The India Story Review: श्रेयस तलपड़े और काजल अग्रवाल स्टारर ‘द इंडिया स्टोरी’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि खाद्य सुरक्षा, जहरीले पेस्टिसाइड्स और बढ़ती गंभीर बीमारियों जैसे संवेदनशील विषय पर दर्शकों का ध्यान भी आकर्षित करती है। निर्देशक चेतन डीके ने कोर्टरूम ड्रामा और एक पिता की भावनात्मक लड़ाई के जरिए एक ऐसा सवाल उठाया है, जो हर परिवार से जुड़ा हुआ है—क्या हमारी थाली में परोसा जाने वाला खाना वास्तव में सुरक्षित है?
The India Story Review
बॉलीवुड में सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों की संख्या सीमित रही है, लेकिन जब कोई फिल्म मनोरंजन के साथ समाज के सामने गंभीर सवाल रखती है तो उसका असर लंबे समय तक रहता है। ‘द इंडिया स्टोरी’ भी ऐसी ही एक फिल्म है, जो आधुनिक खेती में इस्तेमाल होने वाले जहरीले पेस्टिसाइड्स और रसायनों के दुष्प्रभावों को बड़े पर्दे पर सामने लाती है।
फिल्म सिर्फ एक कोर्टरूम ड्रामा नहीं है, बल्कि यह दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि बेहतर उत्पादन और चमकदार फल-सब्जियों की कीमत कहीं हमारी सेहत तो नहीं चुका रही। निर्देशक चेतन डीके ने इस गंभीर विषय को भावनात्मक कहानी और मजबूत स्क्रीनप्ले के साथ पेश करने की कोशिश की है।
फिल्म की कहानी
कहानी की शुरुआत अदालत से होती है, जहां तेज-तर्रार वकील अर्चना (काजल अग्रवाल) अपने क्लाइंट योगेश पाटिल (श्रेयस तलपड़े) की ओर से अदालत में केस लड़ रही होती हैं।
योगेश की सात वर्षीय बेटी कैंसर के कारण दुनिया छोड़ चुकी है। मेडिकल रिपोर्ट में यह आशंका जताई जाती है कि लंबे समय तक पेस्टिसाइड युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन उसकी बीमारी की प्रमुख वजह रहा। अपनी बेटी की मौत के बाद योगेश इसे केवल अपनी व्यक्तिगत त्रासदी मानकर नहीं बैठता, बल्कि पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर देता है।
उसकी लड़ाई केवल एक कंपनी के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था, जहरीले पेस्टिसाइड बनाने वाली कंपनियों और उन सभी लोगों के खिलाफ है जिन्होंने इस खतरे को नजरअंदाज किया।
अदालत में बहस के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आते हैं जो दर्शकों को चौंकाते हैं। फिल्म का पहला भाग काफी प्रभावशाली है। कोर्टरूम के संवाद, कहानी की रफ्तार और इंटरवल से पहले आने वाला बड़ा खुलासा दर्शकों को बांधे रखता है।
एक दृश्य विशेष रूप से प्रभावित करता है, जब अर्चना पानी की बोतल उठाकर कहती हैं—“बस यही असली है।” यह छोटा-सा संवाद पूरी फिल्म के संदेश को बेहद प्रभावशाली तरीके से सामने रख देता है।
दूसरे भाग में कहानी की गति थोड़ी धीमी होती है, लेकिन फिल्म अपने मूल उद्देश्य से नहीं भटकती। क्लाइमैक्स तक दर्शकों के मन में यही सवाल बना रहता है कि क्या योगेश अपनी बेटी के लिए इंसाफ हासिल कर पाएगा और क्या दोषियों की जवाबदेही तय होगी।
एक्टिंग
श्रेयस तलपड़े ने योगेश पाटिल के किरदार में अपने करियर का बेहद भावनात्मक और परिपक्व प्रदर्शन दिया है। एक टूटे हुए पिता का दर्द, गुस्सा और न्याय पाने की जिद उनके अभिनय में साफ दिखाई देती है।
काजल अग्रवाल ने वकील अर्चना के रूप में आत्मविश्वास से भरपूर अभिनय किया है। कोर्टरूम के दृश्यों में उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और संवाद अदायगी प्रभाव छोड़ती है।
मुरली शर्मा हमेशा की तरह अपने किरदार में दमदार नजर आते हैं। वहीं मनीष वाधवा विरोधी पक्ष के वकील के रूप में कोर्टरूम ड्रामा को और मजबूत बनाते हैं।
छोटी बच्ची की भूमिका निभाने वाली त्रिशा सारदा बेहद स्वाभाविक अभिनय करती हैं और भावनात्मक दृश्यों में गहरी छाप छोड़ती हैं। अतुल तिवारी, कमलेश सावंत और शाम मशालकर ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है।
निर्देशन
निर्देशक चेतन डीके ने एक ऐसा विषय चुना है जिस पर मुख्यधारा के भारतीय सिनेमा में बहुत कम फिल्में बनी हैं।
फिल्म देखकर महसूस होता है कि विषय पर गंभीर रिसर्च की गई है। वैज्ञानिक तथ्यों और भावनात्मक कहानी के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश साफ दिखाई देती है।
निर्देशक ने पिता और बेटी के रिश्ते को कहानी का भावनात्मक आधार बनाया है, जिसकी वजह से फिल्म केवल जानकारी देने वाली डॉक्यूमेंट्री नहीं बनती, बल्कि दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने में सफल रहती है।
हालांकि दूसरे हाफ की गति थोड़ी धीमी महसूस होती है, लेकिन सामाजिक संदेश फिल्म को अंत तक मजबूत बनाए रखता है।
क्या देखें या नहीं?
अगर आप केवल मसाला मनोरंजन की उम्मीद लेकर जाएंगे तो यह फिल्म आपकी पसंद से अलग हो सकती है। लेकिन यदि आपको ऐसे सिनेमा पसंद हैं जो मनोरंजन के साथ समाज के सामने गंभीर सवाल भी रखते हैं, तो द इंडिया स्टोरी जरूर देखनी चाहिए।
यह फिल्म खाद्य सुरक्षा, पेस्टिसाइड्स के बढ़ते इस्तेमाल और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा छेड़ती है। साथ ही यह सरकार, नीति-निर्माताओं और आम नागरिकों को सोचने पर मजबूर करती है कि आने वाली पीढ़ियों की सेहत के लिए आज क्या कदम उठाने जरूरी हैं।
स्टार कास्ट
- श्रेयस तलपड़े
- काजल अग्रवाल
- मुरली शर्मा
- मनीष वाधवा
- त्रिशा सारदा
- अतुल तिवारी
- कमलेश सावंत
- शाम मशालकर
निर्देशक: चेतन डीके
निर्माता: सागर शिंदे
NewsJagran Verdict
रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐☆ (3.5/5)
‘द इंडिया स्टोरी’ एक जागरूक करने वाली कोर्टरूम ड्रामा है, जो मनोरंजन के साथ खाद्य सुरक्षा जैसे बेहद महत्वपूर्ण विषय पर गंभीर सवाल उठाती है। दमदार अभिनय, भावनात्मक कहानी और सामाजिक संदेश इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। दूसरे हाफ की धीमी गति के बावजूद यह फिल्म अंत तक अपनी बात प्रभावशाली ढंग से कहने में सफल रहती है।


