नई दिल्ली: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र (Private Space Sector) की ऐतिहासिक उपलब्धि की जमकर सराहना की है। उन्होंने स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) के को-फाउंडर एवं सीईओ पवन कुमार चंदना और उनकी युवा टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि “बड़े सपने देखने की कोई उम्र नहीं होती।” अग्रवाल ने कहा कि स्काईरूट की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि युवाओं को सही अवसर और भरोसा मिले, तो वे भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।
भारत के भविष्य से मुलाकात जैसा अनुभव
कुछ मुलाकातें सिर्फ़ लोगों से नहीं, भारत के भविष्य से होती हैं।
मुझे @SkyrootA के Co-founder & CEO @PawanKChandana से मिलकर ऐसा ही महसूस हुआ।जब मैं कहता हूँ कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके युवा हैं, तो उसके पीछे ऐसे ही उदाहरण होते हैं।
Skyroot ने Vikram-1 के साथ भारत के निजी… pic.twitter.com/G0rYHGA8Fy
— Anil Agarwal (@AnilAgarwal_Ved) July 22, 2026 अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा किए गए अपने संदेश में लिखा कि कुछ मुलाकातें केवल लोगों से नहीं, बल्कि भारत के भविष्य से होती हैं। उन्होंने कहा कि जब भी वे भारत की सबसे बड़ी ताकत युवाओं को बताते हैं, तो उनके सामने पवन चंदना और उनकी टीम जैसे उदाहरण होते हैं।
उन्होंने स्काईरूट एयरोस्पेस को विक्रम-1 मिशन की सफलता पर बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक नया अध्याय है।
28 साल की औसत उम्र वाली टीम ने रचा इतिहास
अनिल अग्रवाल ने विशेष रूप से स्काईरूट एयरोस्पेस की युवा टीम का उल्लेख करते हुए कहा कि कंपनी की टीम की औसत आयु केवल 28 वर्ष है, लेकिन इस युवा समूह ने अपने साहस, नवाचार और मेहनत से दुनिया को दिखा दिया कि उम्र नहीं, बल्कि सोच और संकल्प सफलता तय करते हैं।
उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे युवाओं से मिलकर हमेशा प्रेरणा मिलती है, जो बड़े लक्ष्य निर्धारित करते हैं और उन्हें हासिल करने का साहस रखते हैं।
ISRO और IN-SPACe की भी सराहना
वेदांता चेयरमैन ने अपनी पोस्ट में स्काईरूट एयरोस्पेस के साथ-साथ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और IN-SPACe को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों और सरकारी संस्थाओं के बीच बेहतर सहयोग की बदौलत भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है।
उन्होंने अपने संदेश के अंत में लिखा, “यही है नए भारत की असली उड़ान।”
विक्रम-1 मिशन ने बनाया नया इतिहास
गौरतलब है कि भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 ने पिछले सप्ताह सफल उड़ान भरकर इतिहास रच दिया। इस मिशन ने साबित किया कि भारत का निजी अंतरिक्ष उद्योग अब वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना वर्ष 2018 में इसरो के दो पूर्व वैज्ञानिक पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका ने की थी। वर्तमान में पवन कुमार चंदना कंपनी के को-फाउंडर एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं, जबकि नागा भरत डाका को-फाउंडर एवं मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
भारत के स्पेस सेक्टर के लिए नई उड़ान
विशेषज्ञों का मानना है कि विक्रम-1 की सफलता केवल एक रॉकेट लॉन्च नहीं, बल्कि भारत के निजी स्पेस इकोसिस्टम की बढ़ती क्षमता का प्रतीक है। सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद स्टार्टअप्स को नवाचार और निवेश के नए अवसर मिले हैं। इससे भारत वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
अनिल अग्रवाल की टिप्पणी भी इसी बदलते भारत की तस्वीर पेश करती है, जहां युवा उद्यमी नई तकनीकों और बड़े विजन के साथ देश को अंतरिक्ष विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिला रहे हैं।


