Swiggy Share Price: फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स कंपनी स्विगी (Swiggy) के शेयरों में शुक्रवार, 24 जुलाई को भारी बिकवाली देखने को मिली। कंपनी के बोर्ड द्वारा विदेशी निवेश (Foreign Shareholding) की अधिकतम सीमा 100% से घटाकर 49.5% करने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद निवेशकों ने शेयरों से दूरी बनानी शुरू कर दी। कारोबार के दौरान स्विगी का शेयर करीब 7% तक टूट गया, जबकि सुबह 11 बजे यह 6.11% की गिरावट के साथ 245.58 रुपये पर कारोबार करता दिखा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव शेयरधारकों से मंजूर हो जाता है तो स्विगी को प्रमुख वैश्विक इंडेक्स (Global Indices) से बाहर होना पड़ सकता है, जिससे विदेशी फंडों की बड़ी बिकवाली देखने को मिल सकती है।
विदेशी हिस्सेदारी 100% से घटाकर 49.5% करने का प्रस्ताव
स्विगी ने 23 जुलाई की शाम स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई सूचना में बताया कि कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने विदेशी निवेश की अधिकतम सीमा 49.5% तय करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। वर्तमान में कंपनी में 100% तक विदेशी हिस्सेदारी की अनुमति है।
अब इस प्रस्ताव को 18 अगस्त 2026 को होने वाली कंपनी की Annual General Meeting (AGM) में शेयरधारकों की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इस बदलाव को लागू करने के लिए स्पेशल रिजॉल्यूशन पास होना जरूरी होगा।
शेयर क्यों टूटा?
विदेशी हिस्सेदारी की सीमा कम होने की खबर के बाद निवेशकों को आशंका है कि स्विगी को वैश्विक शेयर सूचकांकों से बाहर किया जा सकता है। यही वजह रही कि बाजार खुलते ही शेयर पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
कारोबार के दौरान शेयर लगभग 7% तक टूट गया, जिससे यह अपने अब तक के सबसे निचले स्तरों के करीब पहुंच गया। इस साल अब तक स्विगी के शेयर में 37% से अधिक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
MSCI और FTSE Index से बाहर होने का खतरा
नुवामा अल्टरनेटिव एंड क्वांटेटिव रिसर्च के विश्लेषक अभिलाष पगाड़िया के अनुसार, यदि विदेशी हिस्सेदारी की सीमा 49.5% तय हो जाती है तो विदेशी निवेश बढ़ाने की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। इसका असर कंपनी की इंडेक्स पात्रता (Index Eligibility) पर पड़ सकता है।
वर्तमान में:
- MSCI Standard Index में स्विगी का वेटेज 28 बेसिस प्वाइंट्स है।
- FTSE Index में कंपनी का वेटेज 24 बेसिस प्वाइंट्स है।
यदि कंपनी MSCI Index से बाहर होती है तो अनुमानित 340 मिलियन डॉलर (करीब 34 करोड़ डॉलर) की बिकवाली हो सकती है। इसके तहत लगभग 12.5 करोड़ शेयर बेचे जा सकते हैं।
वहीं FTSE Index से बाहर होने की स्थिति में करीब 4.6 करोड़ शेयरों की अतिरिक्त बिक्री संभव मानी जा रही है।
कंपनी को क्या फायदा होगा?
हालांकि इस फैसले का एक सकारात्मक पक्ष भी है।
विदेशी हिस्सेदारी की सीमा घटने के बाद स्विगी अपने क्विक कॉमर्स बिजनेस को First Party Inventory Model के तहत संचालित कर सकेगी। फिलहाल Blinkit और Zepto इसी मॉडल का इस्तेमाल करते हैं।
इस मॉडल के जरिए कंपनी:
- इन्वेंट्री पर बेहतर नियंत्रण रख सकेगी।
- डिलीवरी ऑपरेशन अधिक कुशल बना सकेगी।
- मुनाफे (Margin) में सुधार की संभावना बढ़ सकती है।
- क्विक कॉमर्स बिजनेस की प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति हासिल कर सकती है।
हालांकि बाजार फिलहाल इस दीर्घकालिक लाभ की बजाय संभावित विदेशी बिकवाली को लेकर अधिक चिंतित नजर आ रहा है।
बाजार में भी रहा दबाव
स्विगी के शेयरों में गिरावट ऐसे समय आई जब भारतीय शेयर बाजार भी लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में दबाव में रहा।
सुबह 11 बजे तक:
- निफ्टी 50 करीब 242 अंक (1%) गिरकर 23,627 पर कारोबार कर रहा था।
- सेंसेक्स लगभग 842 अंक (1.10%) टूटकर 75,543 के स्तर पर पहुंच गया।
- बैंक निफ्टी में भी करीब 0.84% की कमजोरी दर्ज की गई।
कमजोर वैश्विक संकेतों और आईटी शेयरों में बिकवाली का असर पूरे बाजार पर देखने को मिला।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
स्विगी का विदेशी हिस्सेदारी सीमा घटाने का फैसला रणनीतिक रूप से कंपनी के क्विक कॉमर्स बिजनेस के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन अल्पावधि में इससे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की हिस्सेदारी और ग्लोबल इंडेक्स में कंपनी की स्थिति पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि फिलहाल शेयर पर दबाव बना हुआ है।
यदि AGM में यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो आने वाले महीनों में स्विगी के शेयरों में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे में निवेशकों को कंपनी के अगले कदम, इंडेक्स प्रदाताओं के फैसले और विदेशी निवेश के रुझान पर नजर रखनी चाहिए।


