Stock Market Fall: शुक्रवार, 24 जुलाई को शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स एक समय 900 अंकों से ज्यादा टूट गया था और निफ्टी भी 23,600 के करीब पहुंच गया। हालांकि कारोबार आगे बढ़ने के साथ बाजार में निचले स्तरों से खरीदारी लौटने लगी, जिससे सेंसेक्स दिन के सबसे निचले स्तर से करीब 600 अंक रिकवर कर गया और निफ्टी भी 23,770 के ऊपर पहुंच गया। इसके बावजूद दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते रहे। बाजार की इस रिकवरी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, बैंकिंग शेयरों की वापसी और रुपये में मजबूती जैसे कई अहम कारण रहे।
शुरुआती कारोबार में बाजार में मची थी बड़ी बिकवाली
शुक्रवार की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद कमजोर रही। गुरुवार की गिरावट के बाद शुक्रवार को भी बिकवाली जारी रही और सेंसेक्स दिन के दौरान पिछली क्लोजिंग से करीब 917 अंक गिरकर 75,474.43 तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 भी 263 अंक टूटकर 23,606.30 के निचले स्तर तक फिसल गया।
हालांकि दोपहर तक बाजार में हालात बदलने लगे और निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी शुरू की। इसके बाद सेंसेक्स करीब 600 अंक की रिकवरी करते हुए 76,000 के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी 23,770 के ऊपर निकल आया।
गुरुवार की गिरावट का असर शुक्रवार तक रहा
इससे पहले गुरुवार को भी बाजार दबाव में रहा था। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण निवेशकों की धारणा कमजोर हुई थी।
- सेंसेक्स 363.66 अंक (0.47%) टूटकर 76,391.39 पर बंद हुआ था।
- निफ्टी 126.65 अंक (0.53%) गिरकर 23,869.60 पर बंद हुआ था।
लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बाजार में कमजोरी देखने को मिली, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी।
बाजार में रिकवरी के पीछे रहे ये बड़े कारण
1. कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर से नीचे आई
शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में हल्की नरमी देखने को मिली और यह फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया। इससे निवेशकों को राहत मिली क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट से महंगाई और चालू खाते के घाटे को लेकर बनी चिंता कुछ कम हुई, जिसका सकारात्मक असर शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया।
2. निचले स्तरों पर निवेशकों ने की खरीदारी
लगातार कई दिनों की गिरावट के बाद कई मजबूत कंपनियों के शेयर आकर्षक वैल्यूएशन पर पहुंच गए थे। ऐसे में निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी शुरू कर दी।
इस सप्ताह अब तक सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 3 प्रतिशत तक की गिरावट आ चुकी थी, जिसके बाद वैल्यू बायिंग देखने को मिली।
3. बैंकिंग शेयरों ने संभाला बाजार
बैंकिंग सेक्टर में शुरुआती दबाव के बाद अच्छी रिकवरी देखने को मिली।
- बैंक निफ्टी शुरुआती कारोबार में 56,023.60 तक फिसल गया था।
- बाद में यह सुधरकर 56,772.55 तक पहुंच गया।
इस दौरान Bank of Baroda और AU Small Finance Bank के शेयरों में सबसे अधिक तेजी दर्ज की गई। बैंकिंग शेयरों की वापसी ने पूरे बाजार की रिकवरी में अहम भूमिका निभाई।
4. रुपये में मजबूती से बढ़ा निवेशकों का भरोसा
भारतीय रुपया भी शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे मजबूत होकर 96.51 पर पहुंच गया।
विश्लेषकों का मानना है कि रिजर्व बैंक की संभावित दखल और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी ने रुपये को सहारा दिया। मजबूत रुपये से विदेशी निवेशकों की धारणा में भी कुछ सुधार देखने को मिला।
शुक्रवार की बड़ी गिरावट के पीछे क्या रहे प्रमुख कारण?
1. कच्चे तेल का 100 डॉलर के ऊपर पहुंचना
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई थीं।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है। ऐसे में तेल महंगा होने से महंगाई, चालू खाते के घाटे और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है।
इसी वजह से कई सेक्टरों में भारी बिकवाली देखने को मिली।
सबसे ज्यादा दबाव इन सेक्टरों पर रहा
- ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (BPCL, HPCL, इंडियन ऑयल) लगभग 2% तक गिरीं।
- पेंट कंपनियों के शेयरों में करीब 1% की कमजोरी रही।
- टायर कंपनियों में लगभग 2% तक गिरावट आई।
- एयरलाइन कंपनियां जैसे स्पाइसजेट और इंडिगो करीब 3% तक टूट गईं।
2. इंफोसिस के शेयरों में गिरावट
आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी इंफोसिस के शेयरों में शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि कंपनी का अप्रैल-जून 2026 तिमाही का प्रदर्शन मजबूत रहा।
- शुद्ध मुनाफा 12.2% बढ़कर ₹7,769 करोड़
- रेवेन्यू 14% बढ़कर ₹48,211 करोड़
लेकिन कंपनी ने पूरे वित्त वर्ष के लिए अपने रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस की ऊपरी सीमा घटा दी, जिससे निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी।
3. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।
गुरुवार को FII ने ₹2,999.23 करोड़ के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। लगातार विदेशी बिकवाली से बाजार पर दबाव बना हुआ है।
4. एशियाई बाजारों में भी कमजोरी
भारतीय बाजार पर वैश्विक संकेत भी कमजोर रहे।
- दक्षिण कोरिया का कोस्पी 5.56% तक गिरा।
- जापान का निक्केई 225 लाल निशान में रहा।
- चीन का एसएसई कंपोजिट और
- हांगकांग का हैंगसेंग भी कमजोरी के साथ कारोबार करते रहे।
इसके अलावा अमेरिकी शेयर बाजार भी पिछला कारोबारी सत्र गिरावट के साथ बंद हुए थे।
5. इंडिया VIX में तेज उछाल
बाजार में डर का संकेत माने जाने वाले India VIX में करीब 9 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 14.68 तक पहुंच गया।
VIX में बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि निवेशक आने वाले दिनों में बाजार में अधिक उतार-चढ़ाव की आशंका देख रहे हैं।
6. बढ़ती भूराजनीतिक चिंताएं
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान और हूथी समूह को लेकर कड़ी चेतावनी तथा लाल सागर में तेल टैंकरों पर हमलों की खबरों ने वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजार को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक शेयर बाजारों पर दिखाई दिया।
आगे बाजार पर किन बातों पर रहेगी नजर?
आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर इन प्रमुख फैक्टर्स पर रहेगी—
- कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के ऊपर टिकती हैं या नहीं।
- विदेशी निवेशकों (FII) की खरीदारी या बिकवाली का रुख।
- रुपये और डॉलर की चाल।
- कंपनियों के जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे।
- मध्य पूर्व से जुड़ी भू-राजनीतिक घटनाएं।
- RBI और अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़े संकेत।
यदि कच्चे तेल में और नरमी आती है तथा विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है, तो बाजार में राहत की यह रिकवरी अगले सप्ताह भी जारी रह सकती है। वहीं तेल की कीमतों में दोबारा तेज उछाल आने पर बाजार पर फिर दबाव बन सकता है।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। NewsJagran किसी भी शेयर या निवेश में पैसा लगाने की सलाह नहीं देता।


