नई दिल्ली: निवेश की दुनिया में अक्सर कहा जाता है कि सबसे बड़ा मुनाफा वहीं मिलता है, जहां सबसे ज्यादा जोखिम होता है। Myntra और Cult.fit के को-फाउंडर मुकेश बंसल ने इस बात को सच साबित कर दिखाया। उन्होंने साल 2018 में उस स्टार्टअप पर भरोसा जताया, जिस पर शायद ही किसी निवेशक को विश्वास था। आज वही निवेश करीब ₹12 करोड़ से बढ़कर ₹700 करोड़ से ज्यादा की वैल्यू का हो चुका है।
भारत की पहली निजी स्पेस यूनिकॉर्न Skyroot Aerospace की सफलता ने न केवल भारतीय स्पेस सेक्टर को नई ऊंचाई दी है, बल्कि शुरुआती निवेशकों को भी शानदार रिटर्न दिया है। मुकेश बंसल इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आए हैं।
Vikram-1 लॉन्च के साथ बना इतिहास
18 जुलाई 2026 को श्रीहरिकोटा से Vikram-1 रॉकेट की सफल उड़ान हुई। यह भारत की पहली निजी कंपनी द्वारा किया गया सफल ऑर्बिटल लॉन्च था। इस उपलब्धि के साथ Skyroot Aerospace ने भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया।
हालांकि, इस सफलता की शुरुआत किसी बड़े कॉरपोरेट कैंपस से नहीं बल्कि हैदराबाद के एक छोटे से ऑफिस से हुई थी, जहां दो वैज्ञानिकों ने एक बड़े सपने के साथ अपनी यात्रा शुरू की।
ISRO की नौकरी छोड़कर शुरू किया स्टार्टअप
Skyroot Aerospace की स्थापना साल 2018 में पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका ने की थी। दोनों उस समय ISRO में वैज्ञानिक थे।
Space Activities Bill के ड्राफ्ट को पढ़ने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि भविष्य में भारत निजी कंपनियों के लिए भी अंतरिक्ष क्षेत्र के दरवाजे खोल सकता है। इसी भरोसे के साथ उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी और अपना स्टार्टअप शुरू किया।
उस समय भारत का स्पेस सेक्टर लगभग पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में था। इसलिए किसी निजी कंपनी द्वारा रॉकेट बनाना और उसे अंतरिक्ष तक पहुंचाना अधिकांश लोगों को असंभव सपना लगता था।
जब किसी निवेशक ने भरोसा नहीं किया
Skyroot के शुरुआती दिनों में कंपनी के लिए फंड जुटाना बेहद मुश्किल था। बड़े वेंचर कैपिटल फंड इस सेक्टर में निवेश करने से बच रहे थे क्योंकि उन्हें बिजनेस मॉडल और भविष्य दोनों पर संदेह था।
ऐसे समय में Myntra और Cult.fit के संस्थापक मुकेश बंसल ने कंपनी पर भरोसा जताया और शुरुआती निवेश किया।
Tracxn के अनुसार, उन्होंने अलग-अलग फंडिंग राउंड में करीब 13 लाख डॉलर (लगभग ₹12 करोड़) का निवेश किया। कई वर्षों तक वह Skyroot Aerospace के प्रमुख एंजेल निवेशक बने रहे।
2020 में सरकार के फैसले ने बदल दी तस्वीर
साल 2020 भारतीय स्पेस सेक्टर के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
भारत सरकार ने निजी कंपनियों के लिए स्पेस सेक्टर खोल दिया। इसके बाद Skyroot Aerospace को निवेशकों का भरोसा मिलने लगा और कंपनी ने तेजी से फंडिंग जुटानी शुरू कर दी।
इसके साथ ही भारतीय स्पेस टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम में भी तेजी से विस्तार देखने को मिला।
Vikram-S से मिली पहली बड़ी सफलता
नवंबर 2022 में Skyroot ने Vikram-S लॉन्च किया, जो अंतरिक्ष तक पहुंचने वाला भारत का पहला निजी रॉकेट बना।
इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि निजी भारतीय कंपनियां भी स्पेस टेक्नोलॉजी में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकती हैं।
इसके बाद कंपनी की वैल्यूएशन और निवेश दोनों में तेजी आई।
2026 में बनी भारत की पहली स्पेस यूनिकॉर्न
मई 2026 में Skyroot Aerospace ने लगभग ₹570 करोड़ की नई फंडिंग जुटाई।
इस फंडिंग राउंड के बाद कंपनी का वैल्यूएशन 1.1 अरब डॉलर पहुंच गया और Skyroot भारत की पहली स्पेसटेक यूनिकॉर्न बन गई।
यह उपलब्धि भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए भी ऐतिहासिक मानी गई।
₹12 करोड़ से बन गए ₹700 करोड़
Tracxn के मुताबिक, मुकेश बंसल के पास अभी भी Skyroot Aerospace में लगभग 5.7% हिस्सेदारी है।
इस हिस्सेदारी की मौजूदा अनुमानित वैल्यू ₹600 करोड़ से अधिक बताई जा रही है।
इसके अलावा उन्होंने समय-समय पर अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचकर ₹100 करोड़ से ज्यादा की रकम पहले ही हासिल कर ली है।
इस तरह उनकी कुल कमाई और बची हुई हिस्सेदारी की संयुक्त वैल्यू ₹700 करोड़ से अधिक हो चुकी है।
यानी लगभग ₹12 करोड़ का शुरुआती निवेश सिर्फ आठ वर्षों में करीब 60 गुना बढ़ गया।
सिर्फ निवेश नहीं, दूरदर्शिता की मिसाल
मुकेश बंसल पहले Myntra के जरिए भारत के फैशन ई-कॉमर्स सेक्टर में और बाद में Cult.fit के जरिए हेल्थ एवं फिटनेस इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना चुके थे।
लेकिन Skyroot में किया गया उनका निवेश पूरी तरह अलग था। उन्होंने ऐसे सेक्टर पर भरोसा जताया जहां उस समय न बाजार तैयार था और न ही निवेशकों का विश्वास।
आज यही फैसला भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के सबसे सफल एंजेल निवेशों में गिना जा रहा है।
भारत का स्पेस सेक्टर तेजी से बढ़ रहा
Skyroot की सफलता केवल एक कंपनी की सफलता नहीं है, बल्कि पूरे भारतीय स्पेस सेक्टर में आए बदलाव का संकेत है।
सरकार के अनुसार, वर्ष 2014 में भारत में केवल एक स्पेस स्टार्टअप था, जबकि 2026 तक इनकी संख्या 400 से अधिक हो चुकी है।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2033 तक भारत की स्पेस इकोनॉमी को 8.4 अरब डॉलर से बढ़ाकर 44 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। ऐसे में Skyroot जैसी कंपनियां इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
क्या सीख मिलती है इस निवेश से?
मुकेश बंसल की कहानी बताती है कि बड़ी संपत्ति केवल लोकप्रिय कंपनियों में निवेश से नहीं बनती, बल्कि सही समय पर सही विचार और मजबूत टीम पर भरोसा करने से भी बनती है। हालांकि, हर शुरुआती निवेश इतनी बड़ी सफलता नहीं देता और स्टार्टअप निवेश में जोखिम भी काफी अधिक होता है। इसलिए किसी भी निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करना और विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। स्टार्टअप, शेयर बाजार और अन्य निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होते हैं। NewsJagran किसी भी प्रकार की निवेश सलाह नहीं देता। निवेश का निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।


