Crude Oil Price Today: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में इस सप्ताह जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) दो महीने में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, लेकिन इसके बाद मुनाफावसूली और बाजार की बदलती धारणा के चलते कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। फिलहाल Comex पर क्रूड ऑयल करीब 3.31% की गिरावट के साथ 92.55 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस उतार-चढ़ाव का असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा?
Highlights
- ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के बाद फिसला।
- Comex पर क्रूड ऑयल 3.31% टूटकर 92.55 डॉलर पर आया।
- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से सप्लाई को लेकर चिंता बरकरार।
- भारत में फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, लेकिन आगे जोखिम बना हुआ।
- एक्सपर्ट ने ब्रेंट क्रूड के 120 डॉलर तक पहुंचने की आशंका जताई।
$100 के पार पहुंचकर क्यों गिरा Crude Oil?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जबकि सप्ताह का समापन 100.69 डॉलर के आसपास हुआ। हालांकि खबर लिखे जाने तक बाजार में बिकवाली हावी रही और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल में तेजी आई थी, लेकिन ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली और बाजार की बदलती धारणा के चलते कीमतों में गिरावट देखने को मिली। इसके बावजूद बाजार में अस्थिरता अभी भी बनी हुई है।
एक्सपर्ट ने क्यों जताई चिंता?
कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी एवं करेंसी रिसर्च प्रमुख अनिंद्य बनर्जी के अनुसार, यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में वैश्विक सप्लाई चेन पर लगातार दबाव बना हुआ है और यही तेल बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम है।
आखिर कच्चे तेल में इतनी तेजी क्यों आई?
विशेषज्ञों के अनुसार हालिया तेजी के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं।
- यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी।
- कजाकिस्तान में ड्रोन हमलों के बाद कैस्पियन पाइपलाइन से तेल निर्यात बाधित होना।
इन घटनाओं ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला।
तीन अहम रास्तों पर टिका है पूरी दुनिया का ऑयल मार्केट
1. Strait of Hormuz
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल यह जलडमरूमध्य पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है। यहां किसी भी तरह की बाधा तेल की कीमतों को तेजी से ऊपर ले जा सकती है।
2. Bab el-Mandeb
लाल सागर का यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद अहम है। यदि यहां जहाजों पर हमले बढ़ते हैं या आवाजाही प्रभावित होती है, तो ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।
3. Fujairah Terminal
यह प्रमुख निर्यात टर्मिनल हॉर्मुज जलडमरूमध्य का विकल्प माना जाता है। यदि यहां भी संकट गहराता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।
क्यों बनी हुई है कीमतें बढ़ने की आशंका?
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कई महीनों से दुनिया भर में कच्चे तेल का भंडार लगातार घट रहा है। ऐसे में यदि सप्लाई में थोड़ी भी अतिरिक्त बाधा आती है तो बाजार में उपलब्ध बफर बेहद सीमित रहेगा, जिससे कीमतों में अचानक बड़ी तेजी आ सकती है।
क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 85% से अधिक हिस्सा आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर देश की आयात लागत पर पड़ता है।
हालांकि फिलहाल सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
आगे किन स्तरों पर रहेगी बाजार की नजर?
एक्सपर्ट के मुताबिक आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर इन स्तरों पर रहेगी।
- 90 डॉलर प्रति बैरल ब्रेंट क्रूड के लिए मजबूत सपोर्ट।
- 92 से 95 डॉलर का दायरा बेहद अहम।
- 90 डॉलर के ऊपर बने रहने पर तेजी का ट्रेंड कायम रह सकता है।
- तनाव बढ़ने पर 120 डॉलर तक की संभावना से इनकार नहीं।
सोना और चांदी पर क्या होगा असर?
महंगा कच्चा तेल वैश्विक महंगाई बढ़ा सकता है। इससे बॉन्ड यील्ड में तेजी आने की संभावना रहती है, जिसका असर कीमती धातुओं पर भी पड़ सकता है।
- सोना: 3,950 से 4,000 डॉलर का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। इसके ऊपर कीमतें 4,150 डॉलर तक जा सकती हैं।
- चांदी: 56 डॉलर के आसपास मजबूत सपोर्ट जबकि 60-61 डॉलर का स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस माना जा रहा है।
निष्कर्ष
कच्चे तेल की कीमतों में फिलहाल भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हालांकि $100 प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने के बाद कीमतों में तेज गिरावट आई है, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक सप्लाई से जुड़ी चिंताएं अभी खत्म नहीं हुई हैं। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल फिर से ऊंचे स्तर पर टिकता है, तो आने वाले महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।


