ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल कौन बनाता है, इन्हें किसने डिजाइन किया, इनकी कीमत कितनी है और किन सरकारी-प्राइवेट कंपनियों की इसमें भूमिका है? जानिए पूरी जानकारी।
नई दिल्ली: भारत की रक्षा क्षमता को दुनिया भर में नई पहचान दिलाने वाली ब्रह्मोस (BrahMos) और आकाश (Akash) मिसाइल प्रणालियां अब केवल भारतीय सेना की ताकत ही नहीं हैं, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं। आधुनिक तकनीक, उच्च सटीकता और युद्ध में साबित प्रदर्शन की वजह से कई देश इन स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों में रुचि दिखा रहे हैं।
हालांकि, अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल आखिर कौन बनाता है? इन्हें किसने डिजाइन किया है और इनकी कीमत कितनी होती है? आइए इन सभी सवालों के जवाब विस्तार से जानते हैं।
कौन बनाता है ब्रह्मोस मिसाइल?
ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का निर्माण ब्रह्मोस एयरोस्पेस लिमिटेड (BrahMos Aerospace) करती है। यह भारत के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) और रूस की NPO Mashinostroyeniya के बीच स्थापित संयुक्त उद्यम (Joint Venture) है।
ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज परिचालन (Operational) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल है। इसे जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी से लॉन्च किया जा सकता है। समय के साथ इसके कई उन्नत संस्करण विकसित किए गए हैं, जिनकी मारक क्षमता और सटीकता पहले से बेहतर हुई है।
आकाश मिसाइल कौन बनाता है?
आकाश सतह से हवा में मार करने वाली (Surface-to-Air Missile) प्रणाली का निर्माण भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) करती है। इस परियोजना का तकनीकी विकास DRDO ने किया है, जबकि बड़े पैमाने पर उत्पादन की जिम्मेदारी BDL संभालती है।
आकाश मिसाइल भारतीय वायुसेना और थलसेना की वायु रक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह दुश्मन के लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और अन्य हवाई खतरों को निशाना बनाने में सक्षम है।
आकाश मिसाइल के प्रमुख वेरिएंट
भारत ने समय के साथ आकाश मिसाइल प्रणाली को लगातार आधुनिक बनाया है। इसके प्रमुख संस्करण हैं:
- आकाश-1S
- आकाश प्राइम
- आकाश-NG (नेक्स्ट जनरेशन)
इन नए वेरिएंट में बेहतर रडार, अधिक सटीकता और उन्नत सीकर तकनीक का उपयोग किया गया है।
किसने किया इन मिसाइलों का डिजाइन?
आकाश मिसाइल के डिजाइनर
आकाश मिसाइल कार्यक्रम का नेतृत्व प्रसिद्ध भारतीय एयरोस्पेस इंजीनियर प्रह्लाद राम राव (Prahlada Ram Rao) ने किया। वे DRDO की प्रमुख प्रयोगशाला डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) के पूर्व निदेशक रह चुके हैं और भारत के कई महत्वपूर्ण मिसाइल कार्यक्रमों में उनका अहम योगदान रहा है।
ब्रह्मोस मिसाइल का डिजाइन
ब्रह्मोस मिसाइल का डिजाइन भारत के DRDO और रूस के NPO Mashinostroyeniya के वैज्ञानिकों ने संयुक्त रूप से विकसित किया। दोनों देशों के तकनीकी सहयोग से तैयार यह मिसाइल आज भारत की सबसे सफल रक्षा परियोजनाओं में गिनी जाती है।
ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल की कीमत कितनी है?
मिसाइलों की कीमत उनके वेरिएंट, रेंज, लॉन्च प्लेटफॉर्म और कॉन्फिगरेशन के अनुसार बदलती रहती है।
आकाश मिसाइल
- अनुमानित प्रति यूनिट कीमत: करीब ₹2.5 करोड़
ब्रह्मोस मिसाइल
- अनुमानित कीमत: 3.5 से 4.85 मिलियन अमेरिकी डॉलर
- भारतीय मुद्रा में लगभग ₹30 करोड़ से ₹42 करोड़ (डॉलर-रुपया विनिमय दर के अनुसार अनुमानित)
विशेषज्ञों के अनुसार ब्रह्मोस के एयर-लॉन्च, शिप-लॉन्च और एक्सटेंडेड-रेंज वेरिएंट की लागत अलग-अलग हो सकती है।
इन प्राइवेट कंपनियों की भी होती है अहम भूमिका
भारत के रक्षा उत्पादन में अब निजी कंपनियों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। ब्रह्मोस और आकाश जैसी मिसाइल प्रणालियों के लिए कई कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, प्रोपेलेंट, विस्फोटक और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों की आपूर्ति करती हैं।
इनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
- डेटा पैटर्न्स (Data Patterns)
- प्रीमियर एक्सप्लोसिव्स (Premier Explosives)
- सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया (Solar Industries India)
इन कंपनियों की भागीदारी से भारत का रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुआ है।
भारत के लिए क्यों अहम हैं ये मिसाइलें?
ब्रह्मोस और आकाश सिर्फ रक्षा उपकरण नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और रक्षा निर्यात क्षमता के प्रतीक बन चुके हैं। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में रक्षा निर्यात को कई गुना बढ़ाना है और इन दोनों मिसाइल प्रणालियों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। कई मित्र देशों ने इन प्रणालियों में रुचि दिखाई है, जिससे भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल रही है।
नोट: मिसाइलों की वास्तविक लागत, कॉन्फिगरेशन, निर्यात अनुबंध और उत्पादन बैच के अनुसार बदल सकती है। रक्षा सौदों में आधिकारिक कीमतें हमेशा सार्वजनिक नहीं की जातीं।


