IPO Boom: भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे हफ्ते कमजोरी देखने को मिल रही है। एक तरफ मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू बाजार में लगातार आ रहे IPO भी सेकेंडरी मार्केट से बड़ी मात्रा में लिक्विडिटी खींच रहे हैं। यही वजह है कि अच्छी आर्थिक और कॉरपोरेट खबरों के बावजूद बाजार पर दबाव बना हुआ है।
7 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में भी बिकवाली का दबाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान निफ्टी 23,800 के नीचे फिसल गया। सुबह करीब 11:10 बजे सेंसेक्स 374.59 अंक यानी 0.49 फीसदी गिरकर 76,140.84 के स्तर पर था। वहीं निफ्टी 113 अंक यानी 0.47 फीसदी की गिरावट के साथ 23,784.70 पर कारोबार कर रहा था।
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी IT इंडेक्स करीब 2 फीसदी कमजोर रहा। निफ्टी मीडिया इंडेक्स में 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी और मेटल इंडेक्स भी करीब 1-1 फीसदी नीचे रहे। हालांकि टेलीकॉम इंडेक्स में करीब 1.7 फीसदी की तेजी देखने को मिली।
IPO की बाढ़ से बाजार पर क्यों बढ़ा दबाव?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, पिछले चार हफ्तों से बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है। खास बात यह है कि अर्थव्यवस्था और कंपनियों के मुनाफे से जुड़ी कई खबरें सकारात्मक होने के बावजूद बाजार में मजबूती नहीं आ रही है।
इसके पीछे कई वजहें हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और इसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बाजार के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए लंबे समय तक महंगा क्रूड महंगाई और कंपनियों की लागत दोनों पर असर डाल सकता है।
लेकिन इसके अलावा एक घरेलू फैक्टर भी बाजार की चाल पर असर डाल रहा है और वह है IPO का मौजूदा बूम।
इस सप्ताह करीब 11 मेनबोर्ड IPO बाजार में आने वाले हैं। इसके अलावा सितंबर में NSE और Jio जैसे बड़े नामों के मेगा IPO आने की उम्मीद भी बाजार में बनी हुई है। बड़े IPO आने पर निवेशकों और संस्थागत निवेशकों की बड़ी रकम नए इश्यू में लग सकती है। इसका सीधा असर सेकेंडरी मार्केट में उपलब्ध लिक्विडिटी पर पड़ सकता है।
निवेशकों का फोकस शेयर बाजार से IPO पर शिफ्ट
IPO की लगातार बढ़ती संख्या के बीच निवेशकों का एक हिस्सा सेकेंडरी मार्केट में शेयर खरीदने के बजाय नए इश्यू में पैसा लगाने को प्राथमिकता दे रहा है।
इसकी एक बड़ी वजह लिस्टिंग गेन की उम्मीद है। हाल के महीनों में कई IPO ने निवेशकों को मजबूत लिस्टिंग रिटर्न दिए हैं। ऐसे में नए IPO को लेकर भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी हुई है।
वीके विजयकुमार के मुताबिक, फिलहाल निवेशकों का ध्यान सेकेंडरी मार्केट की तुलना में IPO मार्केट पर ज्यादा है। सितंबर महीने में भी यह ट्रेंड जारी रहने की संभावना है।
अगर एक साथ कई बड़े IPO आते हैं, तो निवेशकों की बड़ी रकम कुछ समय के लिए नए इश्यू में लॉक हो सकती है। इससे शेयर बाजार के दूसरे हिस्सों में खरीदारी की ताकत कमजोर पड़ सकती है।
अमेरिका का जॉब्स डेटा भी बढ़ा सकता है चिंता
भारतीय बाजार के लिए सिर्फ घरेलू कारण ही चुनौती नहीं हैं। अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों का असर भी ग्लोबल मार्केट सेंटीमेंट पर पड़ रहा है।
अमेरिका में उम्मीद से बेहतर जॉब्स डेटा आने के बाद वहां ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंताएं बढ़ी हैं। अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति उम्मीद से ज्यादा सख्त रहती है, तो इसका असर दुनिया भर के इक्विटी और बॉन्ड बाजारों पर देखने को मिल सकता है।
अमेरिकी ब्याज दरों में ऊंचा स्तर विदेशी निवेशकों के लिए डॉलर आधारित एसेट्स को आकर्षक बनाए रख सकता है। ऐसे माहौल में उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी के प्रवाह पर दबाव बन सकता है।
ग्लोबल अनिश्चितता से निवेशक सतर्क
चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर का मानना है कि हालिया ग्लोबल बाजार की अस्थिरता के कारण निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।
ऊंची तेल कीमतें, जियोपॉलिटिकल तनाव और वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर घरेलू टेक्निकल लेवल के साथ-साथ प्रमुख ग्लोबल घटनाक्रमों पर भी रहेगी।
Nifty पर क्या है रणनीति?
सीएनबीसी आवाज के वीरेंद्र कुमार के मुताबिक, निफ्टी के लिए 24,000-24,055 का स्तर पहला अहम रेजिस्टेंस है। इसके ऊपर 24,140-24,180 और 24,233 के आसपास अगला बड़ा रेजिस्टेंस जोन माना जा रहा है।
वहीं नीचे की तरफ 23,788-23,846 पहला अहम बेस है। इसके टूटने पर 23,610-23,671 का अगला बेस महत्वपूर्ण हो सकता है।
रणनीति के लिहाज से 24,000-24,055 के नीचे आने वाली तेजी में बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। 23,788-23,846 का जोन निफ्टी के लिए खास महत्व रखता है। अगर यह बेस टूटता है तो बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है।
दूसरी तरफ अगर निफ्टी 24,055 के ऊपर टिकने में सफल रहता है, तो शॉर्ट कवरिंग हो सकती है और इंडेक्स अगले रेजिस्टेंस जोन की तरफ बढ़ सकता है।
Bank Nifty के अहम लेवल
बैंक निफ्टी के लिए 57,510-57,681 पहला रेजिस्टेंस जोन है। इसके ऊपर 57,889-57,967 और 58,056 के स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस माने जा रहे हैं।
नीचे की तरफ 57,067-57,233 पहला बेस है, जबकि 56,810-56,930 अगला अहम सपोर्ट जोन है।
फिलहाल बैंक निफ्टी पहले रेजिस्टेंस और पहले बेस के बीच रेंज में कारोबार कर रहा है। 57,067-57,233 का जोन काफी महत्वपूर्ण है। इसके ऊपर मजबूती आने पर खरीदारी और स्विंग मूव की संभावना बन सकती है। वहीं इसके नीचे टिकने पर इंडेक्स 56,930-56,810 की तरफ फिसल सकता है।
PFC और Motilal Oswal पर एक्सपर्ट की राय
मनास जायसवाल ने PFC में 1,019 रुपये के स्टॉप लॉस के साथ 365 रुपये के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह दी है। वहीं Motilal Oswal में 1,019 रुपये के स्टॉप लॉस के साथ 1,075 रुपये के टारगेट के लिए खरीदारी की राय दी गई है।
हालांकि निवेशकों को किसी भी स्टॉक में ट्रेड लेने से पहले अपनी रिस्क क्षमता और मौजूदा बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए।
सितंबर में बाजार की दिशा किस पर निर्भर करेगी?
कुल मिलाकर सितंबर में भारतीय शेयर बाजार के सामने कई चुनौतियां मौजूद हैं। एक तरफ IPO की बड़ी सप्लाई बाजार की लिक्विडिटी को प्रभावित कर सकती है, तो दूसरी तरफ महंगा कच्चा तेल और मिडिल ईस्ट का तनाव बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव डाल सकता है।
इसके अलावा अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर संकेत, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और ग्लोबल बाजारों का रुख भी भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
ऐसे में आने वाले दिनों में निवेशकों के लिए निफ्टी का 23,788-23,846 सपोर्ट जोन और 24,000-24,055 रेजिस्टेंस जोन बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। जब तक इंडेक्स इन स्तरों में से किसी एक तरफ निर्णायक ब्रेकआउट नहीं देता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी रह सकती है।
डिस्क्लेमर: NewsJagran.in पर प्रकाशित बाजार और निवेश संबंधी जानकारी विशेषज्ञों के विचारों पर आधारित है। इसे निवेश की सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश या ट्रेडिंग का निर्णय लेने से पहले अपने सर्टिफाइड वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


