Who Is Dharmendra Pradhan: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार, 25 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं को लेकर पिछले कई दिनों से विपक्षी दलों और विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा उनके इस्तीफे की मांग की जा रही थी। दिलचस्प बात यह है कि छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले धर्मेंद्र प्रधान को अंततः छात्र आंदोलन के बढ़ते दबाव के बीच पद छोड़ना पड़ा। आइए जानते हैं उनके राजनीतिक सफर, छात्र आंदोलन से लेकर केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री बनने तक की पूरी कहानी।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
धर्मेंद्र प्रधान का जन्म 26 जून 1969 को ओडिशा के तालचेर में हुआ था। उनके पिता देबेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे हैं। हालांकि राजनीति उन्हें विरासत में मिली, लेकिन अपनी अलग पहचान उन्होंने छात्र राजनीति के जरिए बनाई।
उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। छात्र हितों से जुड़े आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण वे जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने लगे। बाद में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाया गया।
1997 का पेपर लीक आंदोलन बना पहचान
धर्मेंद्र प्रधान के राजनीतिक जीवन का सबसे चर्चित अध्याय वर्ष 1997 का छात्र आंदोलन माना जाता है। उस समय ओडिशा में प्रश्नपत्र लीक का मामला सामने आया था। तब एबीवीपी के राष्ट्रीय सचिव के रूप में धर्मेंद्र प्रधान ने लगभग 1,500 छात्रों के साथ भुवनेश्वर में मुख्यमंत्री आवास और सचिवालय का घेराव किया।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिसमें धर्मेंद्र प्रधान गंभीर रूप से घायल हुए और उनके शरीर में कई जगह फ्रैक्चर आए। इस घटना के बाद वे ओडिशा में छात्र राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए।
विधायक से सांसद तक का सफर
छात्र राजनीति में सक्रिय रहने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने चुनावी राजनीति में कदम रखा।
- वर्ष 2000 में ओडिशा की पल्लहड़ा विधानसभा सीट से पहली बार विधायक चुने गए।
- 2004 में ओडिशा की देवगढ़ लोकसभा सीट से सांसद बने।
- इसके बाद उन्होंने बिहार और मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद के रूप में भी संसद में प्रतिनिधित्व किया।
- 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने ओडिशा की संबलपुर सीट से जीत दर्ज कर फिर लोकसभा पहुंचे।
मोदी सरकार में लगातार बढ़ता गया कद
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री
साल 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद धर्मेंद्र प्रधान को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। इस दौरान उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र में कई अहम फैसले लिए। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के विस्तार और एलपीजी कनेक्शन बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
कौशल विकास और इस्पात मंत्रालय
साल 2017 में उन्हें कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद 2019 में वे इस्पात मंत्री भी बने और दोनों मंत्रालयों का कार्यभार संभाला।
2021 में बने शिक्षा मंत्री
जुलाई 2021 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान को देश का केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाया गया।
उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को लागू करने की दिशा में कई कदम उठाए गए। नई शिक्षा व्यवस्था, डिजिटल शिक्षा और कौशल आधारित शिक्षा पर सरकार ने विशेष जोर दिया।
हालांकि इसी दौरान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित परीक्षाओं की पारदर्शिता और परीक्षा प्रबंधन को लेकर लगातार सवाल भी उठते रहे।
नीट-यूजी 2026 विवाद बना सबसे बड़ी चुनौती
नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद विपक्षी दलों के साथ-साथ कई छात्र संगठनों ने देशभर में विरोध प्रदर्शन किए। शिक्षा मंत्रालय और एनटीए की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठे और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग तेज होती गई।
इसी बढ़ते राजनीतिक और जनदबाव के बीच उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया।
राजनीति का एक दिलचस्प मोड़
धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक जीवन एक अनोखा संयोग भी पेश करता है। जिन छात्र आंदोलनों और पेपर लीक के विरोध से उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की मजबूत शुरुआत की थी, वर्षों बाद उसी तरह के परीक्षा विवाद और छात्र आंदोलनों के बीच उन्हें केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पद छोड़ना पड़ा। यही वजह है कि उनका इस्तीफा भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
नोट: इस लेख में वर्णित इस्तीफे, नीट-यूजी 2026 विवाद और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। इन मामलों से संबंधित जांच और आधिकारिक प्रक्रियाएं आगे भी जारी रह सकती हैं।


