गौतम अदाणी ने मुंबई में डायमंड सॉर्टर के रूप में करियर शुरू किया और फिर डायमंड ब्रोकरेज व इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट बिजनेस के जरिए करोड़ों की कमाई की। जानिए कैसे रखी अदाणी साम्राज्य की नींव।
नई दिल्ली: आज गौतम अदाणी भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के सबसे चर्चित उद्योगपतियों में शामिल हैं। अदाणी ग्रुप का कारोबार बंदरगाहों, एयरपोर्ट, बिजली, ग्रीन एनर्जी, सीमेंट, डेटा सेंटर और लॉजिस्टिक्स जैसे कई क्षेत्रों में फैला हुआ है। लेकिन इस विशाल कारोबारी साम्राज्य की शुरुआत किसी बड़े उद्योग या विरासत से नहीं हुई थी। बहुत कम लोग जानते हैं कि गौतम अदाणी महज 20 साल की उम्र में ही मिलियनेयर बन गए थे, और इसकी शुरुआत मुंबई के डायमंड मार्केट से हुई थी।
आज उनकी अनुमानित नेटवर्थ करीब 90.3 अरब डॉलर (लगभग 8.68 लाख करोड़ रुपये) बताई जाती है। हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, जोखिम और सही समय पर लिए गए कारोबारी फैसलों से भरा रहा है।
16 साल की उम्र में छोड़ दी पढ़ाई
गौतम अदाणी का जन्म गुजरात के अहमदाबाद में हुआ था। आर्थिक परिस्थितियों और कारोबार करने की इच्छा के चलते उन्होंने कम उम्र में ही पढ़ाई बीच में छोड़ दी। लगभग 16 साल की उम्र में वे बेहतर अवसरों की तलाश में मुंबई पहुंच गए।
मुंबई में उन्होंने प्रसिद्ध डायमंड ट्रेडिंग मार्केट जावेरी बाजार में स्थित महिंद्रा ब्रदर्स नामक कंपनी में डायमंड सॉर्टर के रूप में काम शुरू किया। यहां उन्होंने हीरे की गुणवत्ता पहचानने, खरीद-बिक्री और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के शुरुआती गुर सीखे।
डायमंड ब्रोकरेज बना पहला सफल बिजनेस
कुछ समय तक नौकरी करने के बाद गौतम अदाणी ने अपना खुद का डायमंड ब्रोकरेज कारोबार शुरू किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह कारोबार तेजी से सफल हुआ और इसी बिजनेस के दम पर वे लगभग 20 साल की उम्र तक मिलियनेयर बन गए।
डायमंड ट्रेडिंग से हुई कमाई ने उन्हें बड़े स्तर पर व्यापार करने का आत्मविश्वास दिया और यहीं से उनके कारोबारी सफर को नई दिशा मिली।
बड़े भाई के साथ शुरू किया इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट कारोबार
1981 के आसपास गौतम अदाणी अहमदाबाद लौट आए और अपने बड़े भाई के प्लास्टिक कारोबार से जुड़ गए। इस दौरान उन्होंने प्लास्टिक उद्योग में इस्तेमाल होने वाले पीवीसी (Polyvinyl Chloride) और अन्य कच्चे माल के आयात का काम संभाला।
यहीं से उन्हें इंटरनेशनल ट्रेडिंग, कमोडिटी मार्केट और इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट बिजनेस की गहरी समझ मिली। यह अनुभव आगे चलकर उनके पूरे बिजनेस साम्राज्य की सबसे मजबूत नींव साबित हुआ।
सरकारी नीतियों का उठाया फायदा
1985 में भारत सरकार ने आयात नीतियों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए, जिससे व्यापार के नए अवसर खुले। गौतम अदाणी ने इस मौके का फायदा उठाते हुए छोटे उद्योगों के लिए कच्चे माल के आयात का कारोबार तेजी से बढ़ाया।
उनकी कारोबारी समझ और वैश्विक बाजार की जानकारी ने उन्हें अन्य व्यापारियों से अलग पहचान दिलाई।
1988 में रखी अदाणी ग्रुप की नींव
इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट कारोबार में सफलता मिलने के बाद गौतम अदाणी ने 1988 में अदाणी एक्सपोर्ट्स लिमिटेड की स्थापना की, जिसे आज अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के नाम से जाना जाता है।
शुरुआत में कंपनी कृषि उत्पादों और ऊर्जा से जुड़े कमोडिटी ट्रेडिंग का काम करती थी। धीरे-धीरे कारोबार का विस्तार बंदरगाह, बिजली, कोयला, गैस, एयरपोर्ट, सीमेंट, ग्रीन एनर्जी, डेटा सेंटर और लॉजिस्टिक्स जैसे कई क्षेत्रों तक पहुंच गया।
आज किन-किन सेक्टर में फैला है अदाणी ग्रुप का कारोबार?
वर्तमान में अदाणी ग्रुप कई प्रमुख क्षेत्रों में सक्रिय है, जिनमें शामिल हैं—
- पोर्ट और लॉजिस्टिक्स
- एयरपोर्ट संचालन
- बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन
- ग्रीन एनर्जी
- सीमेंट
- प्राकृतिक गैस वितरण
- डेटा सेंटर
- माइनिंग और रिसोर्सेज
- एग्री बिजनेस
- इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट
संघर्ष से सफलता तक का सफर
गौतम अदाणी की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सीमित संसाधनों से शुरुआत करने वाला व्यक्ति भी सही अवसरों की पहचान, जोखिम लेने की क्षमता और लगातार मेहनत के दम पर वैश्विक कारोबारी पहचान बना सकता है। डायमंड सॉर्टर की नौकरी से शुरू हुआ उनका सफर आज दुनिया के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक तक पहुंच चुका है।


