Asian Market Today: शुक्रवार को एशियाई शेयर बाजारों में भारी बिकवाली देखने को मिली। जापान के निक्केई (Nikkei 225) और दक्षिण कोरिया के कोस्पी (KOSPI) में करीब 3% तक की गिरावट दर्ज की गई। ग्लोबल बाजारों पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड, टेक शेयरों में बिकवाली और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर साफ दिखाई दिया।
गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार में आई बड़ी गिरावट के बाद शुक्रवार सुबह एशियाई बाजार भी दबाव में खुलते नजर आए। निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाई, जिससे अधिकांश प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखे।
निक्केई और कोस्पी में भारी गिरावट
जापान का प्रमुख Nikkei 225 Index शुरुआती कारोबार में 2.96% तक टूट गया। वहीं टोक्यो का व्यापक बाजार सूचकांक TOPIX भी 1% से अधिक गिर गया।
दक्षिण कोरिया का KOSPI Index लगभग 3.3% तक लुढ़क गया। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया सहित अन्य एशियाई बाजारों में भी बिकवाली देखने को मिली।
उधर MSCI Asia Pacific Index करीब 0.8% फिसल गया, जो पूरे क्षेत्र में निवेशकों की कमजोर धारणा को दर्शाता है।
वॉल स्ट्रीट की कमजोरी का एशियाई बाजारों पर असर
अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को तेज गिरावट के साथ बंद हुए। महंगाई को लेकर बढ़ती चिंता और बॉन्ड यील्ड में उछाल ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया।
अमेरिकी बाजार का प्रदर्शन
- Dow Jones 506.93 अंक (0.97%) गिरकर 51,711.65 पर बंद हुआ।
- S&P 500 90.66 अंक (1.21%) टूटकर 7,408.30 पर आ गया।
- Nasdaq Composite 553.21 अंक (2.15%) गिरकर 25,137.69 पर बंद हुआ।
टेक सेक्टर में बिकवाली सबसे ज्यादा देखने को मिली, जिसका असर एशियाई टेक शेयरों पर भी पड़ा।
टेक कंपनियों के शेयरों में दबाव
अमेरिकी टेक कंपनियों के शेयरों में भी कमजोरी रही।
- Nvidia का शेयर 1.56% गिरा।
- AMD में 2.29% की गिरावट दर्ज हुई।
- Microsoft के शेयर 2.24% टूटे।
- Apple का शेयर 1.30% नीचे बंद हुआ।
- Tesla में सबसे बड़ी 14.52% की गिरावट दर्ज की गई।
- हालांकि Micron Technology के शेयर 3.20% और SpaceX से जुड़े शेयर 2.59% तक मजबूत रहे।
US-ईरान तनाव से बढ़ी बाजार की चिंता
बाजार की कमजोरी के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव भी एक बड़ा कारण रहा। अमेरिकी सेना ने जानकारी दी कि उसने ईरान पर हमलों का एक और दौर पूरा किया, जो लगातार 13वीं रात की सैन्य कार्रवाई थी।
US Central Command के अनुसार यह अभियान दो घंटे से अधिक समय तक चला। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर आकर्षित किया।
ट्रंप प्रशासन के नए टैरिफ का असर
अमेरिका ने Section 301 के तहत कई देशों पर 10% से 12.5% तक के नए टैरिफ स्लैब घोषित किए हैं।
राहत की बात यह रही कि भारत को 10% की निचली टैरिफ श्रेणी में रखा गया है। हालांकि इस फैसले से वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन को लेकर नई चिंताएं पैदा हुई हैं।
अमेरिका से रोजगार के मोर्चे पर अच्छी खबर
अमेरिका में पहली बार बेरोजगारी भत्ता मांगने वालों की संख्या में अप्रत्याशित गिरावट दर्ज की गई।
- शुरुआती बेरोजगारी दावे 22,000 घटकर 1.87 लाख रह गए।
- यह आंकड़ा सितंबर 1969 के बाद सबसे निचले स्तरों में शामिल है।
- बाजार का अनुमान करीब 2.12 लाख दावों का था।
मजबूत रोजगार आंकड़ों से यह संकेत मिला कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन इससे ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंका भी बढ़ गई।
जापान में महंगाई बढ़ी, फिर भी लक्ष्य से नीचे
जून महीने में जापान का Core Consumer Price Index (CPI) सालाना आधार पर 1.6% बढ़ा।
यह मई के 1.4% से बेहतर रहा, लेकिन अभी भी Bank of Japan के 2% महंगाई लक्ष्य से नीचे है। इससे जापान की मौद्रिक नीति को लेकर निवेशकों की नजरें बनी हुई हैं।
क्रूड ऑयल 100 डॉलर के पार पहुंचा
कच्चे तेल की कीमतों में इस सप्ताह जबरदस्त तेजी देखने को मिली।
- ब्रेंट क्रूड लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।
- WTI Crude करीब 91.49 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।
- इस सप्ताह ब्रेंट में लगभग 13.5% और WTI में करीब 10.9% की बढ़त दर्ज होने की संभावना है।
तेल की कीमतों में यह उछाल वैश्विक महंगाई और आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गया है।
सोने की कीमतों में हल्की कमजोरी
बढ़ती बॉन्ड यील्ड और ऊंची ब्याज दरों की आशंका के चलते सोने की कीमतों पर दबाव देखने को मिला।
- स्पॉट गोल्ड लगभग 0.1% गिरकर 4,042.77 डॉलर प्रति औंस पर रहा।
- अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 0.1% फिसले।
- स्पॉट सिल्वर 57.56 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखा।
भारतीय शेयर बाजार पर क्या रहेगा असर?
ग्लोबल बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। यदि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती हैं, तो इसका असर भारत की महंगाई, रुपये, आयात बिल और कॉर्पोरेट मार्जिन पर पड़ सकता है।
हालांकि भारत को अमेरिकी टैरिफ की निचली श्रेणी में रखा जाना एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। निवेशकों की नजर अब घरेलू कंपनियों के तिमाही नतीजों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और वैश्विक घटनाक्रम पर रहेगी।
डिस्क्लेमर
शेयर बाजार और कमोडिटी बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। इस लेख में दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है। NewsJagran.in किसी भी निवेश की सलाह नहीं देता। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।


