Indian Alphonso Mango Export: बेमौसम गर्मी, जलवायु परिवर्तन और बढ़ती लॉजिस्टिक चुनौतियों के बावजूद भारत के मशहूर अल्फांसो (हापुस) आम ने वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाए रखी है। महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में इस साल उत्पादन प्रभावित होने के बावजूद भारत ने चालू वित्त वर्ष में रिकॉर्ड 34 देशों तक हापुस आम का निर्यात किया है। यह भारतीय कृषि और निर्यात क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
लोकसभा में 21 जुलाई को वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लिखित जवाब में बताया कि उत्पादन में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के बावजूद भारतीय अल्फांसो आम की वैश्विक मांग लगातार बनी हुई है। सरकार ने निर्यात बढ़ाने और प्रभावित निर्यातकों को राहत देने के लिए कई कदम भी उठाए हैं।
बेमौसम गर्मी ने कोंकण में घटाया उत्पादन
महाराष्ट्र का रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिला अल्फांसो आम की सबसे प्रमुख पैदावार वाला क्षेत्र माना जाता है। लेकिन इस वर्ष यहां सामान्य से अधिक तापमान और मौसम में लगातार बदलाव के कारण आम के बागानों पर प्रतिकूल असर पड़ा।
विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गर्मी की वजह से फूल आने की प्रक्रिया प्रभावित हुई, जिससे उत्पादन में कमी आई। इसका सीधा असर निर्यात गुणवत्ता वाले फलों की उपलब्धता पर भी देखने को मिला।
लॉजिस्टिक्स संकट ने बढ़ाई मुश्किलें
सिर्फ उत्पादन ही नहीं, बल्कि निर्यात के दौरान भी व्यापारियों को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
मुख्य समस्याएं थीं:
- वेस्ट एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण शिपमेंट में देरी
- कई प्रमुख बंदरगाहों पर कंटेनरों की भीड़
- समुद्री मालभाड़े (Freight) में भारी बढ़ोतरी
- वॉर-रिस्क सरचार्ज लागू होना
- कंटेनरों की उपलब्धता में कमी
इन सभी कारणों से निर्यात लागत बढ़ी, लेकिन इसके बावजूद भारतीय निर्यातकों ने वैश्विक बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत बनाए रखी।
24 देशों से बढ़कर 34 देशों तक पहुंचा भारतीय हापुस
सरकार के अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अल्फांसो आम का निर्यात 24 देशों तक सीमित था। वहीं चालू वित्त वर्ष में यह आंकड़ा बढ़कर 34 देशों तक पहुंच गया है।
भारतीय हापुस आम को जिन प्रमुख देशों में बढ़ावा दिया गया, उनमें शामिल हैं:
- अमेरिका
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
- बेल्जियम
- जर्मनी
- ऑस्ट्रेलिया
- रूस
- सऊदी अरब
- आइसलैंड
इसके अलावा 15 से अधिक देशों में भारतीय आम के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष मार्केटिंग कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
जापान और नेपाल को लेकर सरकार ने दिया स्पष्टीकरण
लोकसभा में सरकार ने स्पष्ट किया कि नेपाल को आम के निर्यात पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। नेपाल में निर्धारित आयात नियमों का पालन करने के बाद भारतीय आम का निर्यात सामान्य रूप से जारी है।
वहीं जापान के संदर्भ में सरकार ने बताया कि नेशनल प्लांट प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन (NPPO) जापानी अधिकारियों द्वारा 2026 प्री-सीजन निरीक्षण के दौरान उठाए गए तकनीकी मुद्दों के समाधान के लिए लगातार संपर्क में है, ताकि भविष्य में निर्यात सुचारु रूप से जारी रह सके।
निर्यातकों को राहत देने के लिए सरकार की पहल
लॉजिस्टिक्स लागत और अतिरिक्त बीमा खर्च से प्रभावित निर्यातकों की सहायता के लिए केंद्र सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं।
सरकार की प्रमुख पहलें:
- RELIEF Initiative के तहत निर्यातकों को सहायता।
- Export Promotion Mission के माध्यम से समर्थन।
- भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम (ECGC) के जरिए बीमाकृत निर्यातकों और पात्र MSMEs को राहत।
- APEDA की वित्तीय सहायता योजना के तहत एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना।
- गुणवत्ता मानकों (Quality Compliance) और नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के विकास के लिए सहयोग।
इन योजनाओं का उद्देश्य भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करना और निर्यातकों की लागत कम करना है।
जलवायु परिवर्तन के बीच भारतीय आम की बढ़ती वैश्विक मांग
इस वर्ष उत्पादन में कमी आने के बावजूद भारत का 34 देशों तक अल्फांसो आम का निर्यात यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय हापुस की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए बेहतर कृषि तकनीक, सिंचाई प्रबंधन और निर्यात लॉजिस्टिक्स को और मजबूत किया जाए तो आने वाले वर्षों में भारत अल्फांसो आम के वैश्विक निर्यात में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।


