मध्य प्रदेश के 21 वर्षीय सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से जाना जाता है, इन दिनों अजनार नदी की सफाई को लेकर चर्चा में हैं। लंबे समय से प्रदूषित नदी की सफाई में जुटे सुरेंद्र की मेहनत ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा। इसी बीच उनकी मुलाकात मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से हुई। मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों की सराहना की।
हालांकि, मुख्यमंत्री से हुई इस मुलाकात का एक वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। यूट्यूबर ध्रुव राठी ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सुरेंद्र की मेहनत का श्रेय लेने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद बिट्टू तबाही ने खुद सामने आकर इस पूरे विवाद पर अपनी बात रखी।
CM मोहन यादव से मिले ‘बिट्टू तबाही’
सुरेंद्र सिंह चौधरी हाल ही में भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिले। इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने अजनार नदी की सफाई को लेकर उनके प्रयासों की सराहना की और उनके जज्बे की तारीफ की।
मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से भी मुलाकात का वीडियो शेयर किया गया। वीडियो में सुरेंद्र अपने सफाई अभियान और उससे जुड़े अनुभवों को लेकर चर्चा करते नजर आए। इसके बाद यह मुलाकात सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई।
ध्रुव राठी ने सरकार पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री और बिट्टू तबाही की मुलाकात का वीडियो सामने आने के बाद यूट्यूबर ध्रुव राठी ने इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक युवा लंबे समय से खुद नदी की सफाई के लिए मेहनत कर रहा था, तब उसके काम के सामने आने के बाद सरकार की ओर से उसे बुलाकर मुलाकात की जा रही है।
राठी की टिप्पणी का मुख्य सवाल यह था कि क्या सरकार वास्तव में नदी की सफाई की समस्या को दूर करने के लिए पर्याप्त काम कर रही है या फिर ऐसे मामलों में केवल प्रचार और जनसंपर्क तक सीमित रह रही है।
उनकी टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए, जबकि कई यूजर्स ने मुख्यमंत्री की ओर से युवा की पहल की सराहना किए जाने को सकारात्मक कदम बताया।
बिट्टू तबाही ने ध्रुव राठी को दिया जवाब
ध्रुव राठी की टिप्पणी के बाद सुरेंद्र सिंह चौधरी यानी बिट्टू तबाही ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके लिए यह मामला किसी को क्रेडिट देने या लेने का नहीं है।
सुरेंद्र के मुताबिक, सरकार पहले भी उनके काम की सराहना कर चुकी है। उनके लिए असली मुद्दा लोगों में सिविक सेंस यानी नागरिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देना है।
उनका कहना है कि नदी, तालाब और दूसरे जलस्रोतों की सफाई केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। आम नागरिकों को भी अपने आसपास के पर्यावरण को साफ रखने और जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने में योगदान देना चाहिए।
बिट्टू तबाही के इस जवाब से यह संकेत मिला कि वह अपनी मुहिम को राजनीतिक बहस के बजाय जनभागीदारी और पर्यावरण जागरूकता से जोड़कर देखते हैं।
CM मोहन यादव ने भी की सुरेंद्र की तारीफ
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सुरेंद्र के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि समाज में बदलाव लाने के लिए हमेशा बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत नहीं होती। कई बार किसी एक व्यक्ति की ईमानदार पहल भी बदलाव की शुरुआत कर सकती है।
मुख्यमंत्री ने सुरेंद्र के अभियान को राज्य सरकार के जल गंगा संवर्धन अभियान से भी जोड़कर देखा। इस अभियान का उद्देश्य जलस्रोतों के संरक्षण, पुनर्जीवन और उनमें जनभागीदारी को बढ़ावा देना है।
अजनार नदी की सफाई से सोशल मीडिया पर मिली पहचान
सुरेंद्र सिंह चौधरी की पहचान अजनार नदी की सफाई के अभियान से बनी। सोशल मीडिया पर उनके काम की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी पहल की सराहना की।
बताया जाता है कि वह लंबे समय से नदी की सफाई में जुटे हुए हैं। उनकी मेहनत की चर्चा केवल भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि विदेशों में भी उनके काम ने ध्यान खींचा।
The Ocean Cleanup के CEO ने दिया नौकरी का ऑफर
बिट्टू तबाही की कहानी तब और चर्चा में आई जब नीदरलैंड स्थित गैर-लाभकारी संस्था The Ocean Cleanup के संस्थापक और CEO बॉयन स्लैट की ओर से उन्हें नौकरी का ऑफर दिए जाने की बात सामने आई।
सोशल मीडिया पर एक यूजर ने सुरेंद्र के सफाई अभियान की पहले और बाद की तस्वीरें साझा की थीं। पोस्ट में दावा किया गया कि 21 वर्षीय सुरेंद्र कई महीनों से प्रदूषित अजनार नदी की सफाई में जुटे हुए हैं।
इसके बाद उनकी कहानी तेजी से वायरल हुई और पर्यावरण संरक्षण को लेकर उनके प्रयासों की चर्चा देश-विदेश में होने लगी।
क्रेडिट से ज्यादा नागरिक जिम्मेदारी पर जोर
बिट्टू तबाही और ध्रुव राठी के बीच हुई यह सोशल मीडिया बहस अब केवल एक मुलाकात तक सीमित नहीं रह गई है। इसने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि पर्यावरण और सार्वजनिक जलस्रोतों की सफाई की जिम्मेदारी केवल सरकार की है या आम लोगों को भी इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
सुरेंद्र का रुख इस मामले में स्पष्ट नजर आता है। वह अपनी पहल को किसी राजनीतिक श्रेय की लड़ाई के बजाय लोगों को जागरूक करने और अपने स्तर पर बदलाव की शुरुआत करने के उदाहरण के तौर पर देखते हैं।
अजनार नदी की सफाई से शुरू हुई उनकी मुहिम ने कम से कम इतना जरूर साबित किया है कि सोशल मीडिया के दौर में किसी एक व्यक्ति की लगातार की गई मेहनत भी बड़े स्तर पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर सकती है।


