसल और सौम्या गुप्ता आगे आईं और उन्होंने गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने की जिम्मेदारी संभाली।
तान्या बंसल के अनुसार, कर्मचारियों की रोजी-रोटी बचाने के लिए गौशाला को एक सस्टेनेबल और कमर्शियल मॉडल में बदलने का निर्णय लिया गया।
सिर्फ ₹80,000 से शुरू हुआ नया सफर

दोनों ने मिलकर केवल ₹80,000 की शुरुआती पूंजी जुटाई।
- आधी रकम सौम्या को राखी पर मिले पैसों से आई।
- बाकी आधी राशि तान्या की निजी बचत थी।
उन्होंने ऑनलाइन चार मैन्युअल दीया बनाने की मशीनें खरीदीं और करीब 50 से अधिक प्रयोग करने के बाद पंचगव्य दीये तैयार किए।
सितंबर 2020 में इन दीयों को बाजार में लॉन्च किया गया।
दो महीने में ही ₹10 लाख की बिक्री

दीपावली के सीजन में पंचगव्य दीयों को शानदार प्रतिक्रिया मिली।
- बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन की मां पिंकी रोशन ने स्वयं फोन कर इन दीयों का ऑर्डर दिया।
- केवल दो महीनों में कंपनी ने ₹10 लाख का राजस्व हासिल कर लिया।
यहीं से इस बिजनेस मॉडल की सफलता की शुरुआत हुई।
कच्चा दूध बेचना बंद, शुरू किया वैल्यू एडेड बिजनेस
नवंबर 2020 के बाद कंपनी ने बड़ा फैसला लेते हुए कच्चा दूध बेचना बंद कर दिया।
इसके बाद पूरा फोकस पारंपरिक बिलोना घी बनाने पर किया गया।
घी पूरी तरह पारंपरिक तरीके से हाथों से तैयार किया जाता है। इसमें किसी प्रकार की आधुनिक मशीनरी का उपयोग नहीं किया जाता।
धीरे-धीरे ब्रांड ने अपने उत्पादों की संख्या बढ़ाकर 55 से अधिक कर दी।
इनमें शामिल हैं—
- पारंपरिक बिलोना घी
- पंचगव्य दीये
- सिलबट्टे पर पिसे मसाले
- मखाना
- मोरिंगा पाउडर
- भीमसेनी कपूर
- शहद
- अन्य प्राकृतिक उत्पाद
इन सभी उत्पादों में किसी भी प्रकार का केमिकल या प्रिजर्वेटिव इस्तेमाल नहीं किया जाता।
बिना वेबसाइट के देशभर में कारोबार

दिलचस्प बात यह है कि कंपनी ने लंबे समय तक बिना किसी वेबसाइट के ही अपना कारोबार बढ़ाया।
- ऑर्डर मुख्य रूप से Instagram और WhatsApp के जरिए लिए जाते हैं।
- उत्पाद पूरे भारत में ग्राहकों तक पहुंचाए जाते हैं।
आज हर महीने करीब 1,600 से अधिक ग्राहक इस ब्रांड से खरीदारी करते हैं।
आज 22 एकड़ में फैली है कान्हा गौशाला
आज कान्हा गौशाला—
- 22 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है।
- यहां 375 से अधिक देसी गायों की देखभाल की जाती है।
- 16 कर्मचारी पशुओं की सेवा में लगे हैं।
- पूरी कंपनी में लगभग 60 लोगों की टीम काम कर रही है।
गौशाला में पशुओं की देखभाल के लिए कई नैतिक नियम अपनाए जाते हैं।
- बछड़े को दूध पर पहला अधिकार दिया जाता है।
- गायों को कभी छोड़ा नहीं जाता।
- प्राकृतिक गर्भाधान और जीवनभर देखभाल की व्यवस्था की जाती है।
सालाना लगभग ₹3 करोड़ का कारोबार
आज कान्हा गौशाला हर महीने करीब ₹28 लाख का कारोबार कर रही है, जो सालाना लगभग ₹3 करोड़ के राजस्व के बराबर है।
कंपनी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में ऑफलाइन प्रदर्शनियों के जरिए अपने कारोबार का विस्तार करना और अगले पांच वर्षों में कम से कम तीन उत्पाद श्रेणियों में मार्केट लीडर बनना है।
सफलता से मिलने वाली सीख
तान्या और सौम्या की कहानी यह साबित करती है कि सीमित पूंजी, सही सोच और निरंतर मेहनत से किसी भी पारंपरिक काम को आधुनिक और लाभदायक बिजनेस में बदला जा सकता है। उन्होंने केवल अपने परिवार का व्यवसाय ही नहीं बचाया, बल्कि दर्जनों लोगों की आजीविका भी सुरक्षित की और प्राकृतिक उत्पादों के क्षेत्र में एक मजबूत भारतीय ब्रांड तैयार किया।

