SBI Funds Management Listing: देश के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल SBI Funds Management की शेयर बाजार में बहुप्रतीक्षित लिस्टिंग आखिरकार हो गई, लेकिन यह निवेशकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। ग्रे मार्केट में जहां शेयर के करीब ₹671 पर सूचीबद्ध होने की चर्चा थी, वहीं वास्तविक लिस्टिंग महज ₹613.30 पर हुई। यानी जिन निवेशकों को लिस्टिंग गेन से बड़े मुनाफे की उम्मीद थी, उन्हें प्रति शेयर केवल ₹39.30 (करीब 6.85%) का फायदा मिला।
उम्मीद से कमजोर रही लिस्टिंग
बाजार में कमजोरी के बीच SBI Funds Management का शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर ₹613.30 के भाव पर सूचीबद्ध हुआ। यह कंपनी के ऊपरी प्राइस बैंड ₹574 से करीब 6.85% ऊपर था।
वहीं बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर शेयर ₹610 पर लिस्ट हुआ, जो इश्यू प्राइस से लगभग 6.27% अधिक था।
हालांकि यह लिस्टिंग सकारात्मक रही, लेकिन ग्रे मार्केट में चल रहे प्रीमियम की तुलना में काफी कमजोर मानी गई। लिस्टिंग से पहले शेयर का GMP लगभग ₹97 चल रहा था, जिससे निवेशकों को कहीं अधिक रिटर्न की उम्मीद थी।
निवेशकों को कितना मिला लिस्टिंग गेन?
यदि किसी निवेशक को आईपीओ में शेयर ₹574 के ऊपरी प्राइस बैंड पर मिले थे, तो:
- NSE लिस्टिंग प्राइस: ₹613.30
- प्रति शेयर लाभ: ₹39.30
- रिटर्न: लगभग 6.85%
यानी एक लॉट पर मिलने वाला मुनाफा भी बाजार की अपेक्षाओं से काफी कम रहा।
₹9,795 करोड़ का था इस साल का सबसे बड़ा IPO
SBI Funds Management का ₹9,795.31 करोड़ का आईपीओ 14 जुलाई को खुला था और 16 जुलाई को बंद हुआ। यह इस साल के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल रहा।
निवेशकों ने इस इश्यू में जबरदस्त रुचि दिखाई और आईपीओ कुल 41.66 गुना सब्सक्राइब हुआ।
सब्सक्रिप्शन का विवरण इस प्रकार रहा:
| निवेशक श्रेणी | सब्सक्रिप्शन |
|---|---|
| QIB (Qualified Institutional Buyers) | 140.11 गुना |
| NII (Non-Institutional Investors) | 22.51 गुना |
| रिटेल निवेशक | 3.60 गुना |
| कुल | 41.66 गुना |
कंपनी को IPO से नहीं मिला कोई पैसा
इस आईपीओ की एक खास बात यह रही कि यह पूरी तरह Offer for Sale (OFS) था। इसका मतलब कंपनी ने कोई नए शेयर जारी नहीं किए।
इस इश्यू के जरिए मौजूदा शेयरधारकों स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और Amundi ने करीब 17.10 करोड़ शेयर बेचे। इसलिए आईपीओ से जुटाई गई पूरी राशि इन्हीं शेयरधारकों को मिली और SBI Funds Management को सीधे तौर पर एक भी रुपया प्राप्त नहीं हुआ।
देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में शामिल
SBI Funds Management की स्थापना वर्ष 1992 में हुई थी और यह SBI Mutual Fund का संचालन करती है।
कंपनी वर्तमान में लगभग ₹16.32 लाख करोड़ की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) संभाल रही है, जो भारत के कुल म्यूचुअल फंड उद्योग के करीब 15.5% के बराबर है। AUM के लिहाज से यह देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में गिनी जाती है।
निवेशकों को क्यों हुई निराशा?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत सब्सक्रिप्शन और ऊंचे ग्रे मार्केट प्रीमियम के कारण निवेशकों को दो अंकों में लिस्टिंग गेन की उम्मीद थी। लेकिन बाजार में कमजोरी और लिस्टिंग के समय सीमित खरीदारी के चलते शेयर अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया।
हालांकि कंपनी के मजबूत कारोबार, बड़े AUM और म्यूचुअल फंड उद्योग में मजबूत स्थिति को देखते हुए कई विश्लेषकों का मानना है कि यह शेयर लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आगे बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
निष्कर्ष
SBI Funds Management का आईपीओ रिकॉर्ड सब्सक्रिप्शन हासिल करने में सफल रहा, लेकिन इसकी लिस्टिंग निवेशकों की उम्मीदों के मुकाबले फीकी रही। प्रति शेयर केवल ₹39 का शुरुआती लाभ मिलने से लिस्टिंग गेन की उम्मीद रखने वाले निवेशकों को निराशा हाथ लगी। हालांकि, कंपनी की मजबूत बाजार स्थिति और दीर्घकालिक विकास क्षमता को देखते हुए अब निवेशकों की नजर इसके आगे के प्रदर्शन पर रहेगी।


